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  "title": "एक महिला के संकल्प से खड़ी हुई बलरामपुर चीनी मिल, आज 14000 करोड़ के कारोबार पर पहुंचा साम्राज्य",
  "summary": "बेल्जियम से 300 पहियों पर भारी-भरकम वेसेल्स आने के बाद सुर्खियों में आई बलरामपुर चीनी मिल कभी एक छोटी सी इकाई थी। इस मुकाम तक पहुंचाने में एक महिला का अहम योगदान रहा है, और आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल बन चुकी है।",
  "content": "इन दिनों देश के मीडिया गलियारों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक एक खास खबर की काफी चर्चा हो रही है। बेल्जियम से 300 पहियों पर लदकर एक भारी-भरकम वेसेल्स भारत पहुंचा है, जिसे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध चीनी मिल के लिए मंगाया गया है। आज से इक्यावन साल पहले यह मिल महज एक छोटी सी यूनिट के रूप में अस्तित्व में आई थी और समय के साथ इसका दायरा इतना फैला कि इसका कारोबार अब लगभग चौदह हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुका है। वर्तमान में बलरामपुर चीनी मिल को देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसके इस शानदार सफर के पीछे एक दूरदर्शी महिला की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है।\n\nशुरुआत से लेकर परिवार की बागडोर तक\nबलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड एक प्रमुख कंपनी है। इस मिल की स्थापना चौदह जुलाई, 1975 को की गई थी। इस व्यावसायिक उपक्रम को स्थापित करने और इसके विस्तार में केएन सारोगी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केएन सारोगी कंपनी के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशक विवेक सारोगी के पिता थे। वर्तमान समय में इस कंपनी की पूरी कमान विवेक सारोगी के हाथों में है, जबकि उनकी पत्नी सुमेधा सारोगी भी कंपनी में अच्छी खासी हिस्सेदारी रखती हैं। इसके अलावा विवेक की बेटी अवंतिका सारोगी इस प्रतिष्ठित कंपनी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। सारोगी परिवार का पारिवारिक ट्रस्ट प्रमोटर के तौर पर इस कंपनी में एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी का मालिक है।\n\nमीनाक्षी सारोगी का ऐतिहासिक योगदान\nबलरामपुर चीनी मिल को फर्श से अर्श तक और सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाने का मुख्य श्रेय विवेक सारोगी की माता मीनाक्षी सारोगी को जाता है। उन्होंने गन्ने की खरीद से लेकर किसानों को समय पर भुगतान करने और उत्पादन से लेकर सप्लाई चेन तक हर गतिविधि पर बेहद कड़ाई से नियंत्रण रखा। उनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में कंपनी का दायरा एक यूनिट से बढ़कर सीधे दस यूनिट्स तक पहुंच गया। आज यह कंपनी केवल चीनी ही नहीं बनाती, बल्कि एथनॉल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी एक बड़ा नाम बन चुकी है। इस मिल ने उत्तर प्रदेश के आसपास के कई जिलों के हजारों किसानों को गन्ने की उन्नत खेती करने के लिए लगातार प्रेरित किया है और उनकी आजीविका का मुख्य आधार बनी है।\n\nशेयरधारिता और प्रमोटर्स की स्थिति\nबलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की ओर से जून, 2026 में शेयर बाजार को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कंपनी में प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी लगभग बयालीस दशमलव छियासी प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस कुल हिस्सेदारी में अकेले सारोगी परिवार के ट्रस्ट का हिस्सा चौबीस दशमलव तिरासी प्रतिशत है। इसके अलावा, विवेक सारोगी की कंपनी में तीन दशमलव अड़सठ प्रतिशत व्यक्तिगत हिस्सेदारी है, जबकि सुमेधा सारोगी के पास दो दशमलव इकतालीस प्रतिशत शेयर हैं। उनकी बेटी अवंतिका सारोगी के पास भी इस उद्यम में एक दशमलव इकतालीस प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है, जिससे पूरे परिवार की संयुक्त पकड़ इस कारोबार पर मजबूत बनी हुई है।\n\nक्षमता विस्तार और विशाल उत्पादन नेटवर्क\nजब इस चीनी मिल की शुरुआत हुई थी, तब इसकी दैनिक पेराई क्षमता केवल अस्सी टन हुआ करती थी, लेकिन आज यह मिल रोजाना अस्सी हजार टन गन्ने की खपत करने की भारी क्षमता रखती है। अपने कारोबार को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सारोगी परिवार ने तुलसीपुर और बभनान की मिलों का भी अधिग्रहण कर लिया था। यह मिल इकाई हर साल लगभग छह हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व पैदा करती है और क्षेत्र के पांच लाख किसानों के लिए कमाई का सबसे बड़ा और प्रमुख जरिया साबित हो रही है। वर्तमान में कंपनी की मिलें बलरामपुर के अतिरिक्त बभनान, तुलसीपुर, हैदरगढ़, अकबरपुर, रौजागांव, मनकापुर, कुंभी, गुलरिया और मैजापुर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं।\n\nवित्तीय प्रदर्शन और कारोबार के आंकड़े\nबलरामपुर चीनी मिल का पिछले वित्तवर्ष में कुल कारोबार छह हजार दो सौ इकत्तर करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। वहीं, इसके ठीक पहले के वित्तवर्ष में कंपनी का कुल कारोबार पांच हजार चार सौ पंद्रह करोड़ रुपये के स्तर पर था। अगर इस कुल कारोबार के स्रोतों पर नजर डालें तो इसमें चीनी के व्यापार की हिस्सेदारी पांच हजार पांच सौ सात करोड़ रुपये रही, जबकि डिस्टलरी सेगमेंट से एक हजार सात सौ इक्कीस करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके अलावा, पीएलए से तेईस दशमलव नौ करोड़ रुपये और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से तेरह दशमलव नौ करोड़ रुपये की आय कंपनी के खाते में आई, जो इसके विविध और मजबूत वित्तीय ढांचे को दर्शाती है।\n\nइसका आप पर असर\nबलरामपुर चीनी मिल के इस ऐतिहासिक विस्तार और वित्तीय वृद्धि का सीधा असर देश के कृषि और चीनी बाजार पर पड़ता है।\n\n• भारत में: यह विस्तार देश के कृषि आधारित उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। इससे देश के ऊर्जा क्षेत्र में एथनॉल उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिलता है।\n• उत्तर प्रदेश में: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर, बभनान और तुलसीपुर समेत कई जिलों के करीब पांच लाख किसानों को समय पर गन्ने का भुगतान और बेहतर बाजार मिलता है। इससे स्थानीय किसानों की आय सुरक्षित होती है और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबलरामपुर चीनी मिल के इस अभूतपूर्व विस्तार के पीछे कुशल प्रबंधन, समय पर रणनीतिक अधिग्रहण और मजबूत नेतृत्व जैसे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं।\n\n• रणनीतिक अधिग्रहण: कंपनी ने अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ाने के लिए समय-समय पर तुलसीपुर और बभनान जैसी अन्य मिलों का अधिग्रहण किया, जिससे उसकी उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा हुआ।\n• नेतृत्व और नियंत्रण: मीनाक्षी सारोगी और बाद में उनके परिवार द्वारा गन्ने की खरीद, उत्पादन और सप्लाई चेन पर कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने से कंपनी लगातार मुनाफे में रही।\n• विविधीकरण: केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय कंपनी ने एथनॉल और बिजली उत्पादन जैसे क्षेत्रों में कदम रखा, जिससे इसके राजस्व स्रोतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बलरामपुर चीनी मिल की स्थापना कब हुई थी?\nइस मिल की शुरुआत 14 जुलाई, 1975 को हुई थी।\n\n2. बलरामपुर चीनी मिल को ऊंचाई तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका किसकी थी?\nइस मिल को ऊंचाई तक ले जाने का सबसे बड़ा श्रेय विवेक सारोगी की माता मीनाक्षी सारोगी को जाता है।\n\n3. कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी कितनी है?\nजून, 2026 के आंकड़ों के मुताबिक प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 42.86 फीसदी है।\n\n4. यह मिल रोजाना कितने गन्ने की खपत करती है?\nआज यह मिल रोजाना 80 हजार टन गन्ने की खपत करने की क्षमता रखती है।\n\n5. यह मिल कितने किसानों के लिए कमाई का जरिया है?\nयह मिल आसपास के करीब 5 लाख किसानों के लिए कमाई का प्रमुख जरिया है।\n\nप्रेरणा और सबक\nबलरामपुर चीनी मिल और सारोगी परिवार की यह व्यावसायिक यात्रा उन उद्यमियों के लिए एक बड़ी सीख है जो शून्य से शिखर तक पहुंचना चाहते हैं।\n\n• दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता: मीनाक्षी सारोगी का कड़ा प्रशासनिक नियंत्रण और गन्ने की खरीद से लेकर सप्लाई तक की हर बारीक बात पर ध्यान देना यह सिखाता है कि सफल संचालन के लिए लीडरशिप का मैदान पर होना जरूरी है।\n• व्यवसाय का विविधीकरण: केवल एक उत्पाद पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी ने एथनॉल और बिजली उत्पादन में कदम रखा, जो सिखाता है कि समय के साथ नए क्षेत्रों में विस्तार करना क्यों आवश्यक है।\n• स्थानीय समुदाय को जोड़ना: पांच लाख किसानों को अपने साथ जोड़कर उन्हें आजीविका देना यह साबित करता है कि किसी बड़े व्यापार की सफलता में उसके सहयोगी वर्ग का मजबूत होना सबसे अहम है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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