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  "title": "डॉलर से दूरी बना रहे दुनिया के केंद्रीय बैंक, नए सर्वे में सामने आया बड़ा रुझान",
  "summary": "10 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति संभालने वाले 90 संस्थानों के एक सर्वे में पता चला है कि केंद्रीय बैंक पहले से ज़्यादा तेज़ी से अमेरिकी डॉलर से हटकर यूरो, युआन और सोने जैसी दूसरी संपत्तियों की ओर जा रहे हैं।",
  "content": "दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब पहले से कहीं ज़्यादा संख्या में अमेरिकी डॉलर से किनारा करने लगे हैं, और इससे 'डी-डॉलराइज़ेशन' यानी डॉलर पर घटती निर्भरता की चर्चा एक बार फिर तेज़ हो गई है। आधिकारिक मौद्रिक एवं वित्तीय संस्थान मंच (OMFIF) की एक ताज़ा रिपोर्ट में यह तस्वीर साफ़ हुई है। इस रिपोर्ट के लिए 90 केंद्रीय बैंकों, सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड से बात की गई, जो मिलकर करीब 10 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति संभालते हैं। सर्वे में शुद्ध रूप से डॉलर से पैसा हटने का रुझान दिखा। ये बैंक अब यूरो, युआन, ब्रिटिश पाउंड, नॉर्वेजियन क्रोना और न्यूज़ीलैंड डॉलर की तरफ़ ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।\n\nआख़िर डॉलर से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं केंद्रीय बैंक?\nरिपोर्ट के मुताबिक 82 फ़ीसदी केंद्रीय बैंकों के पास पहले से सोना मौजूद है, और इनमें से 30 फ़ीसदी अपने सोने के भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इसकी बड़ी वजह भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में अपने निवेश को बिखेरना यानी पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन बताया गया है। इसके अलावा बैंकों ने अमेरिकी नीतियों की अनिश्चितता, संभावित प्रतिबंधों और डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने को भी अपने इस फ़ैसले के पीछे की वजह बताया है।\n\nचिंता की एक और बड़ी वजह अमेरिका का लगातार बढ़ता कर्ज़ है, जो अब 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच रहा है। अमेरिका के भारी-भरकम घाटे और उधारी का यह पैमाना डॉलर की एक रिज़र्व संपत्ति के तौर पर लंबे समय की स्थिरता पर सवाल खड़े कर सकता है।\n\nब्लैकरॉक ने भी दी चेतावनी\nदुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक ने भी ऐसी ही राय दोहराई है। शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक ने कहा कि हो सकता है कि आगे चलकर अमेरिकी डॉलर दुनिया की सबसे दबदबे वाली मुद्रा न रहे। फिंक ने ख़ासतौर पर अमेरिकी कर्ज़ को इसकी एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने यह भी कहा कि बिटकॉइन (BTC) जैसी डिजिटल मुद्राएं आने वाले समय में दुनिया की अगली रिज़र्व करेंसी बन सकती हैं।\n\nपुरानी है डॉलर से दूरी की यह मुहिम\nडॉलर से किनारा करने का यह चलन कोई नई बात नहीं है। ज़्यादा से ज़्यादा देश अब अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी दबदबे पर भरोसा खोते जा रहे हैं। प्रतिबंधों और डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की वजह से कई देश इस मुद्रा में निवेश करने से कतराने लगे हैं। चीन, ईरान, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे देश तो पहले ही युआन और क्रिप्टोकरेंसी के सहारे डॉलर से बाहर का एक अलग सिस्टम खड़ा कर चुके हैं। अब ऐसा लग रहा है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी धीरे-धीरे डॉलर से आगे बढ़ रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• निवेशकों के लिए: केंद्रीय बैंकों का डॉलर से हटना लंबे समय में डॉलर को कमज़ोर और सोने की मांग को मज़बूत कर सकता है, इसलिए सोने और दूसरी मुद्राओं वाले पोर्टफोलियो पर असर पड़ सकता है।\n• आम पाठक के लिए: डॉलर पर घटता भरोसा वैश्विक मुद्रा बाज़ार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है, जिसका असर आयात-निर्यात और तेल जैसी चीज़ों की कीमतों पर पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. OMFIF के सर्वे में कितने संस्थानों को शामिल किया गया?\nइस सर्वे में 90 केंद्रीय बैंक, सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड शामिल थे, जो मिलकर करीब 10 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति संभालते हैं।\n\n2. केंद्रीय बैंक अब किन मुद्राओं की ओर जा रहे हैं?\nरिपोर्ट के मुताबिक बैंक यूरो, युआन, ब्रिटिश पाउंड, नॉर्वेजियन क्रोना और न्यूज़ीलैंड डॉलर की ओर ज़्यादा रुझान दिखा रहे हैं।\n\n3. कितने केंद्रीय बैंकों के पास सोना है और कितने इसे बढ़ाना चाहते हैं?\n82 फ़ीसदी केंद्रीय बैंकों के पास पहले से सोना है, और इनमें से 30 फ़ीसदी अपने सोने के भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।\n\n4. अमेरिका का कर्ज़ इस मामले में क्यों अहम है?\nअमेरिका का कर्ज़ 40 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रहा है, और इतना बड़ा घाटा व उधारी डॉलर की रिज़र्व संपत्ति के तौर पर स्थिरता पर सवाल खड़े करते हैं।\n\n5. लैरी फिंक ने डॉलर को लेकर क्या कहा?\nब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक ने कहा कि डॉलर शायद दुनिया की सबसे दबदबे वाली मुद्रा न रहे, और बिटकॉइन जैसी डिजिटल मुद्राएं अगली रिज़र्व करेंसी बन सकती हैं।\n\n6. किन देशों ने पहले से डॉलर से बाहर सिस्टम बना लिया है?\nचीन, ईरान, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे देश युआन और क्रिप्टोकरेंसी के सहारे डॉलर से बाहर का सिस्टम पहले ही खड़ा कर चुके हैं।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-01",
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