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  "type": "article",
  "title": "ग्रामीण महिला उद्यमियों को आर्थिक मदद देने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और आईएफसी के बीच 15 करोड़ डॉलर का सोशल लोन समझौता",
  "summary": "आईएफसी और एसबीआई ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में लगी 8.64 लाख ग्रामीण महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 15 करोड़ डॉलर के सोशल लोन की घोषणा की है।",
  "content": "भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने शुक्रवार को अपनी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की औपचारिक घोषणा की। इस विस्तृत समझौते के तहत कृषि तथा उससे जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में शामिल लगभग 8.64 लाख ग्रामीण महिलाओं को ऋण सहायता देने के उद्देश्य से 150 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ डॉलर) का सोशल लोन मंजूर किया गया है। इसके साथ ही हाल में हस्ताक्षरित ISDA मास्टर एग्रीमेंट के ढांचे के भीतर पहले करंसी एक्सचेंज समझौते को भी अंतिम रूप दे दिया गया है।\n\nस्वयं सहायता समूहों और स्वयं सिद्ध योजना से वित्तीय आवंटन\nइस संयुक्त पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका लक्षित वित्तीय ढांचा है। दोनों संस्थानों की ओर से जारी साझे बयान के मुताबिक, इस 15 करोड़ डॉलर के सोशल लोन की कुल राशि का 90 प्रतिशत तक हिस्सा स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से महिला कर्जदारों में वितरित किया जाएगा। शेष 10 प्रतिशत धनराशि भारतीय स्टेट बैंक की विशेष 'स्वयं सिद्ध योजना' के तहत उन महिलाओं को दी जाएगी जो व्यक्तिगत रूप से सूक्ष्म उद्यम चला रही हैं या नया छोटा कारोबार शुरू करना चाहती हैं।\n\nलोकल करंसी स्वैप तंत्र से विदेशी मुद्रा जोखिम का समाधान\nयह वित्तीय समझौता भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक नया मील का पत्थर भी तय करता है। इस सौदे के साथ ही एसबीआई, भारत में आईएफसी का पहला डोमेस्टिक करंसी एक्सचेंज पार्टनर और संपूर्ण दक्षिण एशिया क्षेत्र में पहला लोकल करंसी एक्सचेंज पार्टनर बन गया है। यह करंसी एक्सचेंज व्यवस्था आईएफसी को निजी क्षेत्र के दीर्घकालिक निवेशों के लिए भारतीय रुपये में टिकाऊ फंडिंग जुटाने में सक्षम बनाएगी।\n\nइसके अतिरिक्त, यह तंत्र बुनियादी ढांचे, कृषि-व्यवसाय और वित्तीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्जदारों के लिए विदेशी मुद्रा दर में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को काफी हद तक कम कर देगा। आईएफसी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों की अवधि के दौरान उसने अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपये के करंसी एक्सचेंज मार्केट के माध्यम से 300.4 अरब रुपये (लगभग 3.7 अरब अमेरिकी डॉलर) की फंडिंग उपलब्ध कराई है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ यह ताजा गठजोड़ देश में दीर्घकालिक स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण की व्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।\n\nकृषि से जुड़े क्षेत्रों का विकास और पहली सरकारी बैंक निवेश पहल\nयह वित्तीय सहायता विशेष रूप से उन महिलाओं को केंद्रित करेगी जो पारंपरिक खेती, पशुपालन, मछली पालन (मत्स्य पालन) और खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) जैसे दैनिक आजीविका के कार्यों से जुड़ी हुई हैं। इस पूंजी प्रवाह से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन मजबूत होंगे, बल्कि नए स्थानीय रोजगारों के अवसर भी पैदा होंगे।\n\nउल्लेखनीय है कि भारत में किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के सरकारी बैंक के लिए आईएफसी की यह पहली ऋण सुविधा है और देश के किसी सरकारी बैंक में उसका पहला प्रत्यक्ष निवेश भी है। आईएफसी की प्रिंसिपल कंट्री अधिकारी रोशिका सिंह ने इस साझेदारी पर संतोष जताते हुए कहा, \"भारतीय स्टेट बैंक एक ऐसा मजबूत साझेदार है जो उन क्षेत्रों तक पूंजी पहुंचा सकता है जहां हम अकेले नहीं पहुंच सकते।\"\n\nवहीं, भारतीय स्टेट बैंक के उप प्रबंध निदेशक सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यह सहयोगात्मक प्रयास महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों और दूरदराज के ग्रामीण उद्यमियों तक वित्तीय पहुंच का विस्तार करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत सरकार के 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विज़न में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह समझौता भारत की ग्रामीण महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को काफी आसान बनाएगा।\n\n• भारत में: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लगी 8.64 लाख से अधिक महिलाओं को रियायती दर पर बैंकिंग ऋण मिलने से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।\n• वित्तीय क्षेत्र में: लोकल करंसी स्वैप व्यवस्था लागू होने से बुनियादी ढांचे और कृषि-व्यवसाय क्षेत्रों में काम करने वाली संस्थाओं के लिए विदेशी मुद्रा दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह समझौता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगम द्वारा भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।\n\n• प्रत्यक्ष कारण: ग्रामीण महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को रियायती दर पर दीर्घकालिक स्थानीय मुद्रा ऋण उपलब्ध कराना इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य है।\n• वैश्विक संस्थागत रणनीति: आईएफसी अकेले भारत के दूरदराज के क्षेत्रों तक पूंजी नहीं पहुंचा सकता था, इसलिए उसने एसबीआई के विशाल नेटवर्क का सहारा लिया।\n• विदेशी मुद्रा जोखिम प्रबंधन: अमेरिकी डॉलर में कर्ज लेने पर रहने वाले विनिमय दर जोखिम को खत्म करने के लिए आईएसडीए मास्टर एग्रीमेंट के तहत लोकल करंसी स्वैप समझौता किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईएफसी और एसबीआई के बीच कितने रुपये के लोन का समझौता हुआ है?\nआईएफसी और एसबीआई के बीच 150 मिलियन डॉलर (लगभग 15 करोड़ डॉलर) के सोशल लोन का समझौता हुआ है।\n\n2. इस सोशल लोन से कितनी महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है?\nइस ऋण योजना से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में काम करने वाली लगभग 8.64 लाख ग्रामीण महिलाओं को लाभ मिलेगा।\n\n3. फंड का वितरण किस प्रकार किया जाएगा?\nलोन राशि का 90% स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से दिया जाएगा, जबकि 10% राशि एसबीआई की 'स्वयं सिद्ध योजना' के तहत व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को मिलेगी।\n\n4. आईएफसी के लिए एसबीआई किस मामले में पहला पार्टनर बना है?\nएसबीआई भारत में आईएफसी का पहला डोमेस्टिक करंसी एक्सचेंज पार्टनर और दक्षिण एशिया का पहला लोकल करंसी एक्सचेंज पार्टनर बना है।",
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  "publishedAt": "2026-11-07",
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