गौतम अदाणी फिर बने भारत के सबसे रईस कारोबारी, मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ा फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2026 में गौतम अदाणी 112.7 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ पहले स्थान पर पहुंचे, जबकि मुकेश अंबानी दूसरे पायदान पर खिसक गए हैं। भारतीय उद्योग जगत के अरबपतियों की संपत्ति के ताजा आकलन में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, गौतम अदाणी देश के सबसे धनी उद्योगपति बनकर उभरे हैं। पिछले बारह महीनों के दौरान अदाणी परिवार की कुल संपत्ति में 20.7 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये का जोरदार उछाल आया है। इस तेज बढ़त के दम पर उनकी समूची संपत्ति का आंकड़ा 112.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 10.81 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 8.5 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद देश के 100 सबसे रईस कारोबारियों की सम्मिलित दौलत करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के मजबूत स्तर को बनाए रखने में कामयाब रही है। शीर्ष स्थान पर गौतम अदाणी की वापसी और भविष्य की योजनाएं अदाणी परिवार ने एक बार फिर देश के सबसे अमीर घराने का दर्जा अपने नाम कर लिया है। हालांकि 112.7 बिलियन डॉलर की यह वर्तमान दौलत साल 2022 में दर्ज उनके 150 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से अब भी कुछ फासले पर है। समूह अब तेजी से अपने कारोबारी दायरे को नए आधुनिक क्षेत्रों में विस्तारित करने की ठोस रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में अदाणी समूह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में करीब 100 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम पूंजीगत निवेश करने की व्यापक तैयारी में जुटा हुआ है। दूसरे पायदान पर खिसके मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी इस नई रैंकिंग में दूसरे स्थान पर आ गए हैं। उनकी कुल निजी संपत्ति 86.3 बिलियन डॉलर आंकी गई है, जो पूर्ववर्ती मूल्यांकन की तुलना में 18.7 बिलियन डॉलर कम दर्ज की गई है। रिलायंस समूह के शेयरों में दिखी नरमी और खासकर रिटेल कारोबार में मार्जिन पर पड़े दबाव का प्रतिकूल असर उनकी कुल नेटवर्थ पर साफ नजर आया। इसके बावजूद समूह के लिए एक बड़ा सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आया है। अंबानी की प्रमुख दूरसंचार और डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स को अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए विनियामक मंजूरी मिल गई है। बाजार अनुमानों के अनुसार यह प्रस्तावित पब्लिक इश्यू लगभग 3.8 बिलियन डॉलर जुटाने की क्षमता रखता है, जो देश के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे विशाल IPO साबित हो सकता है। टॉप पांच में सावित्री जिंदल और लक्ष्मी मित्तल का दबदबा अरबपतियों की इस सूची में ओपी जिंदल समूह की सावित्री जिंदल 39.8 बिलियन डॉलर की नेटवर्थ के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हैं। वे पूरे भारत की सबसे अमीर महिला उद्योगपति का स्थान लगातार बरकरार रखे हुए हैं। चौथे क्रम पर दिग्गज इस्पात उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल मौजूद हैं, जिनकी निजी दौलत में 74 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगी है और यह बढ़कर 34.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। वहीं 32.9 बिलियन डॉलर की शुद्ध संपत्ति के साथ सुनील मित्तल और उनका परिवार पांचवें स्थान पर मजबूती से बना हुआ है। शीर्ष दस सबसे अमीर भारतीयों का ब्योरा देश के दस सर्वाधिक धनी कारोबारियों की कतार में कई अन्य जाने-माने उद्योगपति भी शामिल हैं। स्वास्थ्य और वैक्सीन क्षेत्र के दिग्गज साइरस पूनावाला 28.4 बिलियन डॉलर की पूंजी के साथ छठे स्थान पर हैं। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े शिव नाडर 27.4 बिलियन डॉलर की संपत्ति लेकर सातवें पायदान पर दर्ज हैं। इसके बाद फार्मास्युटिकल क्षेत्र के प्रमुख दिलीप सांघवी 26.3 बिलियन डॉलर की नेटवर्थ के साथ आठवें, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला 23.2 बिलियन डॉलर के साथ नौवें और हिंदुजा परिवार 21.2 बिलियन डॉलर की सम्मिलित संपत्ति के साथ दसवें स्थान पर है। तकनीकी मंदी और कई दिग्गजों की संपत्ति में गिरावट रिपोर्ट के समग्र आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि सौ धनवानों की इस फेहरिस्त में शामिल आधे से अधिक उद्योगपतियों की संपत्ति में पिछले साल के मुकाबले कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से कार्यस्थलों और सॉफ्टवेयर सेवाओं में तेजी से बढ़ रहे AI आधारित ऑटोमेशन के चलते पारंपरिक भारतीय IT सेक्टर दबाव के दौर से गुजर रहा है। इसका सीधा नुकसान तकनीकी क्षेत्र के संस्थापकों को उठाना पड़ा है। शिव नाडर, अजीम प्रेमजी और एन.आर. नारायण मूर्ति जैसे प्रमुख आईटी दिग्गजों की दौलत में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई। बदलते आर्थिक माहौल का असर प्रवेश सीमा पर भी दिखा है, जहां सूची में जगह बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम नेटवर्थ का पैमाना पिछले साल के 3.2 बिलियन डॉलर से घटकर 3 बिलियन डॉलर रह गया, यद्यपि कुछ नए उद्योगपतियों ने पहली बार इसमें अपनी जगह बनाई है। इसका आप पर असर देश के शीर्ष उद्योगपतियों की संपत्ति और निवेश प्राथमिकताओं में हो रहे बदलाव भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों और अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करते हैं। • शेयर बाजार के निवेशकों के लिए: अदाणी समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव लाखों खुदरा निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर डालता है। खासकर जियो प्लेटफॉर्म्स के 3.8 बिलियन डॉलर के आगामी IPO में आम निवेशकों को देश के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में हिस्सेदारी खरीदने का सीधा मौका मिल सकता है। • तकनीकी और IT क्षेत्र के पेशेवरों के लिए: सॉफ्टवेयर क्षेत्र में AI ऑटोमेशन के दबाव से दिग्गज कंपनियों के वैल्यूएशन और वेल्थ में गिरावट दर्ज हुई है। इससे आने वाले समय में IT कंपनियों में हायरिंग के रुझान और नए कौशल की मांग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। • उद्योग और रोजगार निर्माण: अदाणी समूह द्वारा AI इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 बिलियन डॉलर निवेश की योजना से बुनियादी ढांचे के निर्माण में गति आएगी। इस तरह के विशाल पूंजीगत खर्च से देश में डेटा सेंटर्स और नई तकनीक के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उच्च-कुशल रोजगार तैयार होंगे। • रुपये और घरेलू बचत पर असर: डॉलर के मुकाबले रुपये में 8.5% की गिरावट से विदेशों से आयातित वस्तुओं की लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारतीय अरबपतियों की संपत्ति का 1 ट्रिलियन डॉलर पर टिके रहना घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती को दर्शाता है। ऐसा क्यों हुआ अमीरों की इस नई रैंकिंग में बदलाव विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के बदलते वित्तीय प्रदर्शन, तकनीकी विकास और बाजार की परिस्थितियों के कारण हुआ है। • अदाणी समूह की पूंजीगत वापसी: पिछले एक साल में अदाणी समूह की कंपनियों के वैल्यूएशन में लगातार सुधार दर्ज किया गया, जिससे उनकी संपत्ति 20.7 बिलियन डॉलर बढ़ी। इसके साथ ही समूह द्वारा नए इंफ्रास्ट्रक्चर और आगामी AI प्रोजेक्ट्स पर फोकस बढ़ाने से बाजार का भरोसा मजबूत हुआ। • रिलायंस के मार्जिन पर दबाव: रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिटेल डिवीजन में मार्जिन पर पड़े वित्तीय दबाव के कारण मुकेश अंबानी की दौलत में 18.7 बिलियन डॉलर की कमी आई। इसके अलावा शेयर बाजार में समूह के शेयरों में आई नरमी ने उनकी कुल रैंकिंग को प्रभावित किया। • IT सेक्टर में ऑटोमेशन का प्रभाव: जनरेटिव और ऑटोमेटेड AI तकनीकों के प्रसार ने भारतीय आईटी और सॉफ्टवेयर सेवा कंपनियों की परंपरागत आय वृद्धि को धीमा किया। इसी कारण सूची में शामिल आधे से अधिक धनकुबेरों, विशेषकर शिव नाडर और अजीम प्रेमजी जैसे टेक संस्थापकों की निजी संपत्ति घटी। • मुद्रा अवमूल्यन और न्यूनतम सीमा में गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 8.5% की गिरावट ने डॉलर के संदर्भ में कई अरबपतियों के मूल्यांकन को कम किया। इसी आर्थिक नरमी के चलते 100 सबसे अमीर भारतीयों की सूची में प्रवेश करने की न्यूनतम सीमा 3.2 बिलियन डॉलर से घटकर 3 बिलियन डॉलर रह गई। सवाल-जवाब 1. फोर्ब्स इंडिया रिच लिस्ट 2026 में भारत का सबसे अमीर व्यक्ति कौन बना है? गौतम अदाणी 112.7 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। 2. मुकेश अंबानी की नेटवर्थ इस साल कितनी आंकी गई है? मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 86.3 बिलियन डॉलर आंकी गई है, जो पिछले आकलन से 18.7 बिलियन डॉलर कम है। 3. भारत की सबसे अमीर महिला कारोबारी कौन हैं? ओपी जिंदल समूह की सावित्री जिंदल 39.8 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ देश की सबसे अमीर महिला बनी हुई हैं। 4. अदाणी समूह AI इंफ्रास्ट्रक्चर में कितना निवेश करने की योजना बना रहा है? अदाणी ग्रुप आधुनिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में करीब 100 बिलियन डॉलर निवेश करने की तैयारी में है। 5. जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी IPO का आकार कितना हो सकता है? जियो प्लेटफॉर्म्स को विनियामक मंजूरी मिल चुकी है और यह IPO लगभग 3.8 बिलियन डॉलर जुटा सकता है। 6. इस साल रिच लिस्ट में शामिल होने के लिए न्यूनतम कट-ऑफ क्या रहा? सूची में जगह बनाने के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा घटकर 3 बिलियन डॉलर रह गई, जो पिछले साल 3.2 बिलियन डॉलर थी। https://trendkia.com/business/gautam-adani-phira-bane-bharata-ke-sabase-raisa-karobari-mukesh-ambani-ko-pichhe-chhora-40957 TrendKia — Har trend, sabse pehle.