# एथनॉल निर्माण पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती, चीनी के बाद अब चावल के उपयोग पर लगाई सीमा

> सरकार ने चीनी के बाद अब चावल से एथनॉल बनाने पर भी कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं, जिससे उत्पादन कंपनियों के सामने मक्के का रुख करने का विकल्प बचा है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/ethanol-nirmana-para-sarakara-ne-barhai-sakhti-sugar-ke-bada-aba-rice-ke-upayoga-para-lagai-sima-56200 · **Language:** Hindi
**Tags:** एथनॉल उत्पादन, भारतीय खाद्य निगम, चावल का उपयोग, चीनी प्रतिबंध, मक्का बाजार, तेल मार्केटिंग कंपनियां

देश में जैव ईंधन को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एथनॉल उत्पादन के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लगातार बढ़ते उत्पादन के बाद अब केंद्र सरकार ने इसके कच्चे माल पर नए सिरे से अंकुश लगाना शुरू कर दिया है। चीनी के जरिए एथनॉल बनाने पर पूर्व में लगे प्रतिबंधों के बाद अब चावल के इस्तेमाल को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में रखे अतिरिक्त स्टॉक से तैयार होने वाले एथनॉल की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है।

## उत्पादन कोटा और टेंडर के नए आंकड़े
नए प्रशासनिक प्रावधानों के मुताबिक भारतीय खाद्य निगम के पास मौजूद सरप्लस चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथनॉल ही तैयार किया जा सकेगा। इसके अलावा चीनी और चावल दोनों स्रोतों को मिलाकर कुल एथनॉल उत्पादन की सीमा 484 करोड़ लीटर निर्धारित की गई है। वहीं तेल विपणन कंपनियों की आपूर्ति व्यवस्था को देखें तो उनके लिए 1,100 करोड़ लीटर का टेंडर जारी किया गया है। इन पाबंदियों से डिस्टिलरी इकाइयों को अपनी उत्पादन रणनीति में तुरंत फेरबदल करना होगा।

## मक्के की मांग बढ़ने से अन्य उद्योगों पर असर की संभावना
चावल और चीनी दोनों प्रमुख विकल्पों पर बंदिशें लगने के कारण विनिर्माता कंपनियां अब मक्के के उपयोग की ओर आकर्षित हो सकती हैं। खुले बाजार में मक्के की मांग पहले से ही काफी मजबूत बनी हुई है। यदि एथनॉल क्षेत्र से मक्के की खरीद अचानक तेज होती है, तो पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी सेक्टर और स्टार्च निर्माण से जुड़ी इकाइयों की इनपुट लागत में सीधा इजाफा हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य और पशु आहार से जुड़े क्षेत्रों में कीमतों को बेकाबू होने से रोकने के लिए सरकार आने वाले समय में मक्के से एथनॉल बनाने पर भी सीमा तय करने पर विचार कर सकती है।

## इसका आप पर असर
एथनॉल उत्पादन के नियमों में बदलाव से खाद्य आपूर्ति, पशु आहार की लागत और ईंधन सम्मिश्रण की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी।

- **अनाज की कीमतों पर:** खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए चावल और चीनी के औद्योगिक डायवर्जन पर रोक लगाई गई है। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए खुले बाजार में आवश्यक अनाजों के दाम स्थिर रहने में मदद मिलेगी।
- **पोल्ट्री और डेयरी उद्योग:** डिस्टिलरी कंपनियों के मक्के की तरफ रुख करने से पशु आहार के दाम बढ़ सकते हैं। अगर मक्का महंगा हुआ तो आने वाले दिनों में दूध, अंडे और चिकन की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है।
- **ईंधन आपूर्ति और डिस्टिलरी:** तेल कंपनियों के 1,100 करोड़ लीटर टेंडर के मुकाबले कुल 484 करोड़ लीटर की सीमा तय होने से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश बढ़ेगी। उत्पादन इकाइयों को अब मक्के या अन्य अनाजों के नए आपूर्ति अनुबंध करने होंगे।
- **किसानों के लिए:** बाजार में मक्के की मांग बढ़ने से मक्का उत्पादक किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बनेगी। हालांकि आगे चलकर मक्के पर भी सीमा लगने की स्थिति में कीमतें दोबारा नियंत्रित हो सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने और आवश्यक कृषि उत्पादों की घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। पहले चीनी और अब चावल के औद्योगिक उपयोग को सीमित करके सरकार खाद्यान्न उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है।

- **खाद्य स्टॉक का संरक्षण:** भारतीय खाद्य निगम के भंडार का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक वितरण और जन कल्याणकारी जरूरतों को पूरा करना है। अतिरिक्त चावल के व्यावसायिक दोहन पर सीमा लगाने से आपातकालीन खाद्यान्न सुरक्षा मजबूत बनी रहती है।
- **चीनी के बाद चावल पर बंदिश:** चीनी से एथनॉल बनाने पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी थी, जिसके चलते डिस्टिलरी इकाइयां चावल के उपयोग पर ज्यादा निर्भर हो गई थीं। इस एकतरफा दबाव को संतुलित करने के लिए चावल पर भी कोटा लागू करना जरूरी हो गया।
- **वैकल्पिक फीडस्टॉक असंतुलन:** बिना नियंत्रण के खाद्यान्नों का इस्तेमाल होने से बाजार में असमान मांग पैदा होने का जोखिम रहता है। अब मक्के के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए उस पर भी निगरानी रखने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. एथनॉल बनाने के लिए चावल के उपयोग पर क्या नई सीमा तय की गई है?
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में मौजूद अतिरिक्त चावल से एथनॉल बनाने की अधिकतम सीमा 324 करोड़ लीटर तय की गई है।

### 2. चीनी और चावल दोनों को मिलाकर कुल कितना एथनॉल तैयार किया जा सकेगा?
सरकारी नियमों के अनुसार चीनी और चावल दोनों स्रोतों से मिलाकर कुल 484 करोड़ लीटर एथनॉल ही बनाया जा सकेगा।

### 3. तेल मार्केटिंग कंपनियों ने कितने एथनॉल का टेंडर जारी किया है?
तेल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से कुल 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति के लिए टेंडर दिया गया है।

### 4. चावल और चीनी पर रोक के बाद कंपनियां किस कच्चे माल की ओर रुख कर सकती हैं?
इन दोनों विकल्पों पर बंदिशों के बाद एथनॉल निर्माता कंपनियों के मक्के के उपयोग की ओर रुख करने की संभावना है।

### 5. मक्के की मांग बढ़ने का असर किन उद्योगों पर पड़ सकता है?
मक्के का इस्तेमाल बढ़ने से पोल्ट्री, डेयरी और स्टार्च उद्योग की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।

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