जीएसटी परिषद की बैठक में छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत, 10 हजार रुपये से कम के टैक्स मामलों में नोटिस और पुराने केस वापस वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी परिषद की बैठक में 10 हजार रुपये से कम के मामलों में नोटिस जारी न करने और पहले भेजे गए नोटिस वापस लेने का फैसला किया गया है। इससे करीब 12 लाख छोटे कारोबारियों को सीधा फायदा मिलेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर को आयोजित वस्तु एवं सेवा कर परिषद की उच्चस्तरीय बैठक में छोटे एवं मध्यम व्यापारिक वर्ग के हित में कई दूरगामी कदम उठाए गए। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु छोटे व्यापारियों पर प्रक्रियागत बोझ को कम करना रहा। परिषद ने निर्णय लिया है कि 10 हजार रुपये से कम की कर विसंगति या टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में अब कारोबारियों को कोई विभागीय नोटिस नहीं जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस सीमा से कम राशि के लिए पहले से जारी किए जा चुके सभी पुराने नोटिस भी आधिकारिक तौर पर वापस लिए जाएंगे। 12 लाख छोटे व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ इस नीतिगत बदलाव के प्रभाव से देश भर के लगभग 12 लाख छोटे व्यापारियों को तत्काल कानूनी व प्रशासनिक राहत मिलने का अनुमान है। पिछले वर्ष परिषद ने आम उपभोक्ताओं को कर की दरों में रियायतें देने पर ध्यान केंद्रित किया था, जबकि इस सत्र में व्यापार सुगमता को गति देने के लिए अनुपालन नियमों को सरल बनाने को प्राथमिकता दी गई है। छोटी-मोटी तकनीकी चूकों या मामूली टैक्स अंतर को लेकर व्यापारियों को होने वाली असुविधा को समाप्त करना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। अधिकारियों के अधिकारों की सीमा और दंडात्मक प्रावधान परिषद ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से टैक्स अधिकारियों के विवेकाधिकारों में भी अहम बदलाव किए हैं। 5 करोड़ रुपये से कम की वित्तीय अनियमितताओं अथवा टैक्स गड़बड़ियों के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार वापस ले लिया गया है और ऐसी स्थितियों में केवल जुर्माने का प्रावधान लागू रहेगा। इसके साथ ही व्यापार जगत के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड व्यवस्था, पंजीकरण नियमों तथा कर दरों से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी सुधार के कई फैसले लिए गए हैं। इसका आप पर असर इस फैसले से देश के छोटे व्यापारियों को कानूनी कागजी कार्रवाई और गैर-जरूरी टैक्स विवादों से तुरंत छुटकारा मिलेगा। • राहत का दायरा: 10 हजार रुपये से कम के कर मामलों में अब कोई भी नया नोटिस जारी नहीं होगा। जिन व्यापारियों को पहले से ऐसे नोटिस मिले हुए थे, वे भी पूरी तरह वापस ले लिए जाएंगे। • छोटे कारोबारियों पर प्रभाव: करीब 12 लाख छोटे दुकानदारों और उद्यमों को रोजमर्रा के कानूनी फेरबदल से राहत मिलेगी। इससे व्यापारियों का समय और अदालती प्रक्रिया पर होने वाला खर्च बचेगा। • दंडात्मक कार्रवाई में बदलाव: 5 करोड़ रुपये से कम की अनियमितता पर अब सीधे गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सिर्फ नियमानुसार वित्तीय जुर्माना ही लगाया जाएगा। • प्रशासनिक स्पष्टता: इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड और पंजीकरण की प्रक्रियाएं अधिक सरल और पारदर्शी होंगी। इससे व्यापारियों को अपने सामान्य कामकाज और व्यापार विस्तार पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह फैसला छोटे कारोबारियों पर टैक्स अनुपालन के अत्यधिक बोझ को घटाने और मुकदमेबाजी की लागत कम करने के लिए लिया गया है। मामूली रकम के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करना कर प्रशासन और व्यापारी दोनों के लिए अव्यावहारिक साबित हो रहा था। • मुकदमेबाजी का भारी बोझ: 10 हजार रुपये से कम के विवादों में कानूनी प्रक्रिया की लागत अक्सर रिकवरी की राशि से अधिक हो जाती थी। इसे समाप्त करने से टैक्स विभाग और व्यापारी दोनों के संसाधनों की बचत होगी। • कारोबार सुगमता को बढ़ावा: छोटे व्यापारियों की लंबे समय से मांग थी कि लिपिकीय त्रुटियों या छोटी चूकों को टैक्स चोरी की तरह न देखा जाए। परिषद ने इसी दिशा में अनुपालन नियमों को व्यावहारिक बनाया। • अधिकारियों की जवाबदेही: छोटे मामलों में गिरफ्तारी जैसी कठोर शक्तियों के इस्तेमाल की आशंका को दूर कर व्यापारिक माहौल में भरोसा बहाल करना प्राथमिक उद्देश्य रहा। सवाल-जवाब 1. जीएसटी परिषद की बैठक कब और किसकी अध्यक्षता में हुई? यह बैठक 8 अक्टूबर को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित हुई। 2. टैक्स नोटिस को लेकर क्या प्रमुख निर्णय लिया गया है? 10 हजार रुपये से कम के मामलों में अब कोई नया नोटिस नहीं भेजा जाएगा और पहले भेजे गए नोटिस भी वापस लिए जाएंगे। 3. इस निर्णय से कितने व्यापारियों को लाभ पहुंचने का अनुमान है? इस फैसले से देश के करीब 12 लाख छोटे कारोबारियों को सीधी राहत मिलने का अनुमान है। 4. टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों में क्या बदलाव हुआ है? 5 करोड़ रुपये से कम की गड़बड़ी के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार हटा दिया गया है और अब केवल जुर्माना लगेगा। https://trendkia.com/business/gst-parishada-ki-baithaka-men-chhote-vyapariyon-ko-bari-rahata-10-hajara-rupaye-se-kama-ke-taiksa-mamalon-men-notisa-aura-purane-k-44850 TrendKia — Har trend, sabse pehle.