फेयरफैक्स को हिस्सेदारी बिक्री के बाद भी सुरक्षित रहेंगी आईडीबीआई बैंक कर्मियों की सेवा शर्तें, सरकार ने दिया भरोसा आईडीबीआई बैंक में 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बिकने के बावजूद कर्मचारियों के सेवा नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा, दीपम सचिव अरुणीश चावला ने स्थिति साफ की। कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बहुलांश हिस्सेदारी सौंपे जाने के बाद भी आईडीबीआई बैंक के मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और काम के नियमों में किसी तरह का नकारात्मक फेरबदल नहीं किया जाएगा। निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी दीपम के सचिव अरुणीश चावला ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को भरोसा दिलाया है कि नई व्यवस्था में उनके अधिकार पहले की तरह सुरक्षित बने रहेंगे। शेयर खरीद समझौते में सुरक्षा के कड़े प्रावधान चावला ने स्पष्ट किया कि आईडीबीआई बैंक में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी को 52,878 करोड़ रुपये में बेचे जाने के रणनीतिक विनिवेश सौदे से मौजूदा स्टाफ को किसी भी तरह से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि शेयर खरीद समझौते के तहत ऐसे सख्त कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो नए रणनीतिक खरीदार को कर्मचारियों की सेवा शर्तों को मनमाने ढंग से बदलने, संशोधित करने या किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने वाला फेरबदल करने से पूरी तरह रोकते हैं। पेंशन फंड को अलग रखने का फैसला पेंशनभोगियों की चिंताओं और भविष्य की सुरक्षा पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सचिव ने कहा कि एक विशेष पेंशन फंड को पूरी तरह अलग सुरक्षित रख दिया गया है, ताकि संस्थान की सभी पुरानी प्रतिबद्धताओं का बिना किसी रुकावट सम्मान किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रशासनिक पहलू पर भी रोशनी डाली कि आईडीबीआई बैंक कोई पारंपरिक राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं है। इस बैंक में कर्मचारियों के काम करने के नियम और शर्तें भारत सरकार द्वारा सीधे तय नहीं की जाती हैं, बल्कि कर्मचारियों के साथ विचार-विमर्श करके बैंक का निदेशक मंडल इन्हें निर्धारित करता आया है। पुनर्गठन के बाद भी यह संस्थान कंपनी अधिनियम और देश के श्रम कानूनों के दायरे में रहते हुए एक चालू इकाई के रूप में काम करता रहेगा। कर्मचारियों का विरोध और हड़ताल का आह्वान प्रशासन की ओर से यह आश्वासन ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब बैंक के भीतर विनिवेश के फैसले को लेकर असंतोष पनप रहा है। निजीकरण के इस कदम के विरोध में आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों ने नवंबर की शुरुआत में देश भर की सभी शाखाओं में हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। बैंक कर्मियों के इस आंदोलन को बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमुख शीर्ष संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की ओर से भी समर्थन हासिल हुआ है, जिससे बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसका आप पर असर इस विनिवेश सौदे और आश्वासन का बैंक ग्राहकों, कर्मियों और निवेशकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • बैंक कर्मियों के लिए: नौकरी की मौजूदा शर्तें और वेतनमान नए खरीदार के आने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। कर्मचारियों को सेवा शर्तों में किसी भी प्रतिकूल बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। • पेंशनभोगियों के लिए: पेंशन भुगतान के लिए विशेष फंड अलग से तैयार कर दिया गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मासिक पेंशन बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। • बैंक ग्राहकों के लिए: नवंबर की शुरुआत में प्रस्तावित दो दिवसीय हड़ताल के कारण शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है। ग्राहक नकदी निकासी और जरूरी बैंकिंग कार्य समय से पहले निपटा लें। • शेयरधारकों के लिए: नियंत्रण हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट होने से बैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सौदे के कानूनी नियमों से भविष्य की व्यावसायिक दिशा तय होगी। ऐसा क्यों हुआ सरकार वित्तीय सुधारों के तहत आईडीबीआई बैंक में अपनी और जीवन बीमा निगम की अधिकांश हिस्सेदारी बेचकर बैंक का रणनीतिक विनिवेश कर रही है। कर्मचारी संगठन निजीकरण के बाद नौकरियों की सुरक्षा, पेंशन और कार्य स्थितियों में बदलाव की आशंका को लेकर विरोध कर रहे हैं। • रणनीतिक विनिवेश का फैसला: सरकार ने 52,878 करोड़ रुपये में 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की मंजूरी दी है। इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी दक्षता और निजी प्रबंधन को बढ़ावा देना है। • कर्मचारियों की आशंकाएं: कर्मचारियों को डर था कि नए निजी प्रबंधन के आने से नौकरियां जा सकती हैं या सेवा नियम सख्त हो सकते हैं। इसी भय के चलते यूनियनों ने नवंबर में हड़ताल का आह्वान किया। • सरकार का दखल: विवाद को शांत करने और हड़ताल के प्रभाव को सीमित करने के लिए दीपम सचिव ने सेवा शर्तों के सुरक्षित रहने की सार्वजनिक पुष्टि की है। सवाल-जवाब 1. आईडीबीआई बैंक की कितनी हिस्सेदारी बेची जा रही है? आईडीबीआई बैंक में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेची जा रही है। 2. इस हिस्सेदारी को कौन सी कंपनी खरीद रही है? कनाडा की निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स इस बहुलांश हिस्सेदारी को खरीद रही है। 3. क्या बिक्री के बाद कर्मचारियों की नौकरी और वेतन शर्तों में बदलाव होगा? नहीं, शेयर खरीद समझौते के अनुसार खरीदार मौजूदा कर्मियों की सेवा शर्तों में कोई प्रतिकूल बदलाव नहीं कर सकता। 4. कर्मचारियों ने हड़ताल का आह्वान क्यों किया है? कर्मचारी और अधिकारी संगठन बैंक के निजीकरण के विरोध में नवंबर की शुरुआत में हड़ताल पर जा रहे हैं। https://trendkia.com/business/fairfax-ko-hissedari-bikri-ke-bada-bhi-surakshita-rahengi-idbi-bank-karmiyon-ki-seva-sharten-sarakara-ne-diya-bharosa-51239 TrendKia — Har trend, sabse pehle.