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  "title": "एआई की रेस में कूदी टाटा की दिग्गज कंपनी, 8900 इंजीनियरों की फौज से ओपनएआई और गूगल को देगी चुनौती",
  "summary": "टीसीएस एक खास टीम खड़ी कर रही है जिसमें करीब 8900 इंजीनियर होंगे, जो ग्राहकों के साथ मिलकर एआई प्रोजेक्ट पर काम करेंगे और ओपनएआई, गूगल जैसी कंपनियों को सीधी टक्कर देंगे।",
  "content": "भारत के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में से एक टाटा ग्रुप की आईटी कंपनी टीसीएस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मैदान में बड़ा दांव लगाने जा रही है। कंपनी इंजीनियरों की एक ऐसी खास टीम तैयार कर रही है, जो सीधे ग्राहकों के दफ्तर में जाकर उनके साथ एआई प्रोजेक्ट पर काम करेगी। इस कदम के साथ टीसीएस अब ओपनएआई, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है। इस टीम में करीब 8900 इंजीनियरों को शामिल किया जाना है।\n\nटीसीएस का साफ मानना है कि एआई आईटी सेक्टर के लिए कोई खतरा नहीं, बल्कि नए कारोबार का बहुत बड़ा दरवाजा है। इसी सोच पर आगे बढ़ते हुए कंपनी तीन मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है, अपने कर्मचारियों की स्किल बढ़ाना, नई तकनीक को अपनाना और जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनियों को खरीदना। कंपनी का तर्क है कि आने वाले दौर में सिर्फ एआई मॉडल बना देना काफी नहीं होगा। असली चुनौती उन मॉडलों को अलग-अलग कंपनियों के सिस्टम में सही ढंग से लागू करने की होगी, और यही काम टीसीएस की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है।\n\nकुल स्टाफ का सिर्फ डेढ़ फीसदी हिस्सा\nटीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने बताया कि कंपनी एक खास टीम खड़ी कर रही है, जिसमें कुल कर्मचारियों का करीब 1 से 1.5 फीसदी हिस्सा होगा। ये इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ बैठेंगे, उनकी असल जरूरत को समझेंगे और उसी हिसाब से एआई समाधान गढ़ेंगे। जून 2026 के आखिर तक टीसीएस में करीब 5.94 लाख कर्मचारी थे। इसी आधार पर देखें तो यह आंकड़ा लगभग 5900 से 8900 इंजीनियरों के बीच बैठता है। हालांकि कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि इसके लिए नई भर्ती की जाएगी या फिर मौजूदा कर्मचारियों को ही ट्रेनिंग देकर इस काम के लायक बनाया जाएगा।\n\nइन इंजीनियरों का काम सिर्फ ग्राहक को एआई टूल थमा देना नहीं होगा। इसके बजाय वे कंपनी के पहले से चल रहे सिस्टम, उसके डेटा और काम करने के तरीके को ध्यान में रखते हुए एआई को इस्तेमाल के लायक बनाएंगे। आज दुनियाभर की कंपनियां तरह-तरह के एआई मॉडल इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में उन्हें एक ऐसे भरोसेमंद पार्टनर की जरूरत है, जो इन तमाम अलग-अलग सिस्टम को आपस में जोड़कर सही तरीके से चला सके।\n\nदिग्गज कंपनियों से आमने-सामने की लड़ाई\nइस फैसले के साथ टीसीएस अब ठीक उसी राह पर चल पड़ी है, जिस पर ओपनएआई, एंथ्रॉपिक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां आगे बढ़ रही हैं। ये सभी कंपनियां भी ऐसे विशेषज्ञ इंजीनियरों को अपने साथ जोड़ रही हैं, जो ग्राहक के यहां जाकर एआई तकनीक को जमीन पर उतारने में मदद करें।\n\nकई सालों तक अपने ही दम पर कारोबार बढ़ाती रही टीसीएस अब जरूरत पड़ने पर दूसरी कंपनियों को खरीदने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। कंपनी खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में ऐसे अधिग्रहण की तलाश में है, जिनसे उसकी तकनीकी ताकत और मजबूत हो सके।\n\nहर साल 8400 करोड़ से ज्यादा का खर्च\nटीसीएस हर साल करीब 1 अरब डॉलर यानी तकरीबन 8400 करोड़ रुपये कर्मचारियों की ट्रेनिंग, नई तकनीक और कंपनी के भीतर एआई को मजबूत बनाने पर खर्च करती है। इस रकम का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों को नई स्किल सिखाने, विशेषज्ञों की भर्ती करने और एआई आधारित तकनीकों को अपनाने पर लगाया जा रहा है।\n\nदुनियाभर में यह डर जताया जा रहा है कि आने वाले वक्त में एआई आईटी कंपनियों की जरूरत को घटा सकता है। लेकिन टीसीएस इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं है। कंपनी का कहना है कि एआई मॉडल अपने आप किसी कंपनी में काम नहीं कर सकते। उन्हें लागू करने, पुराने सिस्टम से जोड़ने और डेटा का सही इस्तेमाल करने के लिए तजुर्बेकार आईटी कंपनियों की जरूरत हमेशा बनी रहेगी।\n\nएआई कारोबार की रफ्तार में थोड़ी सुस्ती\nहालांकि कंपनी के एआई कारोबार की रफ्तार पहली तिमाही में कुछ धीमी जरूर पड़ी है। पहली तिमाही में एआई से होने वाली सालाना आय की वृद्धि 13 फीसदी रही, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 28 फीसदी था। इसके बावजूद टीसीएस का दावा है कि लंबी अवधि में उसका लक्ष्य इस कारोबार को हर तिमाही करीब 25 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ाने का है।\n\nइसका आप पर असर\n• आईटी प्रोफेशनल्स के लिए: टीसीएस का यह कदम इशारा करता है कि आने वाले वक्त में एआई को ग्राहकों के सिस्टम में लागू करने वाले इंजीनियरों की मांग तेजी से बढ़ेगी, यानी एआई स्किल सीखना नौकरी के लिए फायदेमंद रहेगा।\n• निवेशकों के लिए: कंपनी हर साल करीब 8400 करोड़ रुपये तकनीक और ट्रेनिंग पर लगा रही है और अधिग्रहण की तैयारी में है, जिससे इसकी लंबी अवधि की ग्रोथ की दिशा का अंदाजा मिलता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. टीसीएस की नई टीम में कितने इंजीनियर होंगे?\nइस खास टीम में करीब 8900 इंजीनियरों को शामिल किए जाने की तैयारी है, जो कुल कर्मचारियों का करीब 1 से 1.5 फीसदी हिस्सा है।\n\n2. यह टीम किन कंपनियों को टक्कर देगी?\nयह टीम ओपनएआई, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एंथ्रॉपिक जैसी दिग्गज कंपनियों को सीधी चुनौती देगी।\n\n3. इस टीम का असल काम क्या होगा?\nये इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ काम करेंगे और कंपनी के मौजूदा सिस्टम, डेटा और कामकाज के तरीके के हिसाब से एआई को इस्तेमाल के लायक बनाएंगे।\n\n4. क्या इसके लिए नई भर्ती होगी?\nकंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि नई भर्ती की जाएगी या मौजूदा कर्मचारियों को ही ट्रेनिंग देकर तैयार किया जाएगा।\n\n5. टीसीएस हर साल तकनीक और ट्रेनिंग पर कितना खर्च करती है?\nकंपनी हर साल करीब 1 अरब डॉलर यानी तकरीबन 8400 करोड़ रुपये इस पर खर्च करती है।\n\n6. टीसीएस के एआई कारोबार की रफ्तार कैसी रही?\nपहली तिमाही में एआई से सालाना आय की वृद्धि 13 फीसदी रही, जो पिछली तिमाही में 28 फीसदी थी, हालांकि लंबी अवधि में कंपनी हर तिमाही करीब 25 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखती है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-12",
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