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  "type": "article",
  "title": "उत्तर प्रदेश के गोंडा में महिलाओं को सिखाए जा रहे सेहतमंद पकवान, बच्चों की सेहत सुधारने की अनोखी पहल",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में महिलाओं और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के लिए विशेष पौष्टिक आहार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसका मकसद घर की उपलब्ध चीजों और मोटे अनाजों से बच्चों के लिए स्वादिष्ट व स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन बनाना सिखाना है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के भीतर महिलाओं को संतुलित और सेहतमंद खानपान तैयार करने का बिल्कुल मुफ्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अनोखी पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर मिलने वाले मोटे अनाजों और घरेलू खाद्य सामग्री का उपयोग करके पौष्टिक व्यंजन बनाने की कला सिखाना है। इसके साथ ही इस मुहिम की मदद से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के जरिए बच्चों और उनके अभिभावकों तक सही पोषण की यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई जा रही है ताकि शुरुआती दौर से ही बच्चों की सेहत पर खास ध्यान दिया जा सके।\n\n \n\nआंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण\n दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, गोपालग्राम की गृह विज्ञान विशेषज्ञ ममता त्रिपाठी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को सेहतमंद भोजन तैयार करने के हुनर सिखाए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में विशेष तौर पर कम उम्र के बच्चों के लिए ऊर्जावान और पौष्टिक आहार पकाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर आने वाले छोटे बच्चों के समुचित स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास के लिए उचित पोषण सबसे बुनियादी जरूरत है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कार्यकत्रियों को यह समझाया जा रहा है कि कैसे घर पर आसानी से उपलब्ध हो जाने वाले अनाजों और अन्य खाद्य वस्तुओं से बच्चों की पसंद के मुताबिक स्वादिष्ट और सेहतमंद पकवान तैयार किए जा सकते हैं।\n\n \n\nदो दिनों के कार्यक्रम में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों पर जोर\n ममता त्रिपाठी के अनुसार यह पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम दो दिनों की अवधि का तय किया गया है। शुरुआती दिन महिलाओं को संतुलित आहार से जुड़ी सभी आवश्यक सैद्धांतिक जानकारियां विस्तार से समझाई जाती हैं। उन्हें इस बात से अवगत कराया जाता है कि अलग-अलग अनाजों के अंदर कौन-कौन से जरूरी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं और बच्चों के लिए रसोई में खाना बनाते समय किन खास बातों को ध्यान में रखना चाहिए। इसके ठीक अगले दिन यानी प्रशिक्षण के दूसरे चरण में महिलाओं से अभ्यास कराया जाता है। इस दौरान विभिन्न प्रकार के पौष्टिक आहार विशेषज्ञ खुद बनाकर दिखाते हैं और साथ ही प्रशिक्षण ले रही महिलाएं भी अपने हाथों से उन खाद्य पदार्थों को तैयार करती हैं। इससे महिलाओं को भोजन पकाने का सीधा व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है जिसका इस्तेमाल वे अपने घरों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर आसानी से कर सकती हैं।\n\n \n\nभोजन में विविधता लाकर दूर होगी पोषण की कमी\n इस पूरे प्रशिक्षण सत्र के दौरान मोटे अनाजों के अधिकाधिक इस्तेमाल पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। महिलाओं को विस्तार से यह सिखाया जा रहा है कि कैसे विभिन्न प्रकार के मोटे अनाजों से कई तरह के स्वादिष्ट और सेहतमंद व्यंजन आसानी से पकाए जा सकते हैं। इन पौष्टिक अनाजों को बच्चों के दैनिक भोजन में शामिल करने के नए और अलग तरीकों की जानकारी भी इस सत्र का मुख्य हिस्सा है। ममता त्रिपाठी ने बताया कि सामान्य पोहे का इस्तेमाल करके भी कई प्रकार के पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर आहार तैयार किए जा सकते हैं। इसी तरह मोटे अनाज और घर में पहले से मौजूद दूसरी सामग्री का मेल करके बच्चों के लिए लजीज पकवान बनाए जा सकते हैं जिससे भोजन में बोरियत खत्म होगी और विविधता आएगी।\n\n \n\nबच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार जरूरी\n प्रशिक्षण सत्र के दौरान इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचने वाले बच्चों की थाली में क्या होना चाहिए। महिलाओं को लगातार यह समझाया जा रहा है कि बच्चों को हमेशा ऐसा भोजन परोसा जाना चाहिए जो उनकी उम्र और शारीरिक जरूरतों के बिल्कुल मुफीद हो। छोटे बच्चों की मजबूत शारीरिक वृद्धि और तेज मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार का सेवन बेहद अहम भूमिका निभाता है। सही और पौष्टिक खाना बच्चों की सीखने की क्षमता और उनकी रोजाना की तमाम गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद करता है। यही मुख्य वजह है कि इस अभियान के माध्यम से माता-पिता को भी अपने बच्चों के खानपान की आदतों पर बेहद संजीदगी से नजर रखने की सलाह दी जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nइस प्रशिक्षण अभियान का सीधा असर ग्रामीण परिवारों और उनके बच्चों के दैनिक खानपान पर पड़ेगा।\n\n• भारत भर में: देश भर के ग्रामीण इलाकों में बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने और मोटे अनाजों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ऐसी पहल लगातार चलाई जा रही हैं। इससे आम परिवारों को कम खर्च में बेहतर सेहतमंद विकल्प चुनने की प्रेरणा मिलती है।\n\n• गोंडा में: गोंडा जिले की महिलाओं और स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों के परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। महिलाएं घर में उपलब्ध स्थानीय सामग्री से बच्चों के लिए अधिक पौष्टिक और विविधतापूर्ण भोजन तैयार कर सकेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने और सही पोषण की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत के कारण इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।\n\n• घरेलू सामग्री का उपयोग: महंगे खाद्य पदार्थों के बजाय स्थानीय स्तर पर मिलने वाले मोटे अनाजों और घर की चीजों से संतुलित आहार तैयार करने की कला सिखाना इस पहल का मुख्य आधार है।\n\n• कार्यकत्रियों की भूमिका: आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर सही पोषण संबंधी जागरूकता फैलाना इस कार्यक्रम का सबसे प्रभावी हिस्सा है।\n\n• शारीरिक और मानसिक विकास: कम उम्र में बच्चों को सही और पौष्टिक भोजन मिलने से उनके स्वास्थ्य में सुधार होता है और उनका विकास बेहतर तरीके से होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गोंडा में महिलाओं को किस चीज का प्रशिक्षण दिया जा रहा है?\nगोंडा जिले की महिलाओं को घर में उपलब्ध सामग्री और मोटे अनाजों से पौष्टिक आहार बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।\n\n2. यह प्रशिक्षण किसे दिया जा रहा है?\nयह प्रशिक्षण महिलाओं और मुख्य रूप से आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को दिया जा रहा है।\n\n3. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि कितने दिनों की है?\nयह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल दो दिनों का है जिसमें थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों कराए जाते हैं।\n\n4. इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nइसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के भोजन में विविधता लाना और उनके मानसिक तथा शारीरिक विकास के लिए सही पोषण की जानकारी देना है।\n\n5. यह प्रशिक्षण किसके द्वारा दिया जा रहा है?\nयह प्रशिक्षण दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, गोपालग्राम की गृह विज्ञान विशेषज्ञ ममता त्रिपाठी के मार्गदर्शन में दिया जा रहा है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/gonda-women-receive-nutritious-diet-training-to-improve-children-health-with-millets-33153",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-18",
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    "गोंडा पोषण अभियान",
    "आंगनवाड़ी प्रशिक्षण",
    "मोटा अनाज आहार",
    "बाल विकास उत्तर प्रदेश",
    "पोषण आहार योजना"
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  "site": "TrendKia"
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