दिव्यांग पेंशन में बड़ा सुधार, 40 फीसदी दिव्यांगता पर जन्म से ही आर्थिक सहायता का रास्ता साफ केंद्रीय कैबिनेट ने दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा खत्म कर दी है और पात्रता की न्यूनतम सीमा घटाकर 40 फीसदी कर दी है। इसके साथ ही योजना का बजट 53,428 करोड़ रुपये तय करते हुए कई सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के नाम भी बदल दिए हैं। विशेष जरूरतों वाले नागरिकों को सशक्त बनाने के इरादे से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा तंत्र में व्यापक फेरबदल को हरी झंडी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि ग्रामीण विकास विभाग से संचालित होने वाले राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से लेकर 2030-31 तक निरंतर जारी रखा जाएगा। आगामी पांच साल की इस समयावधि के लिए सरकार ने 53,428 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निर्धारित की है, जिसके तहत पेंशन के दायरे और पात्रता की शर्तों को बेहद आसान बनाया गया है। पात्रता के मानकों में बड़ी ढील और जन्म से लाभ इस ताजा नीतिगत निर्णय का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि अब पेंशन पाने के लिए किसी न्यूनतम उम्र की दरकार नहीं होगी। दिव्यांगजन अब जीवन के पहले दिन यानी जन्म से ही इस कल्याणकारी वित्तीय लाभ के हकदार बन सकेंगे। इसके अतिरिक्त, बेंचमार्क दिव्यांगता का स्तर भी पहले के 80 फीसदी से घटाकर सीधे 40 फीसदी कर दिया गया है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप किए गए इस बदलाव का मुख्य मकसद जरूरतमंदों को बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के सरकारी मदद की छतरी मुहैया कराना है। आयु वर्ग के अनुसार निर्धारित सहायता राशि संशोधित रूपरेखा के मुताबिक लाभार्थियों को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटकर मासिक भुगतान किया जाएगा। शून्य से लेकर 79 वर्ष तक की आयु वाले पात्र लाभार्थियों के खाते में हर महीने 375 रुपये की राशि भेजी जाएगी। वहीं, 80 साल या उससे अधिक आयु पूरी कर चुके वयोवृद्ध दिव्यांगजनों के लिए यह मासिक सहायता 625 रुपये तय की गई है। इस व्यवस्था में यह नियम सुनिश्चित किया गया है कि दिव्यांगजनों को मिलने वाला यह लाभ अन्य सामान्य सामाजिक वर्गों की तुलना में कम से कम 25 फीसदी अधिक बना रहे। पूरे देश में सहायता का स्तर एक समान रखने के उद्देश्य से इस समूची योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार स्वयं वहन करेगी। कल्याणकारी योजनाओं का पुनर्गठन और नामकरण मंत्रिमंडल की इस औपचारिक मंजूरी के साथ ही संपूर्ण राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को नया नाम देते हुए प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बना दिया गया है। इसी तर्ज पर इसकी विभिन्न उप-योजनाओं के नाम भी संशोधित किए गए हैं। पहले से चली आ रही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नया नाम अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना रहेगा। इसके अलावा, बुजुर्गों के लिए संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के नाम से जानी जाएगी। एकल महिलाओं के लिए बनी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना कर दिया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को भी नया स्वरूप देते हुए प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के रूप में अधिसूचित किया गया है। लागू करने की तय समय-सीमा पात्रता की नई शर्तें तय करने, अतिरिक्त लाभार्थियों को सूची में शामिल करने तथा संशोधित राशियों के सुचारू आवंटन को लेकर विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश अगले तीन महीने की समय-सीमा के भीतर जारी किए जाएंगे। इस कदम से बचपन से ही गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को तत्काल राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसका आप पर असर दिव्यांगता पेंशन के नए नियमों से देश के लाखों परिवारों को बिना किसी उम्र संबंधी रुकावट के सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। • भारत में: 40 फीसदी दिव्यांगता वाले नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी पात्र नागरिक अब आजीवन नियमित सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे देश भर के जरूरतमंद परिवारों पर मेडिकल और देखभाल से जुड़े खर्चों का बोझ कम होगा। • सीधे वित्तीय लाभ: 0 से 79 वर्ष के पात्र दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 375 रुपये तथा 80 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को प्रतिमाह 625 रुपये दिए जाएंगे। यह राशि अन्य सामाजिक श्रेणियों की तुलना में 25 फीसदी अधिक सुनिश्चित की गई है। • आवेदन प्रक्रिया: आगामी तीन महीनों के भीतर केंद्र सरकार योजना के नए दिशा-निर्देश और पंजीकरण की विस्तृत रूपरेखा अधिसूचित करेगी। पात्र परिवार अपने नजदीकी प्रशासनिक केंद्रों के माध्यम से आवश्यक प्रमाण पत्र तैयार रख सकते हैं। • पूर्ण केंद्रीय वित्तपोषण: पूरी योजना का खर्च शत-प्रतिशत केंद्र सरकार उठाएगी, जिससे सभी राज्यों के नागरिकों को समान दर पर समय पर भुगतान मिलेगा। राज्य स्तर पर बजट की कमी के चलते लाभार्थियों के भुगतान में रुकावट नहीं आएगी। ऐसा क्यों हुआ दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक करने और गंभीर रूप से जरूरतमंदों को त्वरित मदद देने के लिए यह कदम उठाया गया है। • कानूनी सामंजस्य: पूर्ववर्ती नियमों में 80 फीसदी दिव्यांगता की कड़ी शर्त थी, जबकि 2016 के अधिनियम में 40 फीसदी को बेंचमार्क माना गया है। कैबिनेट ने नियमों को केंद्रीय कानून के अनुरूप ढालने के लिए पात्रता सीमा घटाई है। • आयु सीमा का अवरोध हटाना: पहले न्यूनतम आयु तय होने के कारण छोटे बच्चों और नवजातों को प्रारंभिक जीवन में सरकारी सहायता नहीं मिल पाती थी। सरकार ने इस अंतर को खत्म करते हुए जन्म से ही सुरक्षा कवच देने का फैसला किया। • दीर्घकालिक बजट सुरक्षा: योजना की निरंतरता बनाए रखने के लिए 2026-27 से 2030-31 तक 53,428 करोड़ रुपये का आवंटन तय किया गया। इससे अगले पांच सालों तक फंड की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता समाप्त हो गई है। • एकीकृत पहचान: विभिन्न योजनाओं का नाम बदलकर प्रधानमंत्री ब्रांडिंग के तहत लाया गया है ताकि सहायता कार्यक्रमों में एकरूपता और पारदर्शिता रहे। इसके तहत उप-योजनाओं के नाम भी संशोधित कर दिए गए हैं। सवाल-जवाब 1. दिव्यांग पेंशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा क्या तय की गई है? अब पेंशन के लिए कोई न्यूनतम आयु सीमा नहीं है, पात्र दिव्यांगजन जन्म से ही इसके लिए योग्य होंगे। 2. पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा कितनी रखी गई है? बेंचमार्क दिव्यांगता की पात्रता सीमा को 80 फीसदी से घटाकर 40 फीसदी कर दिया गया है। 3. लाभार्थियों को हर महीने कितनी पेंशन राशि मिलेगी? 0 से 79 वर्ष के दिव्यांगजनों को 375 रुपये और 80 वर्ष या अधिक आयु वालों को प्रतिमाह 625 रुपये मिलेंगे। 4. इस योजना के लिए कितना बजट मंजूर किया गया है? केंद्रीय कैबिनेट ने 2026-27 से 2030-31 तक के पांच वर्षों के लिए 53,428 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 5. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नया नाम क्या है? इस योजना का नाम बदलकर अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया गया है। 6. नए दिशानिर्देश कब तक लागू किए जाएंगे? पात्रता और वितरण से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर पूरी तरह लागू किए जाएंगे। https://trendkia.com/business/divyanga-penshana-men-bara-sudhara-40-phisadi-divyangata-para-janma-se-hi-arthika-sahayata-ka-rasta-sapha-47406 TrendKia — Har trend, sabse pehle.