# त्योहारों से पहले चीनी के बढ़ते दामों पर लगाम लगाने के लिए चीनी मिलों ने समय से पहले पेराई शुरू करने का दिया प्रस्ताव

> देशभर में चीनी के बढ़ते खुदरा दामों को नियंत्रित करने और आगामी त्योहारों के समय भरपूर आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से चीनी उद्योग के प्रमुख संगठनों ने 10 से 15 दिन पहले पेराई सत्र आरंभ करने की तैयारी जताई है। इसके साथ ही उद्योग ने इस फैसले से होने वाले संभावित वित्तीय घाटे से उबरने के लिए केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/festivals-se-pehle-sugar-ke-badhte-damon-par-lagam-lagane-ke-liye-sugar-mills-ne-samay-se-pehle-perai-shuru-karne-ka-diya-prastav-15095 · **Language:** Hindi
**Tags:** चीनी की कीमतें, इस्मा, पेराई सत्र, एनएफसीएसएफ, गन्ना किसान, खाद्य मंत्रालय

देश के प्रमुख शहरों में चीनी की खुदरा कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। दिल्ली से लेकर मुंबई तक आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। बाजार में मिठास के इस बढ़ते भाव को नियंत्रित करने और आने वाले फेस्टिव सीजन के दौरान आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी को रोकने के लिए चीनी उद्योग जगत ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है। चीनी विनिर्माण क्षेत्र की शीर्ष संस्थाओं ने सरकार के समक्ष आगामी पेराई सत्र को निर्धारित समय से पहले शुरू करने की पेशकश रखी है, ताकि बाजार में नई चीनी समय पर पहुंच सके और बढ़ती दरों पर लगाम लगाई जा सके।

## पेराई सत्र को 10 से 15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी
चीनी उद्योग के दो सबसे बड़े प्रतिनिधित्व संगठनों इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) तथा नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) ने इस संदर्भ में एक साझा औपचारिक कदम उठाया है। दोनों निकायों ने केंद्रीय खाद्य सचिव को एक विस्तृत संयुक्त पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि देश भर की चीनी मिलें आने वाले पेराई सत्र को अपने सामान्य समय पत्रक से लगभग 10 से 15 दिन पहले आरंभ करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम और तैयार हैं। उद्योग जगत का मानना है कि इस कदम से त्योहारों की शुरुआत से ठीक पहले बाजार में नई चीनी का ताजा स्टॉक आ जाएगा, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन सुदृढ़ होगा। हालांकि, संगठनों ने यह भी रेखांकित किया है कि बिना सरकारी वित्तीय सहयोग के मिलों के लिए इस निर्णय पर अमल करना बेहद कठिन होगा, क्योंकि समय से पहले काम शुरू करने से उनका परिचालन एवं वित्तीय गणित प्रभावित होगा।

## असमय पेराई से सामने आने वाली तकनीकी और वित्तीय चुनौतियां
निर्धारित तिथि से पूर्व पेराई चक्र शुरू करने के फैसले से चीनी मिलों के सामने कई गंभीर व्यावहारिक कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, गन्ने की समय से पहले कटाई करने पर उसमें से शर्करा की प्राप्ति का स्तर यानी रिकवरी रेट काफी कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, खेतों में गन्ने की कुल पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है और मिलों की परिचालन दक्षता में भी गिरावट दर्ज की जाती है। इन तमाम तकनीकी कारणों से चीनी के प्रति किलोग्राम उत्पादन की कुल लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो जाती है। व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही उद्योग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि यदि सरकार इस अतिरिक्त लागत बोझ की आंशिक भरपाई करने के लिए तैयार होती है, तभी मिलें समय से पहले अपना काम शुरू कर पाएंगी। वर्तमान में चीनी मिलें पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत के दोहरे दबाव का सामना कर रही हैं।

## वैश्विक और स्थानीय कारणों से बढ़ा उत्पादन का खर्च
चीनी मिलों की कुल लागत में हुई हालिया बढ़ोतरी के पीछे अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के कारक जिम्मेदार हैं। उद्योग निकायों के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में बने भू-राजनीतिक तनाव और ईरान युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में गंधक की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका उपयोग चीनी प्रसंस्करण में प्रमुखता से होता है। दूसरी तरफ, भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा पैकेजिंग से जुड़े नियमों में हाल में बदलाव किए गए हैं। नए मानकों के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाली पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होने से पॉलीप्रोपाइलीन बैग्स के दाम काफी बढ़ गए हैं। इन दोनों वैश्विक एवं नियामक घटनाक्रमों ने चीनी उत्पादकों की विनिर्माण लागत को बहुत अधिक बढ़ा दिया है, जिससे असमय पेराई शुरू करने का वित्तीय जोखिम और ज्यादा बढ़ जाता है।

## सरकार से मांगी गई राहत और गुड़-खांडसारी पर प्रतिबंध का सुझाव
असमय पेराई के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचने के लिए इस्मा और एनएफसीएसएफ ने सरकार से कुछ विशिष्ट वित्तीय उपायों की मांग की है। संगठनों ने सीधे वित्तीय मुआवजे के साथ-साथ यह प्रस्ताव भी रखा है कि मिलों को अक्टूबर माह के कुल उत्पादन के बराबर अतिरिक्त घरेलू चीनी बिक्री का कोटा आवंटित किया जाए। इसके अलावा घरेलू बाजार में चीनी की बिक्री पर लगने वाले सीजीएसटी में अस्थायी छूट अथवा कोई अन्य समतुल्य वित्तीय राहत देने का आग्रह किया गया है। साथ ही उद्योग ने सरकार से एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियामक सिफारिश भी की है। उनका कहना है कि गुड़ और खांडसारी बनाने वाली इकाइयों को चीनी मिलों के चालू होने के बाद ही पेराई शुरू करने की अनुमति दी जानी चाहिए। ऐसा करने से सत्र के शुरुआती चरण में चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकेगा, जिससे मिलों की क्षमता का पूरा उपयोग होगा और चीनी निष्कर्षण दर को उच्चतम स्तर पर रखा जा सकेगा।

## लागत से कम मिल रही चीनी की कीमत और किसानों का भुगतान
उद्योग संगठनों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने तक देश भर में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत लगभग 39.5 रुपये से 40 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई थी। यह दर चीनी तैयार करने की औसत विनिर्माण लागत से काफी नीचे थी। जुलाई के अंत तक बाजार में थोड़ी मूल्य वृद्धि दर्ज की गई और दरें 40 रुपये से 40.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, लेकिन इसके बावजूद यह आंकड़ा वर्तमान औसत उत्पादन लागत जो कि लगभग 42 रुपये प्रति किलोग्राम है, से काफी कम बना हुआ है। इसके बावजूद चीनी उद्योग ने अपनी सामाजिक और वित्तीय जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। अक्टूबर से सितंबर की अवधि वाले चालू 2025-26 चीनी विपणन सत्र के दौरान अब तक देश भर के गन्ना किसानों को लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** आने वाले त्योहारी मौसम में चीनी के दाम स्थिर रहने से आम परिवारों के मासिक बजट पर महंगाई का असर कम हो सकता है।

**दिल्ली और मुंबई में:** महानगरों के खुदरा बाजारों में समय पर नई चीनी आने से दुकानों पर कीमतें नियंत्रित रह सकती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. चीनी मिलों ने पेराई सत्र जल्दी शुरू करने का सुझाव क्यों दिया है?
त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और बढ़ते खुदरा दामों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से मिलों ने यह प्रस्ताव दिया है।

### 2. पेराई सत्र को कितने दिन पहले शुरू करने की योजना है?
चीनी उद्योग संगठनों ने सामान्य समय पत्रक से लगभग 10 से 15 दिन पहले पेराई कार्य शुरू करने की बात कही है।

### 3. किन उद्योग संगठनों ने सरकार को यह पत्र लिखा है?
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) ने संयुक्त रूप से यह पत्र भेजा है।

### 4. समय से पहले पेराई शुरू करने से मिलों को क्या नुकसान हो सकता है?
असमय पेराई से गन्ने में शर्करा की प्राप्ति कम होती है, पैदावार घटती है और विनिर्माण की प्रति किलोग्राम लागत बढ़ जाती है।

### 5. वर्तमान में चीनी की उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य क्या है?
चीनी की औसत उत्पादन लागत लगभग 42 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि जुलाई अंत तक मिल मूल्य 40 से 40.5 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है।

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