नौकरी की तलाश में भटके शिवांग गुप्ता, फिरोजाबाद लौटकर शुरू किया चूड़ियों का कारोबार और बन गए सफल कारोबारी फिरोजाबाद के शिवांग गुप्ता ने नौकरी न मिलने पर हार नहीं मानी और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर चूड़ियों का बिजनेस शुरू किया। आज वे इस कारोबार से सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश के अधिकांश युवा सरकारी या प्राइवेट नौकरी की तलाश में कई साल खर्च कर देते हैं। कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी मनचाहा रोजगार नहीं मिल पाता है, जिसके बाद लोग हताश होकर बैठ जाते हैं। हालांकि कुछ ऐसे जुनूनी युवा भी होते हैं जो असफलताओं से घबराने के बजाय खुद का काम शुरू करने की ठान लेते हैं। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के रहने वाले शिवांग गुप्ता ने भी कुछ ऐसा ही साहसिक कदम उठाया और आज वे एक कामयाब कारोबारी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। रोजगार की तलाश में दिल्ली और नोएडा की दौड़ शिक्षा पूरी करने के बाद शिवांग गुप्ता ने नौकरी की तलाश शुरू की ताकि अपने पैरों पर खड़े हो सकें। शिकोहाबाद से बीकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद वे रोजगार की तलाश में दिल्ली और नोएडा जैसे बड़े शहरों की ओर निकल पड़े। नोएडा में उन्होंने कई निजी कंपनियों में काम की तलाश की और आखिरकार एक जगह नौकरी मिल भी गई। हालांकि, उस कंपनी में उन्हें महीने के मात्र बारह हजार रुपये ही मिलते थे, जो उनकी उम्मीदों और जरूरतों के हिसाब से बहुत कम थे। कम वेतन और नापसंद माहौल के कारण उनका मन उस नौकरी में नहीं लगा और वे वापस अपने गृह नगर फिरोजाबाद लौट आए। रिश्तों की मदद और एक लाख रुपये से रखी नींव फिरोजाबाद लौटने के बाद शिवांग गुप्ता ने नौकरी के पीछे भागने के बजाय खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बनाई। शहर की प्रसिद्ध चूड़ी मार्केट गली बोहरान में दुकान खोलने का विचार उनके मन में आया, लेकिन सबसे बड़ी बाधा पैसों की थी। उस समय उनके पास पूंजी की भारी कमी थी। हार न मानते हुए उन्होंने अपने रिश्तेदारों से संपर्क किया और आर्थिक मदद मांगी। परिवार और रिश्तेदारों के सहयोग से जैसे-तैसे करीब एक लाख रुपये का इंतजाम हुआ। इस शुरुआती रकम से उन्होंने एक छोटी दुकान किराए पर ली और कांच की चूड़ियों का कारोबार आरंभ कर दिया। चुनौतियों को पार कर चमकाया कारोबार नया बिजनेस शुरू करते ही शिवांग गुप्ता को शुरुआती दौर में भारी संघर्षों का सामना करना पड़ा। बाजार में अपनी पकड़ बनाने और ग्राहकों को आकर्षित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। शुरुआत में ग्राहकों की कमी और काम सेट होने में कई परेशानियां आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और काम पटरी पर लौटने लगा। उनकी दुकान पर मिलने वाली चूड़ियों की गुणवत्ता और वैरायटी ने ग्राहकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया, जिससे स्थानीय स्तर पर उनका नाम होने लगा। होलसेल और रिटेल कारोबार से लाखों का मुनाफा वर्तमान में शिवांग गुप्ता अपनी दुकान पर फैंसी चूड़ियों से लेकर मेटल के कंगन तक की तमाम वैरायटी बेचते हैं। उनकी दुकान पर हर तरह की कांच की चूड़ियां उचित दामों पर उपलब्ध रहती हैं। वे केवल खुदरा यानी रिटेल में ही नहीं, बल्कि होलसेल का बड़ा काम भी संभालते हैं। देश के अलग-अलग कोनों से व्यापारी थोक में माल खरीदने के लिए उनके पास पहुंचते हैं। किफायती कीमत और बेहतरीन वैरायटी के चलते उन्हें हर महीने बड़े ऑर्डर मिलते हैं। आज उनका कारोबार दो से तीन लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है और कुछ ही वर्षों की मेहनत ने उन्हें एक सफल उद्यमी बना दिया है। इसका आप पर असर यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है जो नौकरी न मिलने पर निराश हो जाते हैं और छोटे स्तर से भी आत्मनिर्भर बनने की शुरुआत कर सकते हैं। • भारत में: देश के बेरोजगार युवाओं को यह सीख मिलती है कि पारंपरिक नौकरी की तलाश में समय गंवाने के बजाय कम पूंजी से भी खुद का स्थानीय व्यापार खड़ा किया जा सकता है। • फिरोजाबाद में: स्थानीय स्तर पर कांच और चूड़ी उद्योग से जुड़े युवाओं और कारीगरों को यह प्रेरणा मिलती है कि वे होलसेल और रिटेल बाजार में नए विकल्प तलाशकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. शिवांग गुप्ता ने कहां से अपनी पढ़ाई पूरी की थी? उन्होंने शिकोहाबाद से बीकॉम ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। 2. नोएडा में उन्हें नौकरी में कितने रुपये मिलते थे? नोएडा की एक निजी कंपनी में उन्हें महीने के मात्र बारह हजार रुपये मिलते थे। 3. उन्होंने व्यापार शुरू करने के लिए कितने पैसे जुटाए थे? उन्होंने रिश्तेदारों से मदद लेकर लगभग एक लाख रुपये का इंतजाम किया था। 4. उनकी दुकान फिरोजाबाद में किस बाजार में स्थित है? उनकी दुकान फिरोजाबाद की प्रसिद्ध चूड़ी मार्केट गली बोहरान में स्थित है। 5. वर्तमान में उनके कारोबार का टर्नओवर कितना है? इस बिजनेस से अब उनका लगभग दो से तीन लाख रुपए का टर्नओवर है। प्रेरणा और सबक शिवांग गुप्ता की यह यात्रा संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ने वाले हर व्यक्ति को प्रेरित करती है। • कम संसाधनों से शुरुआत: बड़े निवेश की प्रतीक्षा किए बिना उपलब्ध धन और रिश्तेदारों की मदद से छोटा काम भी शुरू किया जा सकता है। • नौकरी के मोह से मुक्ति: कम वेतन वाली नापसंद नौकरी में फंसे रहने के बजाय खुद का स्वरोजगार चुनना अधिक फायदेमंद हो सकता है। • कड़ी मेहनत और धैर्य: शुरुआती असफलताओं और परेशानियों के बावजूद डटे रहने से व्यापार में सफलता अवश्य मिलती है। https://trendkia.com/business/firozabad-ke-shivang-gupta-ne-naukri-na-milne-par-shuru-kiya-chudiyon-ka-business-rishtedaaron-ki-madad-se-ab-laakhon-mein-kamaai-24017 TrendKia — Har trend, sabse pehle.