घरेलू खपत और आयात से उछली जीएसटी वसूली, जुलाई में 15.4% बढ़कर 2,11,205 करोड़ रुपये जुलाई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 15.4 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। घरेलू लेनदेन और आयात से बढ़ी टैक्स आमदनी इस उछाल की बड़ी वजह रही। देश के सरकारी खजाने में जुलाई के दौरान जीएसटी से जबरदस्त कमाई हुई। ग्रॉस गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन इस महीने 15.4 प्रतिशत बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया। घरेलू लेनदेन और आयात, दोनों मोर्चों पर पहले के मुकाबले ज्यादा टैक्स आने की वजह से वसूली में यह उछाल देखने को मिला। सरकार की ओर से ये आंकड़े शनिवार को जारी किए गए। तुलना करें तो पिछले साल जुलाई में देश का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा था, जबकि इसी साल जून में यह करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये था। यानी सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि पिछले महीने के मुकाबले भी सरकार की टैक्स आमदनी में इजाफा हुआ है। किस टैक्स से कितनी कमाई वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में कुल जीएसटी कलेक्शन 2,11,205 करोड़ रुपये रहा। इसमें सेंट्रल जीएसटी (CGST) से 39,835 करोड़ रुपये और स्टेट जीएसटी (SGST) से 47,881 करोड़ रुपये आए। सबसे बड़ा हिस्सा इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का रहा, जिससे 1.23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हुई। इसी दौरान टैक्स रिफंड भी 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। रिफंड घटाने के बाद नेट जीएसटी रेवेन्यू 1.81 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा। अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम. एस. मणि का कहना है कि बाहरी माहौल की तमाम चुनौतियों के बीच भी यह वसूली अर्थव्यवस्था की लगातार बनी मजबूती को दिखाती है। उनके मुताबिक घरेलू खपत पर हर महीने जीएसटी में स्थिर बढ़ोतरी इस बात का सबूत है कि देश की कुल खपत अब मौसमी उतार-चढ़ाव और बाहरी झटकों से काफी हद तक अछूती होती जा रही है। मणि ने यह भी बताया कि इस बार जुलाई में महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग राज्यों में वसूली बढ़ी है, जो इन इलाकों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार का इशारा देती है। बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा आयात से केपीएमजी में इनडायरेक्ट टैक्स के चीफ और पार्टनर अभिषेक जैन ने इस ग्रोथ की एक अहम बारीकी की तरफ इशारा किया। उनका कहना है कि जुलाई में जीएसटी रेवेन्यू में हुई बढ़ोतरी का ज्यादातर हिस्सा आयात से आया है। जैन के मुताबिक अब यह देखना जरूरी होगा कि आयात हुआ सामान तैयार माल है या कच्चा माल, और इस बढ़ोतरी का कितना हिस्सा असल में ज्यादा खरीद की बजाय सिर्फ कमजोर होते रुपये को दर्शा रहा है। कुल मिलाकर, लगातार बढ़ता जीएसटी कलेक्शन सरकार की आमदनी के लिहाज से राहत की खबर है, लेकिन जानकार यह भी साफ कर रहे हैं कि इस तेजी की असली तस्वीर समझने के लिए यह देखना होगा कि बढ़ोतरी घरेलू मांग से आ रही है या रुपये की कमजोरी और आयात के आंकड़ों से। इसका आप पर असर • भारत में: जीएसटी वसूली बढ़ने का मतलब है कि सरकार के पास सड़क, स्कूल और कल्याणकारी योजनाओं जैसे कामों पर खर्च के लिए ज्यादा पैसा आ रहा है। • कारोबारियों के लिए: महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे मैन्युफैक्चरिंग राज्यों में बढ़ी वसूली मांग और उत्पादन में तेजी का संकेत देती है। • खरीदारों के लिए: आयात से आई ज्यादा वसूली में कुछ हिस्सा कमजोर रुपये का है, जिससे आगे आयातित सामान की कीमतों पर असर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. जुलाई में कुल जीएसटी कलेक्शन कितना रहा? जुलाई में कुल जीएसटी कलेक्शन 2,11,205 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल जुलाई के मुकाबले 15.4 प्रतिशत ज्यादा है। 2. पिछले साल जुलाई और इस साल जून में कलेक्शन कितना था? पिछले साल जुलाई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपये और इस साल जून में करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये था। 3. CGST, SGST और IGST से कितनी वसूली हुई? CGST से 39,835 करोड़ रुपये, SGST से 47,881 करोड़ रुपये और IGST से 1.23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हुई। 4. नेट जीएसटी रेवेन्यू कितना रहा? रिफंड घटाने के बाद नेट जीएसटी रेवेन्यू 1.81 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा, जबकि टैक्स रिफंड 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29,968 करोड़ रुपये रहा। 5. बढ़ोतरी की मुख्य वजह क्या रही? घरेलू लेनदेन के साथ आयात से बढ़ी टैक्स आमदनी इसकी वजह रही, और जानकारों के मुताबिक ग्रोथ का ज्यादातर हिस्सा आयात से आया। 6. किन राज्यों में वसूली में बढ़ोतरी दिखी? महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग राज्यों में जीएसटी वसूली बढ़ी। https://trendkia.com/business/gharelu-khapata-aura-ayata-se-uchhali-jiesati-vasuli-julai-men-15-4-barhakara-2-11-205-karora-rupaye-12766 TrendKia — Har trend, sabse pehle.