# महज 45 रुपये से शुरू हुआ सफर, आज बालोद की शान है देवांगन चाट कॉर्नर

> छत्तीसगढ़ के बालोद में एक छोटे से निवेश से शुरू हुआ देवांगन चाट कॉर्नर आज अपनी मेहनत और स्वाद के दम पर शहर की एक प्रमुख पहचान बन चुका है। पच्चीस साल के इस सफर में दुकान ने आम लोगों का भरोसा जीतकर अपनी खास जगह बनाई है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/from-rs-45-to-a-city-icon-the-inspiring-rise-of-devangan-chaat-corner-in-balod-5650 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालोद, छत्तीसगढ़, सफलता की कहानी, स्ट्रीट फूड, देवांगन चाट कॉर्नर

छत्तीसगढ़ का बालोद शहर आज एक खास खान-पान केंद्र की वजह से चर्चा में है। यहाँ का देवांगन चाट कॉर्नर एक ऐसी सफलता की कहानी है, जिसकी नींव आज से करीब 25 साल पहले केवल 45 रुपये की मामूली पूंजी से रखी गई थी। गांधी भवन के पास बुधवारी बाजार में स्थित यह दुकान अब केवल स्वाद का अड्डा नहीं रही, बल्कि इलाके की एक बड़ी पहचान बन गई है। विशेष रूप से जब मानसून की बारिश शुरू होती है, तो यहाँ की गरमागरम समोसा चाट और दही कचौड़ी का आनंद लेने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

## संघर्षपूर्ण शुरुआत और मेहनत
दुकान के संचालक ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए बताया कि पच्चीस साल पहले उनके हालात बहुत चुनौतीपूर्ण थे। परिवार की जिम्मेदारियां कंधों पर थीं और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना एक बड़ी प्राथमिकता थी। उस कठिन दौर में जब अपनों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, तो उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर होने का निर्णय लिया। उन्होंने मात्र 45 रुपये जमा किए और उसी पूंजी से गुपचुप यानी पानीपूरी का व्यापार शुरू किया।

## साइकिल से लेकर ठेले तक का सफर
व्यापार के शुरुआती दिनों में संचालक ने काफी मशक्कत की। वे अपनी साइकिल पर सवार होकर आसपास के गांवों में लगभग 30 किलोमीटर का दायरा तय करते थे ताकि लोगों को पानीपूरी बेच सकें। उनकी ईमानदारी और ग्राहकों की पसंद ने जल्द ही रंग दिखाना शुरू किया। कमाई बढ़ने के साथ उन्होंने 800 रुपये में एक ठेला हासिल किया। वक्त के साथ बदलाव आया और आज वह एक व्यवस्थित आधुनिक ठेले का संचालन कर रहे हैं, जहाँ ग्राहकों की कतारें अक्सर देखी जा सकती हैं।

## किफायती दाम और स्वाद की गुणवत्ता
दुकान की एक बड़ी खूबी इसकी वाजिब कीमतें हैं। संचालक ने बताया कि पहले नाश्ता केवल ढाई रुपये में मिल जाता था और एक रुपये में चार पानीपूरी दी जाती थी। हालांकि समय के साथ महंगाई के कारण कीमतें बदली हैं, लेकिन आज भी यह आम आदमी की जेब के अनुकूल है। वर्तमान में यहाँ 10 रुपये में चार पानीपूरी और मात्र 20 रुपये में नाश्ते की प्लेट मिलती है। यही कारण है कि हर वर्ग के लोग यहाँ बेझिझक आते हैं।

## मेनू और बिक्री के आंकड़े
देवांगन चाट कॉर्नर के व्यंजनों में समोसा चाट, दही कचौड़ी, खस्ता और पानीपूरी मुख्य रूप से शामिल हैं। यहाँ की समोसा चाट पूरे बालोद में प्रसिद्ध है। संचालक के बेटे लक्की देवांगन ने साझा किया कि रोजाना लगभग 200 प्लेट समोसा, 150 प्लेट दही कचौड़ी और 150 प्लेट चाट की बिक्री होती है। बरसात के समय यह मांग और बढ़ जाती है। दुकान सुबह 11:30 बजे खुलती है और रात 10 बजे तक ग्राहकों की सेवा में निरंतर चलती रहती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** छोटी बचत से शुरू किए गए छोटे व्यवसाय भी कड़ी मेहनत और ईमानदारी से समाज में एक बड़ी पहचान और आजीविका का जरिया बन सकते हैं।

**बालोद में:** स्थानीय लोगों के लिए यह दुकान एक पसंदीदा किफायती भोजन स्थल बनी हुई है, जो बारिश के मौसम में समोसा चाट और दही कचौड़ी का आनंद प्रदान करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. देवांगन चाट कॉर्नर कहां स्थित है?
यह चाट सेंटर छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में बुधवारी बाजार स्थित गांधी भवन के पास स्थित है।

### 2. देवांगन चाट कॉर्नर की शुरुआत कितने रुपये से हुई थी?
इस दुकान की शुरुआत करीब 25 साल पहले मात्र 45 रुपये की पूंजी से हुई थी।

### 3. दुकान में कौन-कौन से व्यंजन मिलते हैं?
यहाँ समोसा चाट, दही कचौड़ी, खस्ता, पानीपूरी और तीन तरह की चाट उपलब्ध हैं।

### 4. दुकान का समय क्या है?
यह दुकान प्रतिदिन सुबह 11:30 बजे से रात 10 बजे तक खुली रहती है।

## प्रेरणा और सबक
**सफलता और सीख:**

- **आत्मनिर्भरता:** कठिन समय में दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद का काम शुरू करना सफलता की पहली सीढ़ी है।
- **धैर्य और मेहनत:** छोटे से निवेश से शुरू होने वाले काम में भी यदि लगातार मेहनत और लगन हो, तो वह एक दिन बड़ा व्यवसाय बन सकता है।
- **ग्राहकों का विश्वास:** व्यापार में ग्राहकों का भरोसा जीतना स्वाद के साथ-साथ सबसे बड़ी पूंजी है।
- **किफायती दृष्टिकोण:** हर वर्ग के ग्राहक को ध्यान में रखकर वाजिब दाम रखना लंबे समय तक टिके रहने का मंत्र है।

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