# दो कमरों से शुरू करें बिस्किट बनाने का काम, दो लाख के निवेश में ऐसे तैयार होगा प्लांट

> दो लाख रुपये के शुरुआती बजट में बिस्किट निर्माण यूनिट लगाकर अच्छी कमाई की जा सकती है। जानिए आवश्यक मशीनें, कच्चा माल और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/do-kamaron-se-shuru-karen-biskita-banane-ka-kama-do-lakha-ke-nivesha-men-aise-taiyara-hoga-plant-41174 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिस्किट बिजनेस, फूड प्रोसेसिंग, उद्यम रजिस्ट्रेशन, धीरज कुमार मौर्य, एफपीओ, मीरजापुर, स्मॉल बिजनेस आइडिया

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपना उद्यम शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए बेकरी उत्पाद एक बेहतरीन विकल्प साबित हो रहे हैं। अगर आपके पास दो लाख रुपये की पूंजी मौजूद है और किसी ठोस व्यावसायिक विचार की तलाश में हैं, तो बिस्किट निर्माण इकाई स्थापित करना एक व्यावहारिक कदम हो सकता है। इस काम को घर के परिसर या महज दो कमरों की जगह से भी आसानी से चालू किया जा सकता है। शुरुआती स्तर पर थोड़ी पूंजी लगाकर काम शुरू करने के बाद न केवल अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है, बल्कि आगे चलकर अन्य लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

## मशीनों का चुनाव और आवश्यक बजट
इस कारोबार को शुरू करने के लिए मुख्य रूप से दो मशीनों की जरूरत पड़ती है। इनमें पहली मशीन कच्चा माल और आटा गूंथने के काम आती है, जबकि दूसरी मशीन बिस्किट को पकाने यानी रोस्ट करने का कार्य करती है। मीरजापुर जिले में किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ के जरिए बिस्किट प्लांट संचालित करने वाले धीरज कुमार मौर्य के अनुसार, कच्चा माल गूंथने वाली मशीन की कीमत लगभग 20 हजार रुपये होती है। वहीं बिस्किट को बेक करने वाली रोस्टिंग मशीन करीब एक लाख 70 हजार रुपये में मिलती है।

इन दोनों जरूरी उपकरणों को खरीदने में कुल मिलाकर लगभग दो लाख रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा यूनिट की शुरुआती फिटिंग और सेटअप पर करीब पांच से 10 हजार रुपये अतिरिक्त व्यय हो सकते हैं। ये दोनों मशीनें मुंबई के साथ-साथ नोएडा के बाजारों में भी आसानी से मिल जाती हैं। इच्छुक उद्यमी इंटरनेट सर्च इंजन गूगल अथवा अन्य कारोबारी संपर्कों का इस्तेमाल कर निर्माताओं से सीधे बातचीत कर मशीनें मंगवा सकते हैं।

## कच्चा माल और तैयार करने की पूरी विधि
बिस्किट की गुणवत्ता सीधे तौर पर इस्तेमाल होने वाले आटे पर निर्भर करती है। पारंपरिक रेसिपी के लिए मैदा का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प तैयार करने के लिए मोटे अनाज जैसे ज्वार, मक्का, बाजरा और जौ का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय बाजार से साबुत अनाज खरीदकर उसे अच्छी तरह पिसवाना होता है।

उत्पादन प्रक्रिया के पहले चरण में आटा गूंथने वाली मशीन में सभी जरूरी सामग्रियां डालकर बिस्किट का मिश्रण तैयार किया जाता है। मिश्रण तैयार हो जाने के बाद उसे मनचाहा आकार यानी शेप दिया जाता है। इसके बाद इन कटे हुए टुकड़ों को रोस्टिंग मशीन में डालकर अच्छी तरह बेक किया जाता है। बेकिंग पूरी होते ही बिस्किट पूरी तरह तैयार हो जाते हैं, जिन्हें सीधे बाजार में बिक्री के लिए भेजा जा सकता है।

## जरूरी कागजात, लाइसेंस और ऑनलाइन बिक्री
बिस्किट निर्माण का काम शुरू करने से पहले वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करना अनिवार्य होता है। सबसे पहले अपने व्यवसाय का उद्यम रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए। इसके साथ ही वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी पंजीकरण और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक फूड लाइसेंस लेना जरूरी होता है। यदि कोई उद्यमी किसी स्वयं सहायता समूह अथवा एफपीओ के माध्यम से यह यूनिट लगा रहा है, तो केवल फूड लाइसेंस लेकर भी उत्पादन का काम शुरू किया जा सकता है।

शुरुआती दौर में बिस्किट की पैकेजिंग घर पर ही आसानी से की जा सकती है। धीरज कुमार मौर्य ने स्वयं मात्र दो लाख रुपये की लागत से इस काम की नींव रखी थी। वर्तमान में उनकी यूनिट का दायरा बढ़कर लगभग एक करोड़ रुपये के प्लांट तक पहुंच चुका है और उनके उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत संपर्क से बिक्री बढ़ाई गई, लेकिन मौजूदा दौर में डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने उत्पाद बेचना बेहद सुगम बना दिया है। नए उद्यमियों को भी पैकेजिंग के बाद ऑनलाइन माध्यमों के जरिए अपने उत्पादों की मार्केटिंग करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी सीमित पूंजी में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वतंत्र व्यवसाय शुरू करने वाले ग्रामीण और शहरी उद्यमियों के लिए सीधी राह दिखाती है।

- **भारत में:** कम लागत में विनिर्माण इकाई शुरू करने के इच्छुक उद्यमी दो लाख रुपये में मशीनें खरीदकर अपना काम चालू कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने और मोटे अनाज के पौष्टिक उत्पादों को सीधे बाजार में पहुंचाने में मदद मिलती है।
- **मीरजापुर में:** स्थानीय एफपीओ मॉडल और धीरज कुमार मौर्य के अनुभव से प्रेरित होकर जिले के युवा छोटे स्तर पर बेकरी उद्यम स्थापित कर सकते हैं। क्षेत्रीय स्तर पर अनाज की उपलब्धता का लाभ उठाकर कम लागत में अपना ब्रांड खड़ा किया जा सकता है।
- **पूंजीगत योजना:** मशीनरी पर करीब दो लाख रुपये और अतिरिक्त सेटअप पर पांच से 10 हजार रुपये की स्पष्ट लागत संरचना से वित्तीय योजना बनाना आसान हो जाता है। इससे नए कारोबारी बिना किसी वित्तीय अनिश्चितता के अपना शुरुआती बजट तय कर सकते हैं।
- **वैधानिक नियम:** उद्योग शुरू करने से पहले उद्यम रजिस्ट्रेशन, जीएसटी और फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी कानूनी रुकावट का सामना न करना पड़े। एफपीओ या समूह से जुड़े लोग सिर्फ फूड लाइसेंस लेकर भी उत्पादन प्रारंभ कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
खाद्य उत्पादों की दैनिक मांग और मोटे अनाज के बढ़ते उपयोग ने छोटे स्तर पर बिस्किट उत्पादन को एक व्यावहारिक और लाभदायक अवसर बना दिया है।

- **सीमित लागत में मशीनरी की उपलब्धता:** मुंबई और नोएडा जैसे औद्योगिक बाजारों में आटा गूंथने और रोस्टिंग की कॉम्पैक्ट मशीनें दो लाख रुपये के बजट में आसानी से मिल जाती हैं। इससे छोटे उद्यमियों को बड़े औद्योगिक संयंत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
- **मोटे अनाज की बढ़ती बाजार मांग:** ज्वार, बाजरा, मक्का और जौ जैसे पौष्टिक अनाजों से बने बिस्किट की मांग तेजी से बढ़ी है। किसान और छोटे व्यापारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज को पीसकर सीधे मूल्य संवर्धन कर सकते हैं।
- **डिजिटल वितरण का विस्तार:** इंटरनेट और ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की पहुंच बढ़ने से छोटे कस्बों में बने उत्पादों को भी राष्ट्रीय स्तर पर बेचना संभव हो गया है। इसके चलते पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर निर्भरता काफी घट गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. बिस्किट प्लांट शुरू करने के लिए कम से कम कितनी जगह की आवश्यकता होती है?
इस यूनिट को घर के खाली परिसर या महज दो कमरों की जगह से आसानी से शुरू किया जा सकता है।

### 2. मशीनों को खरीदने में कुल कितना खर्च आता है?
आटा गूंथने वाली मशीन करीब 20 हजार और रोस्टिंग मशीन लगभग एक लाख 70 हजार रुपये की आती है, जिससे कुल खर्च करीब दो लाख रुपये होता है।

### 3. यूनिट लगाने के लिए सेटअप पर कितना अतिरिक्त खर्च हो सकता है?
मशीनों के अलावा शुरुआती सेटअप और फिटिंग पर लगभग पांच से 10 हजार रुपये का खर्च आता है।

### 4. ये मशीनें कहां से खरीदी जा सकती हैं?
ये मशीनें मुंबई और नोएडा के बाजारों में उपलब्ध हैं, जिन्हें गूगल या कारोबारी संपर्कों के जरिए सीधे मंगाया जा सकता है।

### 5. बिस्किट बनाने के लिए किन अनाजों का इस्तेमाल किया जा सकता है?
पारंपरिक मैदे के अलावा ज्वार, मक्का, बाजरा और जौ जैसे मोटे अनाजों को पिसवाकर पौष्टिक बिस्किट बनाए जा सकते हैं।

### 6. इस व्यवसाय के लिए कौन से कानूनी दस्तावेज और लाइसेंस जरूरी हैं?
उद्यम रजिस्ट्रेशन, जीएसटी नंबर और खाद्य विभाग से फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। एफपीओ या समूह से जुड़े होने पर सिर्फ फूड लाइसेंस की आवश्यकता होती है।

### 7. धीरज कुमार मौर्य का प्लांट वर्तमान में कितने मूल्य का है?
दो लाख रुपये से शुरुआत करने के बाद उनका प्लांट अब लगभग एक करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुका है।

## प्रेरणा और सबक
मीरजापुर के धीरज कुमार मौर्य की सफलता दर्शाती है कि सीमित संसाधनों और छोटी जगह से भी एक बड़ा औद्योगिक ढांचा तैयार किया जा सकता है।

- **सीमित पूंजी से ठोस शुरुआत:** धीरज कुमार मौर्य ने केवल दो लाख रुपये के शुरुआती निवेश से काम शुरू किया और उसे एक करोड़ रुपये के प्लांट में बदल दिया। इससे सीख मिलती है कि व्यवसाय का पैमाना पूंजी से ज्यादा अनुशासन और निरंतरता पर निर्भर करता है।
- **मूल्य संवर्धन की ताकत:** साधारण कच्चे माल या मोटे अनाज को बिस्किट जैसे तैयार उत्पाद में बदलकर मुनाफा कई गुना बढ़ाया जा सकता है। कृषि उपज का प्रसंस्करण किसानों और ग्रामीण युवाओं की आमदनी बढ़ाने का मजबूत साधन है।
- **आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ाव:** पारंपरिक मार्केटिंग के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अपनाने से कारोबार तेजी से बड़ा बनता है। समय के साथ डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर किसी भी छोटे उत्पाद को व्यापक पहचान दिलाई जा सकती है।

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