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  "title": "फरीदाबाद के किसान लक्ष्मण सिंह ने अजमेर की तिरंगा जाफरी गेंदा वैरायटी से की नई शुरुआत",
  "summary": "फरीदाबाद के किसान लक्ष्मण सिंह ने इस बार अपने खेत में अजमेर की तिरंगा जाफरी गेंदा वैरायटी उगाई है। इससे पहले उन्हें कोलकाता वैरायटी में नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने यह नया प्रयोग किया है।",
  "content": "हरियाणा के फरीदाबाद जिले में फूलों की खेती करने वाले किसानों के बीच गेंदे की एक खास किस्म चर्चा का विषय बनी हुई है। साहुपुरा गांव के खेतों में इस समय गेंदे की एक ऐसी नई किस्म लहलहा रही है, जिसे लेकर स्थानीय किसानों में बेहतरीन पैदावार और ऊंचे दामों की उम्मीद जग गई है। इस क्षेत्र में पारंपरिक रूप से गेंदे की कोलकाता किस्म को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन इस बार एक प्रगतिशील किसान ने लीक से हटकर अजमेर की तिरंगा जाफरी किस्म को अपने खेतों में आजमाने का फैसला किया है। यदि बाजार में इस किस्म को सही दाम मिल जाते हैं, तो किसानों के लिए यह खेती काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। फसल को जमीन में रोपे हुए लगभग डेढ़ महीने का वक्त बीत चुका है और पौधे तेजी से विकास कर रहे हैं। किसान को पूरी उम्मीद है कि इस बार उनकी मेहनत रंग लाएगी और पिछली फसल में हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई भी आसानी से हो जाएगी।\n\nसाहुपुरा गांव में बदला खेती का पैटर्न\nबल्लभगढ़ के ऊंचा गांव के रहने वाले लक्ष्मण सिंह ने अपने खेती के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनका मुख्य खेत फरीदाबाद के साहुपुरा गांव में स्थित है। उन्होंने इस बार अपनी लगभग एक एकड़ जमीन पर अजमेर से मंगवाई गई तिरंगा जाफरी गेंदे की फसल उगाई है। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने कोलकाता वाली किस्म की खेती की थी, लेकिन बाजार में अनुकूल भाव न मिलने के कारण उन्हें भारी घाटे का सामना करना पड़ा था। इस बार किसी परिचित ने उन्हें अजमेर की इस विशेष किस्म के बारे में जानकारी दी और इसका बीज भी उपलब्ध कराया। इस सलाह पर विचार करने के बाद उन्होंने जोखिम उठाने का मन बनाया और करीब डेढ़ महीने पहले इस नई फसल की रोपाई का काम शुरू कर दिया।\n\nपारंपरिक कोलकाता किस्म से हटकर अजमेरिया वैरायटी का चुनाव\nलक्ष्मण सिंह का कहना है कि उनके आसपास के तमाम किसान गेंदा की खेती से जुड़े हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश लोग केवल कोलकाता किस्म पर ही भरोसा करते आए हैं। इसके विपरीत, अजमेर की तिरंगा जाफरी को कृषि क्षेत्र में एक बेहतर और अधिक उत्पादक किस्म माना जाता है। इसकी पैदावार क्षमता भी काफी मजबूत बताई जाती है, इसी बात से प्रेरित होकर उन्होंने इस बार करीब 250 ग्राम बीज मंगवाया और उसकी बुआई की। गेंदे की फसल उगाने की प्रक्रिया में मेहनत की कोई कमी नहीं होती है। खेत को पूरी तरह तैयार करने के लिए लगभग चार बार जुताई का काम करना पड़ता है। इसमें दो बार हैरो और दो बार कल्टीवेटर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बाद खेतों में क्यारियां या मेड़ तैयार की जाती हैं। इसके पश्चात फसल की जरूरत के हिसाब से नियमित रूप से पानी देना बेहद जरूरी होता है। यदि समय पर बारिश नहीं होती है, तो अमूमन 10 दिन के अंतराल पर खेत की सिंचाई करनी ही पड़ती है।\n\nबाजार भाव की अनिश्चितता और मुनाफा कमाने की उम्मीद\nपिछली फसल में हुए आर्थिक नुकसान का जिक्र करते हुए लक्ष्मण सिंह बताते हैं कि चूंकि उन्होंने पहले घाटा झेला था, इसलिए इस बार इस नई किस्म से उनकी उम्मीदें बहुत अधिक जुड़ी हुई हैं। गेंदे के फूलों के दाम को लेकर बाजार में कोई तय नियम नहीं होता है। कई बार मंडियों में गेंदे का फूल लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक के ऊंचे भाव पर बिक जाता है, लेकिन इसके दाम पूरी तरह से अनिश्चित रहते हैं। स्थानीय मांग और आपूर्ति के आधार पर गेंदे का थोक भाव हर दिन ऊपर-नीचे होता रहता है, जिससे किसानों की कमाई सीधे तौर पर बाजार की स्थिति पर निर्भर करती है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: फूलों की खेती से जुड़े किसानों को पारंपरिक किस्मों के मुकाबले बेहतर पैदावार और नई किस्मों के फायदों की जानकारी मिलती है।\n\nफरीदाबाद में: साहुपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों को गेंदे की नई किस्मों को आजमाने और बाजार के उतार-चढ़ाव को समझकर खेती करने की प्रेरणा मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किसान लक्ष्मण सिंह ने इस बार गेंदे की कौन सी वैरायटी लगाई है?\nउन्होंने इस बार अजमेर की तिरंगा जाफरी वैरायटी का गेंदा लगाया है।\n\n2. लक्ष्मण सिंह ने कितनी जमीन में गेंदे की खेती की है?\nउन्होंने करीब एक एकड़ जमीन में गेंदे की फसल उगाई है।\n\n3. इस फसल के लिए लगभग कितने बीज का इस्तेमाल किया गया?\nउन्होंने इस बार करीब 250 ग्राम बीज मंगवाया था।\n\n4. इससे पहले किसान कौन सी वैरायटी उगाते थे और क्या हुआ था?\nवे पहले कोलकाता की वैरायटी उगाते थे जिसमें उन्हें घाटा हो गया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nनई किस्मों का प्रयोग: असफलता मिलने पर निराश होने के बजाय दूसरी बेहतर किस्मों की तलाश करें और नया प्रयोग करने से न डरें।\n\nखेती में मेहनत और देखरेख: फसल की बेहतर पैदावार के लिए खेत की सही जुताई, समय पर सिंचाई और कृषि प्रबंधन बेहद जरूरी है।\n\nबाजार की समझ: फसल उगाने के साथ-साथ बाजार की मांग और उसके उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाएं।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-23",
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    "गेंदा खेती",
    "फरीदाबाद किसान",
    "तिरंगा जाफरी",
    "फूलों की खेती",
    "कृषि समाचार"
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