# यूरोपीय यूनियन ने भारत को दिया स्टील निर्यात का तोहफा, बिना शुल्क के भेजे जाएंगे इतने लाख टन

> भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर मुहर लगने से पहले ही ईयू ने भारतीय स्टील निर्यातकों के लिए बड़े कोटे का ऐलान कर दिया है। इसके तहत भारत बिना किसी कस्टम ड्यूटी के लाखों टन स्टील यूरोप भेज सकेगा।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/eu-grants-tariff-free-steel-export-quota-of-1-9-million-tonnes-to-india-ahead-of-fta-32986 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारत ईयू व्यापार, स्टील निर्यात कोटा, मुक्त व्यापार समझौता, वाणिज्य मंत्रालय, यूरोपीय संघ, मेल्ट एंड पोर

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए को लेकर अभी अंतिम बातचीत जारी है और औपचारिक मुहर लगना बाकी है। इस बीच यूरोपीय संघ की तरफ से भारतीय इस्पात उद्योग के लिए एक बड़ा तोहफा सामने आया है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है कि भारत को यूरोपीय संघ के बाजारों में स्टील एक्सपोर्ट के लिए सालाना 19 लाख टन का विशेष शुल्क दर कोटा यानी टीआरक्यू आवंटित किया गया है।

सरकार के संबंधित विभागों और अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि भारतीय निर्यातक इस निर्धारित कोटे के अलावा बचे हुए कोटे के माध्यम से लगभग नौ लाख टन का अतिरिक्त निर्यात भी आसानी से कर पाएंगे। इस तरह से अगर कुल आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो यह पूरा निर्यात कोटा बढ़कर करीब 28 लाख टन के स्तर तक पहुंच सकता है।

## मिल गई बड़े हिस्से की बाजार पहुंच
इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही भारत ने यूरोपीय संघ को होने वाले अपने कुल इस्पात निर्यात के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए सुरक्षित बाजार पहुंच पक्की कर ली है। अगर पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों को देखा जाए, तो भारत ने लगभग 30 लाख टन स्टील उत्पादों का निर्यात यूरोपीय देशों को किया था। अधिकारियों के मुताबिक यह विशेष शुल्क दर कोटा यूरोपीय संघ द्वारा लाए गए इस्पात सरप्लस क्षमता संबंधी रेगुलेशन के अंतर्गत प्रदान किया गया है, जो इसी साल एक जुलाई से प्रभाव में आ चुका है।

यूरोपीय संघ की तरफ से उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्टील की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से पैदा होने वाले दबाव और उसके असर से अपने घरेलू इस्पात उद्योग को सुरक्षित रखना है।

## लागू हुआ है नया मेल्ट एंड पोर नियम
यूरोपीय संघ के इस नए रेगुलेशन के नियमों के तहत कुल 1.83 करोड़ टन का शुल्क-मुक्त कोटा तय किया गया है। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कुल निर्धारित कोटे से अधिक मात्रा में आयात किया जाता है, तो उस अतिरिक्त हिस्से पर 50 फीसदी की भारी-भरकम ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा इस्पात के उत्पादन के दौरान अयस्क को पिघलाने और उसकी ढलाई की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के वास्ते ‘मेल्ट एंड पोर’ व्यवस्था को भी अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है।

व्यापार जगत में इस व्यवस्था का उपयोग मुख्य तौर पर यह तय करने के लिए किया जाता है कि संबंधित इस्पात को वास्तव में किस देश की सीमा के भीतर पिघलाया और ढाला गया है, जिससे गुणवत्ता और मूल स्रोत की सटीक जानकारी मिल सके।

## भारतीय निर्यातकों को मिलने लगा फायदा
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह रेगुलेशन एक जुलाई से प्रभावी होने के तुरंत बाद से ही भारतीय निर्यातकों ने इसका पूरा लाभ उठाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में 27 देशों के समूह वाले यूरोपीय संघ को लगातार स्टील की खेप भेजी जा रही है। अधिकारी का यह भी कहना है कि इस्पात क्षेत्र के लिहाज से मुक्त व्यापार समझौते के कई बड़े फायदे इस कोटे के जरिए पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं।

इस निर्धारित कोटे के दायरे में रहकर होने वाले सभी तरह के निर्यात पर किसी भी तरह का सीमा शुल्क नहीं वसूला जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, यदि कोई निर्यातक उपलब्ध तय कोटे की सीमा से ज्यादा माल भेजता है, तो उसे उस अतिरिक्त मात्रा पर 50 प्रतिशत का शुल्क चुकाना होगा।

## इसका आप पर असर
यह समझौता भारतीय इस्पात निर्माताओं और निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजारों में कारोबार को सुगम और सस्ता बनाता है।

- **भारतीय अर्थव्यवस्था पर:** इस्पात क्षेत्र के निर्यातकों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और यूरोपीय देशों के साथ व्यापार घाटे को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
- **घरेलू उद्योगों पर:** भारतीय स्टील कंपनियों को बिना किसी सीमा शुल्क के यूरोपीय संघ के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने का सीधा अवसर मिलेगा।
- **उपभोक्ता स्तर पर:** इस वैश्विक व्यापार समझौते से सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की दैनिक लागत पर कोई तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा।
- **निर्यातकों के लिए:** 19 लाख टन का शुल्क मुक्त कोटा मिलने से भारतीय कंपनियों को यूरोप में अपने उत्पाद बेचने में बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
- **अतिरिक्त कोटे की संभावना:** निर्यातक शेष नौ लाख टन के कोटे का उपयोग करके अपने कुल निर्यात को 28 लाख टन तक पहुंचा सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यूरोपीय संघ द्वारा इस विशेष कोटे को लागू करने के पीछे वैश्विक स्तर पर इस्पात की भारी अधिक क्षमता और उससे घरेलू बाजारों को बचाना मुख्य कारण है।

- **वैश्विक अतिरेक:** दुनिया भर में स्टील का जरूरत से ज्यादा उत्पादन होने के कारण यूरोपीय संघ ने अपने स्थानीय उद्योगों के संरक्षण के लिए यह सख्त रेगुलेशन तैयार किया है।
- **नया रेगुलेशन:** एक जुलाई से प्रभावी हुए इस नए यूरोपीय कानून का उद्देश्य वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू विनिर्माण को सुरक्षा प्रदान करना है।
- **पारदर्शिता की जरूरत:** इस्पात निर्माण के मूल स्रोत का पता लगाने के लिए मेल्ट एंड पोर व्यवस्था को अनिवार्य बनाया गया है ताकि व्यापार में नियमों का पालन हो सके।
- **एफटीए से पहले राहत:** भारत और यूरोपीय संघ के बीच पूर्ण मुक्त व्यापार समझौते पर अंतिम बातचीत जारी होने के कारण इस अंतरिम व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत को यूरोपीय संघ से कितना शुल्क मुक्त स्टील कोटा मिला है?
भारत को यूरोपीय संघ से सालाना 19 लाख टन का विशेष शुल्क दर कोटा मिला है।

### 2. यह नया इस्पात रेगुलेशन कब से प्रभावी हुआ है?
यह नया रेगुलेशन इसी साल एक जुलाई से प्रभावी हुआ है।

### 3. निर्यातित स्टील पर कितना शुल्क लगेगा यदि कोटा सीमा पार हो जाती है?
उपलब्ध कोटे से अधिक निर्यात किए जाने पर 50 फीसदी शुल्क देना होगा।

### 4. कुल स्टील निर्यात कोटा बढ़कर कितने टन तक पहुंच सकता है?
अधिकारियों के अनुसार कुल कोटा बढ़कर करीब 28 लाख टन तक पहुंच सकता है।

### 5. मेल्ट एंड पोर व्यवस्था का क्या उपयोग है?
यह व्यवस्था यह निर्धारित करती है कि इस्पात किस देश में पिघलाया और ढाला गया है।

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