# दूसरी तिमाही में एसबीआई का शुद्ध लाभ 14 प्रतिशत चढ़कर ₹23,038 करोड़ पर पहुंचा

> चालू वित्त वर्ष की जुलाई से सितंबर तिमाही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय और ब्याज आमदनी में सुधार के साथ ही बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/dusari-timahi-men-sbi-ka-shuddha-labha-14-pratishata-charhakara-23-038-karora-para-pahuncha-55671 · **Language:** Hindi
**Tags:** एसबीआई, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, तिमाही नतीजे, शुद्ध लाभ, एनपीए, बैंकिंग सेक्टर

सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान वित्तीय मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन दर्ज कराया है। जुलाई से सितंबर 2026 की इस अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने 20,160 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया था। बैंक की कुल आय और मुख्य ब्याज कारोबार से होने वाली आमदनी दोनों में ही ठोस प्रगति देखने को मिली है।

## कुल राजस्व और ब्याज आय में ठोस उछाल
शेयर बाजार को भेजी गई नियामक सूचना के अनुसार, सितंबर 2026 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही में बैंक की कुल आय बढ़कर 1,43,796 करोड़ रुपये रही। एक वर्ष पूर्व समान अवधि में यह आंकड़ा 1,34,979 करोड़ रुपये था। बैंक की मूल ब्याज आधारित कमाई में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान ब्याज से होने वाली आमदनी 1,32,019 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में दर्ज 1,19,654 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। यह वृद्धि स्पष्ट करती है कि बैंक को अपने ऋण वितरण और अन्य ब्याज आधारित वित्तीय गतिविधियों से मजबूत प्रतिफल प्राप्त हुआ है।

## परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार और घटता एनपीए
बैंक के बहीखाते की सेहत के लिहाज से सबसे अहम बात यह रही कि इसके फंसे हुए कर्ज यानी गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। 30 सितंबर 2026 तक बैंक का सकल एनपीए उसके कुल अग्रिम के अनुपात में घटकर 1.39 प्रतिशत रह गया। एक साल पहले सितंबर तिमाही के अंत में यह अनुपात 1.73 प्रतिशत पर था। इसी प्रकार शुद्ध एनपीए भी कम होकर 0.36 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछले वर्ष समान समय में 0.42 प्रतिशत था। इस गिरावट से स्पष्ट संकेत मिलता है कि बैंक के बट्टे खाते या जोखिम भरे कर्ज के अनुपात में लगातार कमी आ रही है और ऋण वसूली मजबूत बनी हुई है।

## फंसे कर्जों के लिए प्रावधान में भारी कटौती
परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर होने का सीधा सकारात्मक असर बैंक की प्रावधान लागत पर दिखाई दिया है। समीक्षाधीन दूसरी तिमाही में एसबीआई ने खराब कर्जों से निपटने के लिए 2,759 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। बीते वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक को इसके लिए 4,132 करोड़ रुपये की राशि अलग रखनी पड़ी थी। फंसे कर्ज के जोखिम में आई इस कमी के कारण बैंक को सुरक्षा कोष के रूप में पहले से काफी कम पूंजी रोकनी पड़ी, जिससे बैंक के समग्र शुद्ध लाभ को सीधा सहारा मिला।

## कंसोलिडेटेड स्तर पर समूह का मुनाफा 20 फीसदी बढ़ा
पूरे एसबीआई समूह के समेकित वित्तीय प्रदर्शन को देखें तो कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ में 20 प्रतिशत की जोरदार छलांग देखने को मिली है। समूह का शुद्ध लाभ बढ़कर 25,361 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि बीते वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 21,137 करोड़ रुपये रहा था। इस दौरान एसबीआई समूह की समेकित कुल आय भी पिछले साल के 1,75,898 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,87,756 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई।

## इसका आप पर असर
एसबीआई के इन मजबूत वित्तीय नतीजों से बैंक के शेयरधारकों और सामान्य ग्राहकों के लिए वित्तीय स्थिरता का भरोसा बढ़ता है।

- **शेयरधारकों के लिए:** मजबूत लाभ और घटते एनपीए से बैंक के शेयर में निवेशकों का विश्वास मजबूत बना रहेगा। इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और भविष्य में आकर्षक डिविडेंड की उम्मीद बंधती है।
- **ऋणग्राहियों के लिए:** खराब कर्जों में आई गिरावट बैंक की बैलेंस शीट को बहुत मजबूत स्थिति में लाती है। पूंजी की बेहतर स्थिति के कारण बैंक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर नए खुदरा और कॉर्पोरेट ऋण जारी करने में सक्षम रहेगा।
- **जमाकर्ताओं के लिए:** देश के सबसे बड़े बैंक की बढ़ती वित्तीय मजबूती आम खाताधारकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को रेखांकित करती है। इससे बचतकर्ताओं का बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा और गहरा होता है।
- **अर्थव्यवस्था के लिए:** सार्वजनिक क्षेत्र के शीर्ष बैंक की क्रेडिट स्थिति सुधरने से देश भर में उद्योग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तीय प्रवाह सुचारू बना रहेगा। यह समग्र आर्थिक विकास को गति देने में मददगार साबित होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
एसबीआई के शुद्ध मुनाफे और समग्र आय में यह उछाल मुख्यतः मजबूत ब्याज आमदनी और फंसे कर्जों में भारी कमी के कारण संभव हुआ है।

- **ब्याज आय में ठोस बढ़ोतरी:** समीक्षाधीन तिमाही में बैंक की ब्याज से आमदनी बढ़कर 1,32,019 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल 1,19,654 करोड़ रुपये थी। ऋण वितरण में निरंतर विस्तार ने बैंक की मूल आय को गति प्रदान की।
- **परिसंपत्ति गुणवत्ता में मजबूती:** बैंक का सकल एनपीए 1.73 प्रतिशत से गिरकर 1.39 प्रतिशत और नेट एनपीए 0.42 प्रतिशत से कम होकर 0.36 प्रतिशत पर आ गया। फंसे हुए कर्ज घटने से बैंक का बहीखाता अधिक पारदर्शी और मजबूत बना।
- **प्रावधानों में बड़ी कटौती:** बेहतर ऋण वसूली और कम जोखिम के चलते बैंक को बैड लोन के लिए केवल 2,759 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा, जबकि पिछले साल यह 4,132 करोड़ रुपये था। प्रावधान में आई इस बचत ने सीधे तौर पर मुनाफे को 23,038 करोड़ रुपये तक पहुंचाने में मदद की।

## सवाल-जवाब

### 1. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में एसबीआई का शुद्ध लाभ कितना रहा?
जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही में एसबीआई का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये रहा।

### 2. समीक्षाधीन तिमाही में बैंक की कुल आय कितनी दर्ज की गई?
इस तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय 1,43,796 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1,34,979 करोड़ रुपये थी।

### 3. बैंक के एनपीए स्तर में क्या बदलाव देखने को मिला?
30 सितंबर 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए घटकर 1.39 प्रतिशत और नेट एनपीए घटकर 0.36 प्रतिशत पर आ गया।

### 4. एसबीआई ने बैड लोन के लिए कितना प्रावधान किया?
बैंक ने दूसरी तिमाही में बैड लोन के लिए 2,759 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जो पिछले साल के 4,132 करोड़ रुपये से काफी कम है।

### 5. कंसोलिडेटेड आधार पर एसबीआई समूह का मुनाफा कितना रहा?
कंसोलिडेटेड आधार पर एसबीआई समूह का शुद्ध लाभ 20 प्रतिशत बढ़कर 25,361 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

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