{
  "type": "article",
  "title": "मेट्रो को पछाड़कर 11 उभरते शहरों में 63 फीसदी उछले मकानों के दाम, अगला रियल एस्टेट बूम शुरू",
  "summary": "भोपाल, इंदौर और लखनऊ समेत देश के 11 उभरते शहरों में बीते पांच वर्षों के दौरान आवासीय संपत्तियों के दाम 63 फीसदी बढ़े हैं, जो बड़े महानगरों की तुलना में काफी आगे हैं। बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्टार्टअप्स के फैलाव से इन टियर-2 बाजारों में प्रॉपर्टी निवेश का नया दौर देखा जा रहा है।",
  "content": "भारत में घर खरीदने और जमीन में निवेश का नक्शा अब पूरी तरह बदल रहा है। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि प्रॉपर्टी में सबसे तेज रिटर्न और कीमतों में बड़ा इजाफा केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मुंबई अथवा बेंगलुरु जैसे विशाल महानगरों तक ही सीमित रहता है। हालांकि ताजगी से सामने आए बाजार के विस्तृत विश्लेषण से यह बात साबित हो गई है कि देश का अगला बड़ा आवासीय विस्तार महानगरों की चारदीवारी से निकलकर देश के उभरते शहरों में अपनी जड़ें जमा चुका है। बीते पांच वर्षों के दौरान उभरते हुए 11 प्रमुख टियर-2 शहरों में रिहायशी मकानों की कीमतों में 63 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने देश के शीर्ष आठ महानगरों की रफ्तार को भी काफी पीछे छोड़ दिया है।\n\nमहानगरों के मुकाबले दोगुना रही सालाना मूल्य वृद्धि\nसाल 2021 से 2026 के पांच साल के दौर में उभरते शहरों के मकानों के भाव जहां 63 फीसदी चढ़े, वहीं इसी दौरान देश के शीर्ष आठ बड़े शहरों में यह बढ़त औसतन 42 फीसदी के आसपास ही सीमित रही। अगर पिछले पूरे एक दशक यानी 2016 से 2026 के आंकड़ों को देखा जाए, तो इन 11 उभरते शहरों में आवासीय संपत्तियों के औसत मूल्य में सालाना 8 फीसदी की दर से इजाफा हुआ है। इसके विपरीत, पारंपरिक शीर्ष आठ महानगरों में यह सालाना चक्रवृद्धि दर महज 4 फीसदी ही दर्ज की गई। यानी बीते दस वर्षों में इन नए बाजारों में कीमतें महानगरों के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से बढ़ी हैं।\n\nकौन से हैं वे 11 शहर जहां आई भारी तेजी\nप्रॉपर्टी की कीमतों में इस भारी उछाल वाले समूह में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और मध्य भारत के प्रमुख केंद्र शामिल हैं। इस सूची में मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर, पंजाब और हरियाणा की साझी राजधानी चंडीगढ़, तटीय राज्य गोवा, राजस्थान का जयपुर, केरल का कोच्चि, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, महाराष्ट्र का नागपुर, आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम और तमिलनाडु का औद्योगिक केंद्र कोयंबटूर शामिल हैं। इन सभी शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी, स्थानीय अर्थव्यवस्था में मजबूती और आधुनिक जीवनशैली की बढ़ती मांग के कारण प्रॉपर्टी बाजार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।\n\nबुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च और पीपीपी परियोजनाओं का असर\nछोटे और मझोले शहरों में रियल एस्टेट की इस तेज रफ्तार के पीछे बुनियादी ढांचे का निरंतर विस्तार सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है। देश के कुल सरकारी व्यय में इंफ्रास्ट्रक्चर की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 2014-15 के 39 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2025-26 में 55 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इसके साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत सरकार की तीन साल की पाइपलाइन में 17 लाख करोड़ रुपये की कुल 852 परियोजनाएं शामिल की गई हैं। यह विशाल निवेश देश के टियर-2 शहरों में सड़कों, हवाई अड्डों, रेल नेटवर्क और औद्योगिक गलियारों को आधुनिक बना रहा है, जिससे इन इलाकों का दीर्घकालिक आर्थिक विकास तेज हुआ है।\n\nआबादी का स्थानांतरण और स्टार्टअप्स का नया केंद्र\nपारंपरिक महानगरों से आगे बढ़ते इस विकास के पीछे जनसांख्यिकी और कारोबारी बदलाव भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। शीर्ष आठ महानगरों से बाहर के शहरों में आबादी की वृद्धि दर 28.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि इसके मुकाबले बड़े आठ महानगरों में यह आंकड़ा केवल 8.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा कारोबारी मोर्चे पर भी टियर-2 और टियर-3 शहर नए शक्ति केंद्र बन रहे हैं। वर्तमान में देश में पंजीकृत 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में से लगभग 50 फीसदी इन्हीं गैर-मेट्रो शहरों से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। इन परिस्थितियों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार, आमदनी और बेहतर रिहायशी मकानों की मांग को अभूतपूर्व बढ़ावा दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nमझोले और उभरते शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में यह तेज उछाल आम घर खरीदारों के बजट और निवेशकों के मुनाफे दोनों को सीधे प्रभावित कर रहा है।\n\n• भारत में: देश भर के छोटे शहरों में रहने वाले अथवा वहां बसने की योजना बना रहे लोगों के लिए अब सस्ते मकानों का दायरा तेजी से घट रहा है। खरीदारों को समय रहते निर्णय लेना होगा क्योंकि इन बाजारों में मूल्य वृद्धि की रफ्तार महानगरों से दोगुनी बनी हुई है।\n• टियर-2 शहरों में: भोपाल, इंदौर, जयपुर और लखनऊ जैसे 11 शहरों में स्थानीय निवासियों की संपत्ति का मूल्यांकन तो बढ़ा है, लेकिन नए घर खरीदारों पर होम लोन का बोझ भारी होगा। किराए के मकानों और व्यावसायिक जगहों की दरों में भी आने वाले वर्षों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।\n• निवेशकों के लिए: मेट्रो शहरों के मुकाबले टियर-2 बाजारों में प्रॉपर्टी पर सालाना रिटर्न 8 फीसदी तक पहुंचा है, जिससे पूंजी पर अधिक मुनाफा मिल रहा है। दीर्घकालिक निवेशक अब इन 11 केंद्रों की पीपीपी परियोजनाओं और औद्योगिक गलियारों के पास नई संपत्तियों की तलाश कर सकते हैं।\n• स्टार्टअप कर्मियों के लिए: करीब 50 फीसदी स्टार्टअप्स अब इन गैर-मेट्रो शहरों से काम कर रहे हैं, जिससे वहां पेशेवर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। इससे महानगरों की ओर होने वाला पलायन कम होगा और अपने गृह क्षेत्र के निकट गुणवत्तापूर्ण आवासीय कॉलोनियों की मांग बढ़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बड़ा बदलाव बुनियादी ढांचे के विकास, सरकारी पूंजीगत व्यय में तेज बढ़ोतरी और औद्योगिक गतिविधियों के विकेंद्रीकरण की वजह से संभव हुआ है।\n\n• इंफ्रास्ट्रक्चर व्यय में वृद्धि: कुल सरकारी बजट में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 2014-15 के 39 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2025-26 में 55 फीसदी पहुंच गई है। इन निधियों का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों में रिंग रोड, बेहतर राजमार्ग और हवाई अड्डों के निर्माण में लगाया गया है।\n• विशाल पीपीपी परियोजनाएं: सरकार की तीन वर्षीय पाइपलाइन में 17 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 852 सार्वजनिक-निजी भागीदारी योजनाएं शामिल हैं। यह विशाल पूंजी प्रवाह गैर-मेट्रो क्षेत्रों में आधुनिक लॉजिस्टिक्स और उद्योग स्थापित करने में मददगार साबित हो रहा है।\n• जनसांख्यिकी और शहरीकरण: महानगरों के बाहर आबादी की वृद्धि दर 28.2 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि बड़े शहरों में यह केवल 8.7 फीसदी है। जनसंख्या के इस फैलाव ने नए आवासीय इलाकों, कॉलोनियों और कमर्शियल हब की आवश्यकता को जन्म दिया है।\n• स्टार्टअप्स का गैर-मेट्रो रुख: देश के 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में से आधे अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से चल रहे हैं। वहां सस्ते कार्यालय और कम लागत के कारण युवाओं को स्थानीय स्तर पर वेतन मिल रहा है, जिससे आवास की क्रय शक्ति बढ़ी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उभरते 11 शहरों में पिछले पांच वर्षों में मकानों की कीमतें कितने फीसदी बढ़ी हैं?\nसाल 2021 से 2026 के बीच इन 11 उभरते टियर-2 शहरों में आवासीय संपत्तियों के दामों में 63 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।\n\n2. शीर्ष आठ महानगरों की तुलना में इन उभरते शहरों में विकास दर कैसी रही?\nसमान अवधि में शीर्ष आठ महानगरों में कीमतें लगभग 42 फीसदी बढ़ीं, जबकि 2016 से 2026 के दशक में उभरते शहरों की वार्षिक वृद्धि दर 8 फीसदी रही जो महानगरों की 4 फीसदी दर से दोगुनी है।\n\n3. इस सूची में देश के कौन-से 11 शहर शामिल हैं?\nइस सूची में भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापत्तनम और कोयंबटूर शामिल हैं।\n\n4. सरकारी खर्च में बुनियादी ढांचे की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है?\nदेश के कुल सरकारी खर्च में बुनियादी ढांचे का हिस्सा वित्तवर्ष 2014-15 के 39 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2025-26 में 55 फीसदी हो गया है।\n\n5. पीपीपी मॉडल के तहत कितनी परियोजनाओं पर काम चल रहा है?\nसरकार की तीन वर्षीय सार्वजनिक-निजी भागीदारी पाइपलाइन में 17 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 852 परियोजनाएं शामिल हैं।\n\n6. महानगरों के बाहर आबादी बढ़ने की अनुमानित दर क्या है?\nशीर्ष आठ महानगरों से बाहर के शहरों में आबादी 28.2 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि शीर्ष आठ महानगरों में यह वृद्धि मात्र 8.7 फीसदी रहने की संभावना है।\n\n7. छोटे शहरों में स्टार्टअप्स की क्या स्थिति है?\nदेश के 2 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स में से लगभग 50 फीसदी टियर-2 और टियर-3 शहरों से अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/business/housing-prices-surge-63-percent-across-11-emerging-cities-as-real-estate-boom-shifts-beyond-metros-33428",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-19",
  "tags": [
    "रियल एस्टेट",
    "मकानों की कीमतें",
    "टियर 2 शहर",
    "प्रॉपर्टी निवेश",
    "आवासीय बाजार",
    "बुनियादी ढांचा"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}