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  "title": "गोंडा के किसान अखिलेश ने मचान विधि से शुरू की कद्दू की खेती, कमाई जानकर दंग रह जाएंगे आप",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक किसान अखिलेश कुमार मौर्य ने मचान तकनीक अपनाकर कद्दू की खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। पांचवीं पास इस किसान की कहानी अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बनी है।",
  "content": "गोंडा जिले के रहने वाले एक प्रगतिशील किसान ने खेती के पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर मचान विधि को अपनाया है, जिससे न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता में सुधार आया है बल्कि आमदनी भी कई गुना बढ़ गई है। गोंडा के रहने वाले अखिलेश कुमार मौर्य ने जब से अपने खेतों में मचान बनाकर कद्दू की बेलों को ऊपर चढ़ाना शुरू किया है, तब से उन्हें बाजार में अपनी उपज के लिए काफी बेहतर दाम मिलने लगे हैं। इस नई पद्धति में कद्दू के फल जमीन को नहीं छूते, जिससे वे सड़ने से बचे रहते हैं और उनकी चमक बनी रहती है।\n\nशिक्षा के बाद किसानी का चुनाव\nअखिलेश कुमार मौर्य की पढ़ाई-लिखाई केवल पांचवीं कक्षा तक ही हुई है। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और उन्होंने खेती को ही अपनी आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। आज वे अपनी मेहनत के दम पर एक से डेढ़ बीघा जमीन पर मचान विधि के जरिए कद्दू उपजा रहे हैं। अखिलेश बताते हैं कि आर्थिक तंगी के दौर में खेती से जुड़ी नई तकनीकें अपनाना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण लेकिन सही फैसला साबित हुआ है, जिसने उनके जीवन स्तर को बदलने में मदद की है।\n\nलागत और मुनाफे का गणित\nमचान तकनीक के आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए अखिलेश ने बताया कि एक से डेढ़ बीघा खेत में मचान तैयार करने में शुरुआती तौर पर लगभग 4 हजार से 5 हजार रुपये का खर्च आता है। वहीं, अगर फसल के उत्पादन की बात करें तो उन्हें इस खेती से 40 हजार से 50 हजार रुपये तक की कुल आय होने की उम्मीद है। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि कमाई का यह आंकड़ा पूरी तरह से बाजार में चल रहे भाव पर निर्भर करता है, जो घट-बढ़ सकता है।\n\nमचान विधि के फायदे\nइस आधुनिक तकनीक के लाभ गिनाते हुए किसान अखिलेश बताते हैं कि मचान पर बेल होने की वजह से पौधे के हर हिस्से तक पर्याप्त धूप और हवा पहुंचती है। इससे कद्दू की बेलों में लगने वाले रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी घटता है। फल जमीन से ऊपर होने के कारण वे पूरी तरह साफ-सुथरे रहते हैं और उन्हें तोड़ना भी काफी आसान हो जाता है। शुरुआत में मचान का ढांचा तैयार करने में जो खर्च आता है, वह एक बार का निवेश होता है क्योंकि इस मचान का इस्तेमाल कई मौसमों तक किया जा सकता है। अखिलेश का मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों का तालमेल बिठाकर कोई भी किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: कृषि में नई तकनीकों और मचान जैसे तरीकों को अपनाकर छोटे किसान अपनी फसल की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाली कीमतों को बढ़ा सकते हैं।\n\nगोंडा में: स्थानीय किसान अखिलेश कुमार मौर्य की सफलता से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी कम जमीन में अधिक मुनाफे वाली आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मचान विधि से कद्दू की खेती करने में कुल कितनी लागत आती है?\nएक से डेढ़ बीघा खेत में मचान तैयार करने में शुरुआती तौर पर लगभग 4 से 5 हजार रुपये का खर्च आता है।\n\n2. इस विधि से किसान को कितना मुनाफा होने की उम्मीद है?\nइस तकनीक से एक से डेढ़ बीघा कद्दू की खेती में लगभग 40 से 50 हजार रुपये तक की आय होने की उम्मीद है।\n\n3. मचान विधि के मुख्य फायदे क्या हैं?\nमचान विधि से फसल में हवा और धूप अच्छी तरह पहुंचती है, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है, फल साफ रहते हैं और तुड़ाई आसान हो जाती है।\n\n4. क्या मचान बार-बार बनाना पड़ता है?\nनहीं, मचान का ढांचा एक बार तैयार करने के बाद इसे कई सीजन तक इस्तेमाल किया जा सकता है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• तकनीकी अपनाएं: पारंपरिक तरीकों की सीमाओं को समझकर उनमें बदलाव करने से लाभ बढ़ सकता है।\n• सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग: अखिलेश ने कम शिक्षा और सीमित पूंजी के बावजूद नई विधि से बड़ा मुनाफा कमाया।\n• एक बार का निवेश, लंबे समय का लाभ: मचान का ढांचा एक बार के खर्च के बाद कई सीजन तक कमाई का जरिया बन सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/gonda-ke-kisana-akhilesh-ne-machana-vidhi-se-shuru-ki-kaddu-ki-kheti-kamai-janakara-dnga-raha-jaenge-apa-6521",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-10",
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