गोंडा के उपेंद्र साहू ने 6वीं तक पढ़कर तोरई की खेती से पलटी किस्मत, 10 हजार लगाकर कमाए 1 लाख उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान उपेंद्र साहू ने छठी तक की पढ़ाई के बाद सब्जी की खेती में हाथ आजमाया और मात्र 2 बीघा जमीन में तोरई उगाकर एक लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के अंतर्गत आने वाले इलाके में एक प्रेरणादायक किसानी की कहानी सामने आई है। यहां एक साधारण किसान ने सीमित संसाधनों और कम स्कूली शिक्षा के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर कृषि को मुनाफे का सौदा बना दिया है। छठवीं कक्षा तक की औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने वाले इस किसान ने पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी और सब्जी उत्पादन का रास्ता चुना, जिसके नतीजे बेहद शानदार रहे हैं। बाजार की नब्ज को पहचानकर सही समय पर सही फसल का चुनाव करने से आज उनकी आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हो गई है। पढ़ाई छोड़ खेती से जोड़े हाथ और पारंपरिक फसलों को छोड़ा पीछे प्रगतिशील किसान उपेंद्र साहू ने अपनी स्कूली पढ़ाई छठी कक्षा के बाद ही छोड़ दी थी और इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ कृषि कार्यों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। शुरुआती दौर में वह भी अन्य किसानों की तरह पारंपरिक फसलों की खेती ही किया करते थे, लेकिन इन परंपरागत फसलों से होने वाली आमदनी बेहद सीमित थी और परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा था। इसी मजबूरी और कुछ नया करने की चाह ने उन्हें सब्जियों की खेती की तरफ मोड़ा। उपेंद्र साहू के अनुसार उन्हें तोरई की खेती करने का मुख्य विचार पानी संस्थान और आसपास के अन्य अनुभवी किसानों से बातचीत के दौरान मिला। इसके बाद उन्होंने इस फसल से जुड़े तौर-तरीकों पर काफी रिसर्च की और फिर पूरी तैयारी के साथ तोरई की खेती की विधिवत शुरुआत कर दी। दो बीघा जमीन पर लागत और पांच से छह महीने में बंपर मुनाफा इस समय उपेंद्र साहू लगभग दो बीघा जमीन के क्षेत्रफल में बड़े पैमाने पर तोरई की खेती कर रहे हैं। इस पूरी फसल को तैयार करने में उनकी कुल लागत महज 10 से 15 हजार रुपये के बीच आई है। इसके एवज में उन्हें महज 5 से 6 महीने के एक सीजन के भीतर लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये तक की शानदार इनकम हो रही है। उनके खेतों में उगने वाली ताजी तोरई को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास की बड़ी मंडियों में भी खपाया जाता है। बाजार में इस हरी सब्जी की मांग हमेशा बनी रहती है, जिसका सीधा फायदा उन्हें बेहतर भाव के रूप में मिलता है। मचान विधि का इस्तेमाल और खेती से जुड़ी जरूरी तकनीक तोरई मूल रूप से एक बेल वाली सब्जी है जिसकी पैदावार के लिए खेतों में धूप और पानी का समुचित प्रबंधन होना सबसे जरूरी है। पौधों की सही ग्रोथ के लिए उपेंद्र साहू खेतों में मचान तैयार करते हैं ताकि बेलें जमीन पर फैलने की बजाय ऊपर की तरफ बढ़ सकें। मचान विधि से खेती करने के कई बड़े फायदे मिलते हैं, जैसे कि फल गंदे होने और जमीन के सीधे संपर्क में आने से बच जाते हैं, खेत की उपलब्ध जगह का बहुत ही करीने से इस्तेमाल होता है और पौधों की निराई-गुड़ाई तथा तुड़ाई करना भी बहुत आसान हो जाता है। सवाल-जवाब 1. उपेंद्र साहू किस जिले के रहने वाले हैं? उपेंद्र साहू उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के रहने वाले हैं। 2. उन्होंने कितने हिस्से में तोरई की खेती की है? उन्होंने लगभग दो बीघा जमीन में तोरई की खेती की है। 3. तोरई की खेती में कुल कितनी लागत आई है? दो बीघा तोरई की खेती में लगभग 10 से 15 हजार रुपये की लागत आई है। 4. इस खेती से उन्हें कितने समय में कितना मुनाफा हुआ है? उन्हें 5 से 6 महीने के सीजन में लगभग 90 हजार से 1 लाख रुपये की आमदनी हुई है। प्रेरणा और सबक उ उपेंद्र साहू की सफलता से सीखें ये 4 बातें: • सीमित शिक्षा बाधा नहीं: औपचारिक पढ़ाई कम होने के बावजूद व्यावहारिक ज्ञान और मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है। • पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ें: सीमित कमाई वाले पुराने तरीकों को छोड़कर उच्च मांग वाली नकदी फसलों और सब्जियों का चुनाव करें। • विशेषज्ञों और संस्थानों की मदद लें: कृषि संस्थानों और अनुभवी किसानों से सलाह लेकर नई तकनीकों पर रिसर्च करें। • सही तकनीक अपनाएं: मचान विधि जैसी उन्नत कृषि तकनीकों का उपयोग कर लागत कम और पैदावार बेहतर करें। https://trendkia.com/business/gonda-ke-upendra-sahu-ne-6vi-tak-padhkar-torai-ki-kheti-se-palti-kismat-15586 TrendKia — Har trend, sabse pehle.