गोंडा में 10 हजार मुर्गियों की यूनिट पर मिलेगी 7% सब्सिडी, जानिए लागत, जमीन और आवेदन की पूरी प्रक्रिया गोंडा में 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली पोल्ट्री यूनिट लगाने के लिए 7% सब्सिडी दी जा रही है। 1 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लिए 1 एकड़ जमीन और 25% स्व-वित्तपोषण अनिवार्य है। कृषि के साथ पशुपालन और मुर्गी पालन व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को मुर्गी पालन की नई इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है। गोंडा के उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने योजना की संपूर्ण रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि बड़ी क्षमता वाली मुर्गी पालन इकाई शुरू करके किसान इसे अपनी आय और स्वरोजगार का एक सुदृढ़ माध्यम बना सकते हैं। 10 हजार मुर्गियों की इकाई के लिए लागत और जमीन की आवश्यकता उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली एक बड़ी व्यावसायिक इकाई स्थापित करने में कुल 1 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक किसान के पास कम से कम 1 एकड़ जमीन उपलब्ध होना अनिवार्य है। इस निर्धारित भूमि पर पक्षियों के लिए आधुनिक शेड का निर्माण, आवश्यक उपकरणों की स्थापना और अन्य सभी जरूरी बुनियादी व्यवस्थाएं की जाती हैं। परियोजना के वित्तीय ढांचे के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल लागत का लगभग एक चौथाई हिस्सा किसान के अपने बैंक खाते में उपलब्ध होना जरूरी है। यानी किसान को परियोजना शुरू करने के लिए अपनी स्वयं की कुछ पूंजी लगानी होगी। शेष राशि की व्यवस्था बैंक से मिलने वाली वित्तीय सहायता और सरकारी योजना के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता से की जाती है, जिसके अंतर्गत सरकार पात्र किसानों को 7% सब्सिडी का लाभ देती है। भूमि खरीदारी पर स्टांप शुल्क छूट और बिजली की सुविधा यदि किसी इच्छुक किसान के पास मुर्गी पालन इकाई लगाने के लिए अपनी खुद की जमीन मौजूद नहीं है, तो उसके लिए भी राहत का प्रावधान किया गया है। डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि यदि किसान मुर्गी पालन शेड स्थापित करने के उद्देश्य से नई जमीन खरीदता है, तो सरकार उसे स्टांप शुल्क में छूट प्रदान करती है। इस छूट से किसानों को भूमि खरीद के दौरान होने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ से काफी राहत मिल जाती है। इसके साथ ही, मुर्गी पालन इकाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए बुनियादी सुविधाओं का होना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से पोल्ट्री यूनिट के लिए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सुगम बनाने और कनेक्शन उपलब्ध कराने में भी पूर्ण सहयोग दिया जाता है, जिससे किसानों को शुरुआती ढांचा तैयार करने में किसी प्रकार की समस्या न आए। सीएससी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और आवश्यक सावधानियां मुर्गी पालन की 10 हजार क्षमता वाली यूनिट शुरू करने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र भरते समय किसान को अपने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग द्वारा किसान की पात्रता और परियोजना की पूरी जानकारी की गहन जांच की जाती है। आवेदन करने से पूर्व डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने निकटतम पशु चिकित्सा विभाग के कार्यालय में जाकर योजना की वर्तमान शर्तों, दिशा-निर्देशों और सब्सिडी की विस्तृत जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इससे आवेदन के दौरान होने वाली किसी भी तकनीकी त्रुटि या परेशानी से बचा जा सकेगा और आवेदन प्रक्रिया सुगम रहेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन का व्यवसाय किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। किसान अंडों और मुर्गियों की बिक्री करके नियमित रूप से अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली बड़ी इकाइयां शुरू होने से स्थानीय स्तर पर भी कई नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, जिससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम की उपलब्धता मिलती है। इसका आप पर असर • भारत में: पशुपालन और पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करने वाले किसान 7% सब्सिडी और बैंक सहायता का लाभ उठाकर कृषि के साथ नियमित अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। • गोंडा में: गोंडा जिले के किसान 10 हजार क्षमता वाली पोल्ट्री यूनिट स्थापित करके स्वरोजगार अपनाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर नए रोजगार पैदा कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. गोंडा में 10 हजार मुर्गियों की पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने की लागत कितनी आती है? 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली इकाई स्थापित करने में लगभग 1 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आती है। 2. मुर्गी पालन योजना का लाभ उठाने के लिए कितनी जमीन और खुद की पूंजी होना जरूरी है? इस योजना के लिए किसान के पास कम से कम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए और कुल लागत का लगभग एक चौथाई हिस्सा (25 लाख रुपये) अपने बैंक खाते में होना अनिवार्य है। 3. यदि किसान के पास मुर्गी पालन के लिए अपनी जमीन न हो तो क्या सहायता मिलती है? यदि किसान पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने के लिए नई जमीन खरीदता है, तो सरकार की ओर से स्टांप शुल्क में छूट प्रदान की जाती है। 4. मुर्गी पालन योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे किया जा सकता है? इच्छुक किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन दर्ज कर सकते हैं। 5. मुर्गी पालन यूनिट के लिए सरकार की ओर से कितनी सब्सिडी दी जाती है? योजना के तहत पात्र किसानों को 10 हजार मुर्गियों की क्षमता वाली यूनिट के लिए 7% सब्सिडी दी जाती है। https://trendkia.com/business/gonda-men-10-hajara-murgiyon-ki-yunita-para-milegi-7-sabsidi-janie-lagata-jamina-aura-avedana-ki-puri-prakriya-19223 TrendKia — Har trend, sabse pehle.