# गोंडा के संजय मौर्य ने आईटीआई के बाद खेती से बदली किस्मत, भिंडी उगाकर कमा रहे हैं तगड़ा मुनाफा

> उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक युवा ने नौकरी न मिलने पर खेती का रुख किया और आज आधुनिक तरीके से भिंडी उगाकर बंपर कमाई कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/gonda-ke-sanjay-maurya-ne-iti-ke-baad-kheti-se-badli-kismat-bhindi-ugakar-kama-rahe-hain-tagda-munafa-10839 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोंडा खेती, संजय मौर्य, भिंडी की खेती, आधुनिक कृषि, युवा किसान, रुपईडीह गोंडा, सब्जी उत्पादन

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड रुपईडीह के एक युवक ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी जब मनमुताबिक रोजगार नहीं मिला, तो उन्होंने पारंपरिक व्यवस्था के आगे घुटने टेकने के बजाय खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया। आज वह भिंडी की बंपर पैदावार लेकर हर साल अच्छी खासी रकम कमा रहे हैं और अपने इलाके के अन्य किसानों के लिए एक मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं।

## युवा किसान की जुबानी, संघर्ष से सफलता तक का सफर
प्रगतिशील किसान संजय मौर्य ने साझा किया कि रोजगार की तलाश में उन्होंने काफी वक्त गंवाया, लेकिन हाथ निराशा ही लगी। आखिरकार परिवारजनों के सुझाव पर उन्होंने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बागवानी और सब्जियों की खेती में उतरने का मानस बनाया। शुरुआत में छोटे भूभाग पर हाथ आजमाया गया, लेकिन जब उपज शानदार रही और बाजार में भाव भी अच्छे मिले, तो खेती के दायरे को साल-दर-साल बढ़ाया गया।

## तकनीक और सूझबूझ से खेती को बनाया आसान
आईटीआई डिप्लोमा धारक संजय मौर्य ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद जब नौकरी के रास्ते बंद दिखे, तो उन्होंने किसानी की तरफ कदम बढ़ाए। वर्तमान में वह करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन पर भिंडी की फसल ले रहे हैं। उन्हें यह विचार यूट्यूब वीडियोज देखने और आसपास के तजुर्बेकार किसानों से चर्चा करने के बाद सूझा। पहले वे पारंपरिक तौर-तरीकों से खेती करते थे, लेकिन अब उन्होंने बेड विधि को अपना लिया है। इस उन्नत तकनीक से सिंचाई करने और फसल की निराई-गुड़ाई करने में बहुत आसानी होती है, क्योंकि क्यारियों के बीच में पर्याप्त खाली जगह छोड़ी जाती है।

## लागत कम, मुनाफा बंपर और बलरामपुर मंडी में सप्लाई
संजय मौर्य के अनुसार, एक से डेढ़ बीघा के रकबे में लगभग आठ से दस हजार रुपये की कुल लागत आती है। इसके बदले में उन्हें वर्तमान समय में साठ से सत्तर हजार रुपये तक की शुद्ध आमदनी हो रही है, हालांकि यह मुनाफा बाजार के उतार-चढ़ाव और तय होने वाले भावों के मुताबिक कम या ज्यादा भी हो सकता है। वे अपनी उगाई गई सब्जियों की बिक्री के लिए उपज को नजदीकी बलरामपुर सब्जी मंडी में सप्लाई करते हैं। भविष्य में इस खेती के दायरे को और अधिक विस्तार देने की उनकी पूरी योजना है, क्योंकि इस क्षेत्र से उन्हें एक मजबूत और संतोषजनक आर्थिक सहारा मिल रहा है।

## इसका आप पर असर
उत्तर प्रदेश और ग्रामीण इलाकों के पाठकों के लिए यह खबर पारंपरिक नौकरी के बजाय स्वरोजगार और आधुनिक कृषि तकनीकों अपनाने की मिसाल पेश करती है, जिससे कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

- **भारत में:** पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक बेड विधि और तकनीकी माध्यमों का उपयोग करके युवा खेती को एक लाभ का सौदा बना सकते हैं।
- **गोंडा में:** स्थानीय युवाओं और किसानों को प्रेरणा मिलती है कि वे बेरोजगारी से निराश होने के बजाय बागवानी और सब्जी उत्पादन में अपनी किस्मत आजमाएं।

## सवाल-जवाब

### 1. संजय मौर्य कौन हैं और वे कहाँ के रहने वाले हैं?
संजय मौर्य उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड रुपईडीह के रहने वाले एक प्रगतिशील युवा किसान हैं।

### 2. संजय मौर्य ने किस फसल की खेती शुरू की है?
उन्होंने आधुनिक तरीके से भिंडी की खेती शुरू की है।

### 3. संजय मौर्य ने नौकरी क्यों नहीं की?
आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद काफी कोशिशों के बावजूद उन्हें मनमुताबिक नौकरी नहीं मिल पाई थी।

### 4. वे भिंडी की खेती किस विधि से कर रहे हैं?
वे पारंपरिक तरीके को छोड़कर आधुनिक बेड विधि से भिंडी की खेती कर रहे हैं जिससे सिंचाई और निराई आसान होती है।

### 5. इस खेती में कितनी लागत आती है और कितना मुनाफा होता है?
एक से डेढ़ बीघा में लगभग 8 से 10 हजार रुपये की लागत आती है और 60 से 70 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है।

### 6. संजय मौर्य अपनी उगाई गई भिंडी कहाँ बेचते हैं?
वे अपनी सब्जियों की सप्लाई नजदीकी बलरामपुर सब्जी मंडी में करते हैं।

## प्रेरणा और सबक
संजय मौर्य की इस सफलता से पाठक निम्नलिखित महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं:

- **विकल्प तलाशें:** मनमुताबिक नौकरी न मिलने पर हताश होने के बजाय कृषि या अन्य क्षेत्रों में नए रास्ते तलाशें।
- **आधुनिक तकनीक अपनाएं:** खेती में पारंपरिक तौर-तरीकों की जगह आधुनिक विधियों (जैसे बेड विधि) का उपयोग करके समय और मेहनत बचाएं।
- **इंटरनेट का उपयोग करें:** यूट्यूब और डिजिटल माध्यमों से नए कौशल और विचारों को सीखकर अपने काम में लागू करें।
- **छोटे स्तर से शुरुआत करें:** किसी भी नए काम की शुरुआत कम लागत और छोटे दायरे से करें, फिर सफलता मिलने पर उसे बढ़ाएं।

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