गाय और भैंस का दूध निकालते वक्त न दोहराएं ये भूल, 45 साल के अनुभवी बसंत लाल से जानिए सही तरीका चित्रकूट के अनुभवी दूधिया बसंत लाल ने गाय और भैंस का दूध निकालने के सही तरीकों और जरूरी सावधानियों के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। पशुपालन ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक प्रमुख साधन साबित होता है। देश के गांवों में बड़ी संख्या में लोग गाय और भैंस पालकर अपना जीवनयापन करते हैं। हालांकि, जो लोग इस क्षेत्र में नए होते हैं, उन्हें अक्सर दुग्ध दोहन के समय कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूध निकालते समय की जाने वाली जरा सी चूक भी मवेशियों के स्वास्थ्य, दूध की शुद्धता और कुल उत्पादन पर बुरा असर डाल सकती है। यही कारण है कि दूध निकालने के वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों तरीकों की सही जानकारी होना हर पशुपालक के लिए बेहद आवश्यक हो जाता है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में पिछले 45 वर्षों से दूध का कारोबार कर रहे बसंत लाल ने बातचीत के दौरान दुग्ध दोहन की सही प्रक्रिया साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दूध निकालने की प्रक्रिया शुरू करने से ठीक पहले पशुपालक को अपने हाथ साबुन से भली-भांति धो लेने चाहिए। इसके अलावा, जिस बर्तन में दूध एकत्रित किया जा रहा है, वह भी पूरी तरह साफ और सूखा होना अनिवार्य है। यदि गंदे हाथों या अस्वच्छ बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है, तो दूध में हानिकारक बैक्टीरिया के पहुंचने का खतरा काफी बढ़ जाता है, जिससे दूध बहुत जल्दी खराब हो सकता है। बसंत लाल के अनुसार, मवेशी का दूध निकालने से पहले उसे भरपेट चारा खिलाया जाना चाहिए और दुलारकर अपने नजदीक लाना चाहिए। दुग्ध दोहन से पूर्व पशु के थनों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना और फिर एक स्वच्छ कपड़े से उन्हें पूरी तरह सुखाना बहुत जरूरी है। यदि थनों पर किसी भी प्रकार की मिट्टी, गोबर या अन्य अशुद्धियां लगी हैं, तो बिना साफ किए कभी भी दूध नहीं निकालना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पशुपालकों को हर दिन एक ही निश्चित समय पर दूध निकालने का अभ्यास करना चाहिए। दूध निकालते समय आसपास का माहौल पूरी तरह शांत रहना चाहिए ताकि मवेशी को किसी प्रकार की असहजता न हो। आवश्यकता पड़ने पर बछड़े या कटड़े को उसकी मां के पास छोड़ना भी पशु को शांत रखने में काफी मददगार साबित हो सकता है। अनुभवी बसंत लाल बताते हैं कि दूध निकालते वक्त थनों पर बहुत ज्यादा बल प्रयोग करने या उन्हें जोर से खींचने तथा दबाने से हमेशा बचना चाहिए। हाथों से थन को उचित ढंग से पकड़कर बहुत ही आराम से और धीरे-धीरे दूध बाहर निकालना चाहिए। मवेशी के थनों के आकार और उनकी शारीरिक स्थिति के मुताबिक हाथ की पकड़ बेहद सहज होनी चाहिए, जिससे जानवर को किसी भी प्रकार की चोट या शारीरिक दर्द का सामना न करना पड़े। उनके मुताबिक, एक स्वस्थ गाय या भैंस का पूरा दूध निकालने में आमतौर पर 15 से 20 मिनट का समय लग सकता है। उचित साफ-सफाई, तय समय की नियमितता और पूरी सावधानी के साथ दूध दुहने से दूध की स्वच्छता और गुणवत्ता दोनों को लंबे समय तक बरकरार रखने में बहुत मदद मिलती है। नए पशुपालकों को हमेशा सलाह दी जाती है कि वे दूध निकालने की उचित तकनीक किसी जानकार और अनुभवी व्यक्ति से सीखें, ताकि मवेशी को किसी प्रकार की तकलीफ न हो और दूध की बेहतरीन गुणवत्ता भी सुरक्षित रह सके। इसका आप पर असर दूध दुहने के दौरान बरती जाने वाली ये सावधानियां सीधे तौर पर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की शुद्धता को प्रभावित करती हैं। • पशु स्वास्थ्य पर असर: गलत तरीके से दूध निकालने या थनों पर जोर डालने से मवेशी को दर्द और चोट लग सकती है, जिससे उसकी सेहत बिगड़ सकती है। • दूध की गुणवत्ता: साफ हाथों और बर्तनों का इस्तेमाल करने से दूध में बैक्टीरिया नहीं पहुंचते, जिससे दूध लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। • उत्पादन में सुधार: रोजाना एक ही समय पर दूध निकालने और शांत वातावरण बनाए रखने से पशु तनावमुक्त रहता है और दूध का उत्पादन बेहतर होता है। • नियमित अभ्यास: नए पशुपालकों को अनुभवी लोगों से सही तकनीक सीखने से मवेशी को संभालने में आसानी होती है। ऐसा क्यों हुआ दूध निकालने के पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना पशुओं के शारीरिक स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादकता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। गलत पद्धतियों से पशुओं को नुकसान पहुंच सकता है। • संक्रमण का खतरा: गंदे हाथों या बर्तनों के इस्तेमाल से बैक्टीरिया पनपते हैं जो दूध को दूषित कर सकते हैं। • शारीरिक तनाव: थनों को जोर से खींचने या गलत ढंग से पकड़ने से पशु को दर्द होता है जिससे दूध का उतरना प्रभावित होता है। • नियमितता का महत्व: निश्चित समय पर दोहन न करने से पशु का शरीर असहज हो जाता है और उत्पादन घट सकता है। सवाल-जवाब 1. दूध निकालने से पहले हाथ क्यों धोने चाहिए? गंदे हाथों से दूध में बैक्टीरिया पहुंच सकते हैं जिससे दूध जल्दी खराब हो जाता है। 2. दूध दुहने में कितना समय लगता है? एक गाय या भैंस का दूध निकालने में आमतौर पर 15 से 20 मिनट का समय लगता है। 3. बसंत लाल कितने वर्षों से दूधिया का काम कर रहे हैं? बसंत लाल पिछले 45 साल से चित्रकूट में दूधिया का काम कर रहे हैं। 4. थनों की सफाई क्यों जरूरी है? थनों पर लगी मिट्टी और गंदगी को साफ करने से दूध में अशुद्धियां नहीं जाती हैं। 5. पशु को शांत रखने के लिए क्या करना चाहिए? दूध निकालते समय आसपास का वातावरण शांत रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बछड़े को पास रखना चाहिए। https://trendkia.com/business/gaya-aura-bhainsa-ka-dudha-nikalate-vakta-na-doharaen-ye-bhula-45-sala-ke-anubhavi-basant-lal-se-janie-sahi-tarika-47160 TrendKia — Har trend, sabse pehle.