यूरोप ने कसा शिकंजा, सस्ते चीनी सामान पर लगेगी 3 यूरो की फ्लैट कस्टम ड्यूटी यूरोपीय यूनियन ने कम कीमत वाले आयातित सामानों पर 3 यूरो का एक समान शुल्क लगाने का ऐलान किया है, जिससे चीन की ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यूरोप के बाजारों में सस्ते सामान की भरमार करने वाले चीन को अब एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। यूरोपीय यूनियन ने चीन से आने वाले कम कीमत के आयातित सामानों पर 3 यूरो की एक समान कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। इस कदम का मकसद साफ है, चीन जैसे देशों से हो रहे भारी-भरकम आयात पर लगाम कसना और उसे संतुलित करना। माना जा रहा है कि यह फैसला चीन की ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। चीन बनाता ज्यादा, इस्तेमाल करता कम यहां एक बड़ा आंकड़ा समझने लायक है। ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि खपत में उसका हिस्सा महज 13% ही है। सीधे शब्दों में कहें तो चीन जितना सामान बना रहा है, उसका आधे से भी कम खुद खपाता है और बाकी दुनिया भर के बाजारों में बेच देता है। यही वजह है कि सस्ते चीनी सामान की बाढ़ रोकने के लिए यूरोप को सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। 150 यूरो की छूट खत्म यूरोपीय यूनियन की पब्लिक रेवेन्यू से जुड़ी स्वतंत्र अथॉरिटी के मुताबिक, अब तक 150 यूरो तक की कम कीमत वाले आयातित सामानों पर जो कस्टम ड्यूटी की छूट मिलती थी, उसे खत्म कर दिया गया है। अब यूरोप में ऑनलाइन मंगाए गए हर सामान पर प्रति डिक्लेरेशन लाइन 3 यूरो का फ्लैट शुल्क देना होगा। यह नियम 1 जुलाई, 2028 तक लागू रहेगा। 6 यूरो का ऑर्डर पड़ेगा 15 यूरो का इसका असर सीधे ग्राहक की जेब पर पड़ेगा। मान लीजिए कोई यूरोपीय ग्राहक तीन अलग-अलग सस्ते उत्पाद मंगाता है, तो हर एक पर 3 यूरो का शुल्क लगेगा। यानी सिर्फ 6 यूरो के ऑर्डर पर 9 यूरो का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुल खर्च बढ़कर 15 यूरो तक पहुंच जाएगा। इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद चीन या अमेरिका जैसे देशों से छोटी-मोटी चीजें मंगाना अब पहले जैसा फायदे का सौदा नहीं रह जाएगा। इसका नतीजा तुरंत दिखने भी लगा है, क्योंकि छोटी-छोटी चीजों पर अतिरिक्त शुल्क लगने से लोग अपने ऑर्डर रद्द करने लगे हैं। हर पार्सल अलग शिपमेंट यूरोपीय यूनियन इस नई व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त है। अब हर पार्सल को अलग शिपमेंट माना जाएगा और उसी हिसाब से उस पर शुल्क वसूला जाएगा। यह अतिरिक्त शुल्क कूरियर कंपनियां डिलीवरी के वक्त सीधे ग्राहक से वसूलेंगी। इसके अलावा पार्सल में रखे सामान की गलत जानकारी देने की गुंजाइश खत्म करने के लिए प्रोडक्ट आइडेंटिफायर कोड जारी किए जा रहे हैं। ये कोड कस्टम अधिकारियों को सामान स्कैन करने और उसकी सही लोकेशन ट्रैक करने में मदद करेंगे, जिससे कोई भी हेराफेरी करना आसान नहीं रहेगा। इसका आप पर असर • ऑनलाइन खरीदारों के लिए: यूरोप में सस्ती चीजें मंगाना अब महंगा पड़ेगा, क्योंकि हर सामान पर 3 यूरो का अतिरिक्त शुल्क कुल कीमत को कई गुना बढ़ा सकता है। • कारोबार पर: चीन की ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों की बिक्री घट सकती है, जिससे सस्ते सामान बेचने वाले विक्रेताओं और उन पर निर्भर ग्राहकों दोनों को झटका लगेगा। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय यूनियन ने कितनी कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है? यूरोपीय यूनियन ने कम कीमत वाले आयातित सामानों पर प्रति डिक्लेरेशन लाइन 3 यूरो की एक समान फ्लैट कस्टम ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। 2. यह नया नियम कब तक लागू रहेगा? यह नियम 1 जुलाई, 2028 तक लागू रहेगा। 3. पहले किस कीमत तक के सामान पर छूट मिलती थी? पहले 150 यूरो तक की कम कीमत वाले आयातित सामानों पर कस्टम ड्यूटी की छूट मिलती थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है। 4. 6 यूरो का ऑर्डर अब कितने का पड़ेगा? अगर तीन अलग-अलग सस्ते उत्पाद मंगाए जाएं तो हर एक पर 3 यूरो लगने से 6 यूरो का ऑर्डर बढ़कर करीब 15 यूरो का पड़ेगा। 5. यह अतिरिक्त शुल्क कौन वसूलेगा? यह अतिरिक्त शुल्क कूरियर कंपनियां डिलीवरी के समय सीधे अंतिम ग्राहक से वसूलेंगी। 6. ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग और खपत में चीन की हिस्सेदारी कितनी है? ग्लोबल मैनुफैक्चरिंग में चीन की हिस्सेदारी करीब 30% है, जबकि खपत में उसका हिस्सा सिर्फ 13% है। 7. प्रोडक्ट आइडेंटिफायर कोड क्यों जारी किए जा रहे हैं? ये कोड पार्सल में मौजूद सामान की गलत जानकारी रोकने के लिए हैं और कस्टम अधिकारियों को सामान स्कैन करने व उसकी सही लोकेशन ट्रैक करने में मदद करेंगे। https://trendkia.com/business/europe-ne-kasa-shiknja-saste-chinese-samana-para-lagegi-3-euro-ki-phlaita-kastama-dyuti-5361 TrendKia — Har trend, sabse pehle.