# होर्मुज संकट और तनाव के बीच भारत ने रचा इतिहास, अक्टूबर में प्रतिदिन 56 लाख बैरल कच्चा तेल मंगाया

> वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने पश्चिम एशिया और रूस से आपूर्ति तेज कर अक्टूबर में रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चे तेल का नया आयात रिकॉर्ड बनाया.

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/hormuz-snkata-aura-tanava-ke-bicha-india-ne-racha-itihasa-october-men-pratidina-56-lakha-bairala-kachcha-tela-mngaya-54268 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, तेल आयात, भारतीय रिफाइनरी, रूस भारत तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य, केप्लर, पेट्रोलियम बाजार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और जलमार्गों पर चुनौतियों के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में बड़ी कामयाबी हासिल की है. अक्टूबर महीने में भारत का कच्चे तेल का कुल आयात उछलकर प्रतिदिन लगभग 56 लाख बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर दर्ज किया गया. पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर बने जोखिमों के बावजूद भारतीय कंपनियों ने रणनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए खाड़ी देशों और रूस दोनों से आपूर्ति का प्रवाह तेज बनाए रखा.

## पश्चिम एशिया और रूस से रिकॉर्ड खेप
ऊर्जा क्षेत्र के डेटा और शोध पर काम करने वाली कंपनी केप्लर के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कई स्रोतों से खरीद को संतुलित किया. केप्लर के प्रमुख विश्लेषक निखिल दुबे ने जानकारी दी कि अक्टूबर के दौरान पश्चिम एशिया से भारत को हर दिन लगभग 23 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति प्राप्त हुई. इसके साथ ही रूसी कच्चे तेल की आवक भी बेहद मजबूत बनी रही और वहां से रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचा.

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल ले जाने वाले जहाजों पर बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कंपनियों ने जहाज से जहाज के बीच तेल ट्रांसफर करने की तकनीक का भरपूर सहारा लिया. निखिल दुबे के अनुसार, इस परिचालन रणनीति ने होर्मुज मार्ग से तेल की सुरक्षित आवाजाही को सुगम बनाया. इसके चलते सितंबर और अक्टूबर के महीनों में खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों से भारत को मिलने वाली आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और घरेलू रिफाइनरी इकाइयों को अपनी जरूरत के मुताबिक बेहतर सौदे चुनने के ज्यादा विकल्प मिल सके.

## सर्दियों में रूसी आपूर्ति और परिवहन लागत की चुनौती
आने वाले महीनों में तेल आपूर्ति के समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है. केप्लर के आकलन के अनुसार, नवंबर और दिसंबर के दौरान रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल की मात्रा में कुछ गिरावट आने के आसार हैं. इसकी मुख्य वजह काला सागर क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों के चलते माल ढुलाई और समुद्री जहाजों के बीमा खर्च में तेजी से हो रही बढ़ोतरी है. लॉजिस्टिक्स महंगा होने से भारतीय आयातकों के लिए रूसी तेल की शुद्ध लागत बढ़ रही है.

इसके विपरीत, पश्चिम एशियाई देश भारतीय बाजार में अपनी मजबूत स्थिति दोबारा कायम करने के लिए बेहद आक्रामक और प्रतिस्पर्धी कीमतों की पेशकश कर रहे हैं. हालांकि निखिल दुबे का कहना है कि यदि होर्मुज जलमार्ग पर तनाव दोबारा बढ़ता है और वहां से सप्लाई में रुकावट आती है, तो भारतीय रिफाइनरियां बढ़ी हुई ढुलाई लागत के बावजूद रूसी तेल की खरीद को फिर से तेज करने में हिचकिचाएंगी नहीं.

## ग्राहम अधिनियम की छूट और 90 फीसदी आयात पर निर्भरता
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की घरेलू मांग का लगभग 90 फीसदी हिस्सा विदेशी बाजारों से खरीदकर पूरा करता है. ऐसे में देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की निरंतर उपलब्धता और उसकी वास्तविक लैंडिंग लागत बेहद संवेदनशील पहलू हैं. निखिल दुबे के अनुसार, 16 अक्टूबर को ग्राहम अधिनियम के तहत मिली विशेष छूट ने कुछ भारतीय खरीदारों के मन से रूसी तेल खरीद से जुड़े जोखिमों और आशंकाओं को काफी हद तक हल्का किया है. इस छूट की मदद से रिफाइनरी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल खरीद के फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन हासिल हुआ है. यही वजह है कि आज भारत केवल कूटनीतिक दबावों पर ध्यान न देकर प्रतिस्पर्धी कीमतों, सुरक्षित परिवहन और आपूर्ति की निरंतरता जैसे ठोस व्यावसायिक मानकों के आधार पर पश्चिम एशिया और रूस के बीच तेल की मात्रा तय कर रहा है.

## यूक्रेन युद्ध के बाद बदला ग्लोबल ऊर्जा व्यापार का ढांचा
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में यह बड़ा बदलाव फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के सैन्य हमले के बाद शुरू हुआ था. उस घटनाक्रम के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध थोप दिए थे. यूरोपीय संघ ने समुद्री मार्ग से आने वाले रूसी कच्चे तेल के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जबकि जी-7 समूह के देशों ने मिलकर रूसी कच्चे तेल की बिक्री पर सख्त मूल्य सीमा यानी प्राइस कैप की व्यवस्था लागू की थी.

यूरोपीय खरीदारों के हटने के बाद रूस ने अपने तेल उत्पादन को खपाने के लिए एशियाई देशों को भारी छूट की पेशकश शुरू की. इस अवसर का लाभ उठाकर भारत सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा. युद्ध शुरू होने से पहले भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी नगण्य थी, लेकिन भारी छूट और रणनीतिक फैसलों के दम पर यह बढ़कर सीधे 40 से 50 फीसदी के स्तर तक पहुंच गई थी, जिससे देश को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली.

## इसका आप पर असर
वैश्विक युद्ध और जलमार्ग संकट के बावजूद रिकॉर्ड तेल आयात से देश में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति में स्थिरता बनी रहेगी.

- **भारत में ईंधन आपूर्ति:** घरेलू रिफाइनरियों द्वारा रिकॉर्ड 56 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मंगाने से पेट्रोल और डीजल की किल्लत की आशंका पूरी तरह टल गई है. उपभोक्ताओं को आने वाले हफ्तों में पंपों पर निर्बाध ईंधन मिलता रहेगा.
- **पेट्रोल-डीजल की कीमतें:** खाड़ी देशों और रूस के बीच छूट की होड़ से भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा तेल मिल रहा है. इससे अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद खुदरा ईंधन दरों में अचानक बढ़ोतरी का दबाव नहीं बनेगा.
- **परिवहन और लॉजिस्टिक्स:** स्थिर ईंधन आपूर्ति से सड़क परिवहन और माल ढुलाई के भाड़े स्थिर बने रहने की उम्मीद है. आवश्यक वस्तुओं की परिवहन लागत काबू में रहने से आम नागरिकों पर महंगाई का झटका नहीं लगेगा.
- **ऊर्जा सुरक्षा रणनीति:** जरूरत का 90 फीसदी तेल आयात करने वाले भारत ने दिखा दिया है कि वह आपूर्ति बाधित नहीं होने देगा. इससे उद्योगों और बिजली उत्पादन से जुड़े क्षेत्रों में उत्पादन चक्र बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा.

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संभावित नाकेबंदी के जोखिम के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने घरेलू ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही आयात तेज कर दिया.

- **होर्मुज संकट से पहले स्टॉक बनाना:** अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति और जलमार्गों पर खतरों को देखते हुए रिफाइनरियों ने आपूर्ति रुकने से पहले बड़े पैमाने पर तेल मंगाया. इस एहतियाती कदम से अक्टूबर का कुल आयात बढ़कर 56 लाख बैरल प्रतिदिन के नए शिखर पर पहुंच गया.
- **जहाज से जहाज ट्रांसफर तकनीक:** होर्मुज जलडमरूमध्य के जोखिम भरे समुद्री रास्ते से बचने के लिए कंपनियों ने समुद्र में ही एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करने की रणनीति अपनाई. इस व्यवस्था ने आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखा और खाड़ी देशों से आने वाली खेप में सुधार किया.
- **रूसी छूट और नियामक राहत:** फरवरी 2022 में पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस द्वारा दी गई भारी छूट और 16 अक्टूबर को ग्राहम अधिनियम के तहत मिली राहत ने खरीद को आसान बनाया. इसके चलते भारतीय रिफाइनरियों को महंगे पश्चिमी नियमों की चिंता किए बिना स्वतंत्र व्यावसायिक फैसले लेने में मदद मिली.

## सवाल-जवाब

### 1. अक्टूबर में भारत का कच्चे तेल का आयात किस स्तर पर पहुंचा?
अक्टूबर में भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़कर रिकॉर्ड करीब 56 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गया.

### 2. अक्टूबर के दौरान पश्चिम एशिया और रूस से कितना तेल भारत आया?
अक्टूबर में पश्चिम एशिया से रोजाना करीब 23 लाख बैरल और रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आया.

### 3. होर्मुज जलडमरूमध्य के खतरे से निपटने के लिए क्या तरीका अपनाया गया?
जहाजों के बीच तेल के सुरक्षित ट्रांसफर का सहारा लिया गया, जिससे होर्मुज मार्ग से कच्चे तेल की सुगम आवाजाही संभव हुई.

### 4. नवंबर और दिसंबर में रूसी तेल आपूर्ति में कमी की क्या वजह बताई गई है?
काला सागर क्षेत्र में हमलों के कारण समुद्री माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है, जिससे रूसी तेल भारतीय खरीदारों के लिए महंगा पड़ रहा है.

### 5. 16 अक्टूबर को मिली किस छूट ने भारतीय रिफाइनरियों को राहत दी?
16 अक्टूबर को ग्राहम अधिनियम के तहत मिली छूट से भारतीय खरीदारों की रूसी तेल खरीद से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंताएं कम हुईं.

### 6. भारत अपनी जरूरत का कितना प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है.

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