रक्षाबंधन से पहले अंबाला में महंगी हुई मिठाइयां, चीनी और घी के तेवर से आम आदमी का बजट बिगड़ा अंबाला में रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले चीनी, घी और ड्राई फ्रूट के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ गई है और ग्राहकों की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। अंबाला में इस बार का रक्षाबंधन और आगामी त्योहारों का सीजन आम आदमी के बजट पर भारी पड़ने वाला है। बाजारों में रौनक तो लौटने लगी है, लेकिन मिठाइयों की दुकानों पर ग्राहकों को महंगाई का कड़वा घूंट पीना पड़ रहा है। चीनी, शुद्ध घी और महंगे ड्राई फ्रूट के दामों में आई भारी तेजी के कारण मिठाई तैयार करने की लागत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। दुकानदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण मिठाइयों के भाव बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है, जिसका सीधा असर उनकी बिक्री पर भी देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब एक किलो की जगह केवल आधा किलो मिठाई खरीदकर ही किसी तरह काम चला रहे हैं। त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही अंबाला के बाजारों में चीनी, काजू, बादाम, किशमिश, पिस्ता और घी जैसी खाने की जरूरी चीजों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। लेकिन इस बार महंगाई के चलते त्योहारों की मिठास फीकी पड़ती दिख रही है। कच्चे माल के महंगे होने से न सिर्फ दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, बल्कि आम परिवारों का घरेलू बजट भी पूरी तरह से चरमरा गया है। लोग अब त्योहार के मौके पर खरीदारी करने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर हो रहे हैं। थोक बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची चीनी की कीमतें चीनी कारोबार से जुड़े विकास ने इस पूरी स्थिति पर रोशनी डालते हुए बताया कि वह पिछले करीब 25 साल से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्होंने अपने पूरे करियर में इतनी जबरदस्त तेजी कभी नहीं देखी। उनके मुताबिक, थोक बाजार में चीनी का भाव लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। जो चीनी का ट्रक पहले कभी करीब 15 लाख रुपये में आ जाता था, उसकी कीमत अब बढ़कर 22 से 30 लाख रुपये तक हो गई है। विकास ने चीनी के महंगे होने के पीछे बाजार में फैली महंगाई की धारणा और पैनिक बाइंग को एक बड़ा कारण बताया है। जैसे ही बाजार में यह चर्चा शुरू हुई कि चीनी और अधिक महंगी होने वाली है, लोगों ने जरूरत से ज्यादा स्टॉक करना शुरू कर दिया। जिन उपभोक्ताओं को सिर्फ 5 किलो चीनी की जरूरत थी, उन्होंने भविष्य के डर से 50 किलो तक चीनी खरीदकर अपने घरों में रख ली। इस अचानक से बढ़ी मांग के कारण बाजार पर भारी दबाव बन गया और कीमतें ऊपर चली गईं। उत्पादन और एथेनॉल को लेकर चर्चाएं इसके अलावा गन्ने की गुणवत्ता में गिरावट और उत्पादन में कमी भी चीनी के महंगे होने की एक मुख्य वजह रही है। इस बार गन्ने से रस कम निकलने के कारण चीनी का कुल उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है। बाजार में यह भी चर्चा जोरों पर है कि चीनी के महंगे होने के पीछे एथेनॉल का उत्पादन एक बड़ी वजह है। हालांकि, विकास इस बात से इनकार करते हैं कि सीधे चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हो रहा है। उनके अनुसार, एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस और उससे जुड़े अन्य उप-उत्पादों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई है कि आने वाले कुछ दिनों में चीनी के दामों में हल्की राहत देखने को मिल सकती है। ड्राई फ्रूट और घी की महंगाई ने बढ़ाई चिंता सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि ड्राई फ्रूट्स का बाजार भी इस महंगाई के दौर से अछूता नहीं है। रक्षाबंधन के पावन पर्व के कारण बादाम, काजू और पिस्ता की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। अकेले बादाम गिरी के भाव में करीब 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक की तेजी दर्ज की जा रही है। बाजार में सप्लाई प्रभावित होने और लागत बढ़ने का सीधा असर इन पर पड़ा है। कारोबारियों का अनुमान है कि अगर यही तेजी जारी रही, तो आने वाले समय में बादाम गिरी की कीमत सीधे 1,250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। बादाम के अलावा काजू, किशमिश और पिस्ता भी काफी महंगे बिक रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, घी और रिफाइंड तेल की कीमतों में लगी आग ने मिठाई निर्माताओं की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। दुकानदारों के अनुसार, घी और रिफाइंड के दामों में करीब 500 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही मिठाई के डिब्बों और पैकेजिंग की लागत बढ़ने से भी कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ पड़ा है। मिठाई विक्रेता गुरमीत सिंह का कहना है कि चीनी, घी और ड्राई फ्रूट जैसे तमाम कच्चे माल के महंगे होने से मिठाई बनाना लगातार महंगा होता जा रहा है। जो नियमित ग्राहक पहले त्योहार पर एक किलो मिठाई खरीदा करते थे, वे अब केवल आधा ऐसी मात्रा यानी आधा किलो से ही काम चला रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में दाम बढ़ाना दुकानदारों की मजबूरी है, लेकिन इससे उनकी कुल बिक्री में भारी गिरावट आई है। आम जनता की जेब पर पड़ रहा है सीधा असर यह महंगाई केवल बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने आम लोगों के घरों के बजट को बिगाड़ दिया है। स्थानीय निवासी रमेश मल्होत्रा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों की आमदनी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन इसके मुकाबले रोजमर्रा की जरूरत की चीजें लगातार महंगी होती जा रही हैं। ऐसे में त्योहार के इस खास मौके पर मिठाई और अन्य जरूरी सामान खरीदना बहुत कठिन होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस बढ़ती हुई महंगाई पर जल्द से जल्द नियंत्रण लगाया जाए। मजदूरी का काम करने वाले सुखविंदर सिंह ने भी सरकार और व्यवस्था के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में दो वक्त की रोटी के साथ-साथ रोजमर्रा की चीजें जुटाना भी बहुत मुश्किल हो गया है। रक्षाबंधन और अन्य त्योहारों के इस सीजन में हर एक चीज के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि उनकी दिहाड़ी और आमदनी में कोई भी बदलाव नहीं आया है। ऐसी स्थिति में इस बार के त्योहार पर अपने बच्चों और परिवार के लिए मिठाई खरीदना उनके लिए एक सपना जैसा हो गया है। इसका आप पर असर • भारत में: त्योहारों के सीजन में चीनी, घी और ड्राई फ्रूट के दाम बढ़ने से देश भर के बाजारों में त्योहारी बजट प्रभावित हो रहा है। • अंबाला में: अंबाला के स्थानीय उपभोक्ताओं को मिठाइयों और रोजमर्रा की चीजों के लिए अधिक कीमतें चुकानी पड़ रही हैं, जिससे खरीदारी आधी रह गई है। सवाल-जवाब 1. अंबाला में रक्षाबंधन से पहले मिठाई क्यों महंगी हुई है? चीनी, शुद्ध घी और ड्राई फ्रूट्स के कच्चे माल के दाम बढ़ने के कारण मिठाई बनाने की लागत में भारी इजाफा हुआ है। 2. थोक बाजार में चीनी की कीमत कहां तक पहुंच गई है? थोक बाजार में चीनी का भाव लगभग 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, और चीनी का ट्रक जो पहले 15 लाख में आता था वह अब 22 से 30 लाख रुपये का हो गया है। 3. बादाम गिरी के दाम में कितनी तेजी आई है? बादाम गिरी के दाम में करीब 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक की तेजी देखने को मिल रही है। 4. महंगाई का ग्राहकों की खरीद पर क्या असर पड़ा है? दाम बढ़ने के कारण जो ग्राहक पहले एक किलो मिठाई खरीदते थे, वे अब केवल आधा किलो खरीदकर काम चला रहे हैं। https://trendkia.com/business/festive-sweet-prices-surge-in-ambala-ahead-of-rakshabandhan-due-to-costly-sugar-and-ghee-20768 TrendKia — Har trend, sabse pehle.