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  "type": "article",
  "title": "ई-कॉमर्स डिलीवरी पर एक समान 5 फीसदी जीएसटी तय, कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा",
  "summary": "जीएसटी परिषद ने ई-कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं पर भ्रम दूर करते हुए 5 फीसदी की एक समान टैक्स दर लागू कर दी है। हालांकि इन सेवाओं पर कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा नहीं मिलेगी।",
  "content": "ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए सामान मंगाने पर होने वाली डिलीवरी सेवाओं को लेकर टैक्स की उलझन अब सुलझ गई है। नई दिल्ली में 8 अक्टूबर को आयोजित अपनी 57वीं बैठक के दौरान जीएसटी परिषद ने स्पष्ट किया है कि पार्सल चाहे किसी भी माध्यम से पहुंचाया जाए, उस पर केवल 5 फीसदी की दर से ही जीएसटी वसूला जाएगा। इससे पहले ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच टैक्स दरों को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई थी। बाजार में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति थी कि इलेक्ट्रिक वाहनों से डिलीवरी कराने पर कम सर्विस टैक्स देना होता है, जबकि पेट्रोल या डीजल से चलने वाली गाड़ियों से डिलीवरी करने पर ऊंची दर से टैक्स लगता है। परिषद के इस नए फैसले ने वाहन के ईंधन प्रकार से जुड़े अंतर को खत्म कर सभी माध्यमों के लिए एक दर तय कर दी है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी रखी गई है कि कंपनियों को इस 5 फीसदी टैक्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा।\n\nकूरियर सेवाओं से अलग नियमों के तहत होगा वर्गीकरण\nकाउंसिल ने इस नई व्यवस्था के दायरे को भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। यह 5 फीसदी की दर केवल उन्हीं विशिष्ट डिलीवरी सेवाओं पर प्रभावी होगी जो पारंपरिक कूरियर और डाक यानी पोस्टल सेवाओं की श्रेणी से बाहर आती हैं। इसके अतिरिक्त, यह प्रावधान उन सेवाओं को कवर करता है जो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए दी जाती हैं और केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 9(5) के दायरे में आती हैं। इस स्पष्ट वर्गीकरण से कंपनियों को अपनी डिलीवरी लॉजिस्टिक्स के लिए टैक्स गणना करने में आसानी होगी।\n\nडिलीवरी कर्मियों को पंजीकरण और टैक्स देनदारी से छूट\nइस फैसले का एक अहम पहलू जमीनी स्तर पर सेवाएं देने वाले डिलीवरी कर्मियों से जुड़ा हुआ है। काउंसिल के निर्देशानुसार, वास्तविक रूप से डिलीवरी पहुंचाने वाला व्यक्ति केंद्रीय जीएसटी यानी सीजीएसटी एक्ट की धारा 22(1) के तहत अनिवार्य जीएसटी पंजीकरण कराने के लिए बाध्य नहीं होगा। इसका सीधा व्यावहारिक अर्थ यह है कि सामान घर-घर पहुंचाने वाले डिलीवरी कर्मियों पर इस सेवा के तहत सीधे तौर पर जीएसटी चुकाने की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी, जिससे स्वतंत्र या अनुबंधित कर्मियों पर अनुपालन का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।\n\nइसका आप पर असर\nई-कॉमर्स डिलीवरी पर टैक्स दर तय होने से कंपनियों के बिलिंग ढांचे और परिचालन लागत में स्पष्टता आएगी।\n\n• उपभोक्ताओं पर असर: ऑनलाइन ऑर्डर्स पर डिलीवरी शुल्क में टैक्स दर अब 5 फीसदी पर स्थिर रहेगी। हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट न मिलने से कंपनियां डिलीवरी लागत में संभावित बदलाव कर सकती हैं।\n• डिलीवरी कर्मियों के लिए: सामान पहुंचाने वाले कर्मियों को अलग से जीएसटी पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। इससे उन पर कागजी कार्रवाई और टैक्स अनुपालन का सीधा बोझ नहीं पड़ेगा।\n• लॉजिस्टिक्स संचालन: इलेक्ट्रिक वाहन या पेट्रोल-डीजल गाड़ी दोनों पर टैक्स की दर एक समान 5 फीसदी रहेगी। कंपनियों को अब वाहन के ईंधन प्रकार के आधार पर अलग-अलग टैक्स गणना नहीं करनी होगी।\n• कूरियर सेवाओं से अंतर: यह नियम केवल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म आधारित डिलीवरी पर लागू होगा। साधारण डाक या पारंपरिक कूरियर सेवाओं के नियम इससे प्रभावित नहीं होंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nडिलीवरी वाहनों के प्रकार के आधार पर लगने वाले टैक्स को लेकर ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच लंबे समय से भ्रम बना हुआ था। इसी भ्रम को खत्म करने के लिए परिषद को नियमों में स्पष्टता लानी पड़ी।\n\n• वाहन प्रकार को लेकर भ्रम: कंपनियों को लगता था कि इलेक्ट्रिक वाहनों से डिलीवरी पर कम और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर ज्यादा टैक्स लगता है। इस अस्पष्टता को खत्म करने के लिए सभी मोड्स पर समान 5 फीसदी दर लागू की गई।\n• क्रेडिट नियमों में बदलाव: सरकार ने दर को 5 फीसदी पर सीमित रखने के साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा बंद करने का फैसला लिया। इससे प्रक्रिया को सरल बनाते हुए टैक्स छूट के दावों को सीमित किया गया।\n• धारा 9(5) के तहत स्पष्टता: कूरियर और डाक सेवाओं से इसे अलग रखते हुए ई-कॉमर्स आधारित डिलीवरी को विशेष दायरे में परिभाषित किया गया। इससे अंतिम छोर के डिलीवरी कर्मियों को पंजीकरण बाध्यता से बाहर रखा जा सका।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ई-कॉमर्स डिलीवरी पर अब कितना जीएसटी लगेगा?\nई-कॉमर्स के जरिए किसी भी मोड से की जाने वाली डिलीवरी पर अब 5 फीसदी जीएसटी लगेगा।\n\n2. क्या इलेक्ट्रिक और पेट्रोल-डीजल वाहनों से डिलीवरी पर अलग-अलग टैक्स लगेगा?\nनहीं, डिलीवरी किसी भी मोड या वाहन से की जाए, सभी पर एक समान 5 फीसदी जीएसटी लगेगा।\n\n3. क्या कंपनियों को इस 5 फीसदी टैक्स पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा?\nनहीं, कंपनियों को इस सेवा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं दिया जाएगा।\n\n4. क्या डिलीवरी पहुंचाने वाले व्यक्ति को जीएसटी पंजीकरण कराना होगा?\nनहीं, डिलीवरी करने वाला व्यक्ति सीजीएसटी एक्ट की धारा 22(1) के तहत जीएसटी पंजीकरण के लिए बाध्य नहीं होगा।\n\n5. यह नियम किन सेवाओं पर लागू होगा?\nयह नियम कूरियर और डाक सेवाओं से अलग, ई-कॉमर्स के जरिए दी जाने वाली और केंद्रीय जीएसटी एक्ट की धारा 9(5) के तहत आने वाली डिलीवरी पर लागू होगा।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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    "जीएसटी परिषद",
    "ई-कॉमर्स",
    "डिलीवरी सर्विस",
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