# जर्मन उद्योगपतियों से बातचीत के बाद पीयूष गोयल ने भारत को मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का नया ग्लोबल हब बताया

> बर्लिन दौरे के समापन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जर्मनी की दिग्गज कंपनियां भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि विनिर्माण और आरएंडडी के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/german-udyogapatiyon-se-batachita-ke-bada-piyush-goyal-ne-bharata-ko-mainyuphaikcharinga-aura-inoveshana-ka-naya-globala-haba-bata-51414 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीयूष गोयल, भारत जर्मनी व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग, बर्लिन ग्लोबल डायलॉग, विदेशी निवेश, आरएंडडी

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी की दो दिवसीय यात्रा समाप्त करते हुए भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिदृश्य में जर्मन कंपनियां भारत को अब केवल सामान बेचने की जगह के रूप में नहीं देख रही हैं। इसके बजाय, भारत को विनिर्माण, शोध और नवप्रवर्तन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैश्विक आधार माना जा रहा है।

## जर्मन कॉरपोरेट जगत की सोच में बड़ा बदलाव
बर्लिन में उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहा है। सीमेंस हेल्थकेयर, बर्टेल्समैन इन्वेस्टमेंट, फॉक्सवैगन और स्कोडा जैसी प्रमुख कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। इन वार्ताओं के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि भारत अब जर्मन उद्योगों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार बन चुका है।

वर्तमान में लगभग 2000 जर्मन कंपनियां भारत के अलग-अलग हिस्सों में सफलतापूर्वक अपना कामकाज संभाल रही हैं। इन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने संवाद के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत में शोध और विकास गतिविधियों को विस्तार देना उनकी प्राथमिकता है। दोनों देशों के बीच बढ़ती यह नजदीकियां वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के साथ प्रतिभा, नवाचार, सह-डिजाइनिंग और सह-उत्पादन के नए अवसरों का निर्माण कर रही हैं।

## लागत नियंत्रण और भारतीय प्रतिभा का लाभ
जर्मनी के विनिर्माण क्षेत्र के सामने इस समय उत्पादन लागत में कटौती करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। पीयूष गोयल ने कहा कि लागत कम करने की इसी जरूरत के कारण जर्मन उद्योग भारत में बड़े पैमाने पर विनिर्माण क्षमता स्थापित करने में गहरी रुचि ले रहे हैं। इसके अलावा जर्मनी की तकनीक और डिजाइन क्षमता को भारत की युवा श्रम शक्ति का मजबूत सहयोग मिल रहा है।

जर्मनी की व्यावसायिक इकाइयां भारत में पहले से संचालित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की सफलता को स्वीकार कर रही हैं। इन केंद्रों में लाखों कुशल भारतीय युवा विभिन्न तकनीकी और प्रबंधकीय भूमिकाओं में काम कर रहे हैं। मंत्री ने बताया कि जर्मन कंपनियां इन केंद्रों के माध्यम से अपने अंतरराष्ट्रीय संचालन को अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बना रही हैं।

## हरित ऊर्जा और स्थिर कारोबारी माहौल
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यूरोपीय देश भारत के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन, वित्तीय मदद और टिकाऊ विकास से जुड़ी योजनाओं में भारत को मुख्य साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग के दौरान वैश्विक निवेशकों को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने भारत के पारदर्शी और विश्वसनीय व्यापारिक तंत्र का खाका पेश किया।

उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिया कि विश्व भर में फैली अनिश्चितता और खंडित माहौल के बीच भारत एक स्थिर नीतिगत ढांचा और समान अवसर प्रदान करता है। भारत में पूंजी निवेश करने वाले कारोबारियों को उस तरह की उथल-पुथल का सामना नहीं करना पड़ता जो अन्य कई बाजारों में देखने को मिलती है।

## इसका आप पर असर
जर्मनी और भारत के बीच गहराते आर्थिक संबंधों से भारतीय युवाओं के लिए रोजगार और उच्च तकनीकी कौशल के कई नए अवसर पैदा होंगे।

- **भारत में:** जर्मन कंपनियों के विस्तार से देश में नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित होंगे और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में बड़ा निवेश आएगा। इससे घरेलू औद्योगिक क्षमता मजबूत होगी और निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
- **तकनीकी युवाओं के लिए:** ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और आरएंडडी हब के विस्तार से लाखों इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को देश में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की नौकरियां मिलेंगी। इससे उच्च कुशल प्रतिभाओं को विदेश जाने के बजाय देश में ही काम करने का बेहतर माहौल मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
जर्मन कंपनियां वैश्विक बाजारों में बढ़ती लागत और कठिन प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए भारत में अपनी उपस्थिति तेजी से बढ़ा रही हैं।

- **उत्पादन लागत में कटौती:** यूरोप में बढ़ती ऊर्जा और संचालन लागत के कारण जर्मन उद्योगों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए किफायती और कुशल विनिर्माण आधार की आवश्यकता थी।
- **कुशल कार्यबल की उपलब्धता:** भारत में बड़ी संख्या में मौजूद इंजीनियरिंग और आईटी पेशेवरों के कारण जर्मन कंपनियां यहाँ आरएंडडी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स स्थापित कर रही हैं।
- **स्थिर नीतिगत माहौल:** वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत एक पारदर्शी और अनुमानित व्यावसायिक माहौल प्रदान करता है जो विदेशी निवेशकों को आकर्षित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. पीयूष गोयल ने जर्मनी में किस सम्मेलन में भाग लिया?
उन्होंने बर्लिन में आयोजित बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में भाग लिया और वैश्विक निवेशकों को संबोधित किया।

### 2. वर्तमान में जर्मनी की कितनी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं?
वर्तमान में लगभग 2000 जर्मन कंपनियां भारत में अपना संचालन कर रही हैं।

### 3. जर्मन कंपनियां भारत को किस रूप में देख रही हैं?
जर्मन कंपनियां भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, आरएंडडी, इनोवेशन और रणनीतिक साझेदारी के केंद्र के रूप में देख रही हैं।

### 4. किन-किन प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से वाणिज्य मंत्री ने बातचीत की?
उन्होंने सीमेंस हेल्थकेयर, बर्टेल्समैन इन्वेस्टमेंट, फॉक्सवैगन और स्कोडा जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

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