गोंडा के किसान पेशकार सिंह की सलाह: केला लगाने के बाद ये चार काम बढ़ाएंगे पैदावार गोंडा जिले के एक प्रगतिशील किसान ने बताया कि केला रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई-जल निकासी से लेकर खरपतवार हटाने और कीट नियंत्रण तक कौन सी चार बातों का ध्यान रखने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है. गोंडा जिले में केला किसानों के लिए एक भरोसेमंद नकदी फसल बन चुका है, जो कम समय में भी अच्छी कमाई करा देता है. लेकिन अनुभवी किसानों का कहना है कि रोपाई के तुरंत बाद का समय फसल के लिए सबसे नाजुक दौर होता है. इस दौरान जरा सी लापरवाही पौधों की बढ़वार रोक सकती है और आगे चलकर उत्पादन घटा सकती है, जबकि शुरुआत में ही कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने से पूरी फसल आसानी से सुरक्षित रह सकती है. सबसे पहले पानी का सही प्रबंधन गोंडा के प्रगतिशील किसान पेशकार सिंह का कहना है कि केले की रोपाई के तुरंत बाद खेत में जरूरत भर नमी बनाए रखना सबसे अहम काम है. पौधों को उतना ही पानी दें जितनी उन्हें वाकई जरूरत है, ज्यादा पानी देने से बचें. खेत में पानी भर जाने पर जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है, जिससे पौधे जल्दी खराब होने लगते हैं, इसलिए खेत में जल निकासी की सही व्यवस्था भी होनी चाहिए. सिंह बताते हैं कि जिन किसानों के पास ड्रिप सिस्टम है, उनके लिए यह और भी फायदेमंद है, क्योंकि केले की बागवानी में ड्रिप सिस्टम काफी कारगर साबित होता है. खरपतवार पर लगातार नजर पेशकार सिंह के मुताबिक रोपाई के बाद खेत की नियमित सफाई करना भी उतना ही जरूरी है. समय-समय पर खरपतवार हटाते रहना चाहिए, क्योंकि घास-फूस बढ़ने पर पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता और वे उसी के लिए संघर्ष करते रह जाते हैं. इसका सीधा असर पौधों की बढ़वार पर तो पड़ता ही है, साथ ही फल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. संतुलित खाद और समय पर कीट नियंत्रण पेशकार सिंह की सलाह है कि किसान खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल सही समय पर और संतुलित मात्रा में ही करें. उन्होंने यह भी कहा कि अगर पौधों पर किसी बीमारी या कीट का हमला दिखे तो तुरंत किसी कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही दवा का छिड़काव करना चाहिए. ऐसा करने से नुकसान कम से कम होता है और फसल पूरी तरह सुरक्षित बनी रहती है. 25 साल के अनुभव से निकली सीख पेशकार सिंह बताते हैं कि वह पिछले 25 वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं, और उनकी यह सारी सलाह उसी लंबे अनुभव से निकलकर आई है. उनका मानना है कि किसान अगर शुरुआत से ही फसल की सही देखभाल करें, न कि समस्या आने के बाद, तो नतीजे बेहतर मिलते हैं. सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, खाद प्रबंधन और रोग-कीट नियंत्रण, इन चारों बातों पर एक साथ ध्यान दिया जाए तो केले की फसल से अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा आसानी से हासिल किया जा सकता है. पेशकार सिंह यह भी बताते हैं कि जो भी किसान भाई केले की खेती शुरू करना चाहते हैं, उन्हें वह अपनी जानकारी साझा करते हैं. साथ ही, जब कोई किसान उन्हें बुलाता है तो वह खुद उसके खेत पर भी जाकर देखते हैं. इसका आप पर असर • देश भर में: जो किसान केले की खेती करते हैं, वे रोपाई के बाद सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, खाद प्रबंधन और कीट नियंत्रण से जुड़ी इन बातों को अपनाकर बढ़वार बेहतर कर सकते हैं और उत्पादन घटने का खतरा कम कर सकते हैं. • गोंडा में: गोंडा जिले के केला किसान पेशकार सिंह जैसे अनुभवी किसानों से सीधे जानकारी और मदद ले सकते हैं, क्योंकि वह जरूरत पड़ने पर खुद किसानों के खेत पर जाकर सलाह देते हैं. सवाल-जवाब 1. केले की रोपाई के तुरंत बाद सबसे जरूरी काम क्या है? खेत में जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखना और पानी का सही प्रबंधन करना सबसे जरूरी है. 2. ज्यादा पानी देने से क्या नुकसान होता है? खेत में पानी भर जाने पर जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है, जिससे पौधे खराब होने लगते हैं. 3. केले की बागवानी के लिए कौन सी सिंचाई व्यवस्था फायदेमंद बताई गई है? ड्रिप सिस्टम केले की बागवानी के लिए काफी कारगर बताया गया है. 4. खरपतवार न हटाने से पौधों पर क्या असर पड़ता है? खरपतवार बढ़ने से पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिससे बढ़वार और फल की गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. 5. पौधों पर बीमारी या कीट दिखने पर किसान को क्या करना चाहिए? तुरंत किसी कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही दवा का छिड़काव करना चाहिए. 6. पेशकार सिंह कितने सालों से केले की खेती कर रहे हैं? वह पिछले 25 वर्षों से केले की खेती कर रहे हैं. https://trendkia.com/business/gonda-ke-kisana-peshkar-singh-ki-salaha-kela-lagane-ke-bada-ye-chara-kama-barhaenge-paidavara-13398 TrendKia — Har trend, sabse pehle.