# धान की फसल में रंग बदल रही पत्तियां और खरपतवार हैं खतरे का संकेत, जानिए कैसे करें बचाव

> धान की फसल में अगस्त के महीने में खरपतवार और खैरा रोग का खतरा बढ़ जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर उचित कदम उठाकर फसल को भारी नुकसान से बचाया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/how-to-protect-late-sown-paddy-crops-from-weeds-and-khaira-disease-15220 · **Language:** Hindi
**Tags:** धान की खेती, खैरा रोग, कृषि सलाह, खरपतवार नियंत्रण, फसल सुरक्षा, गोरखपुर कृषि

गोरखपुर जिले में अगस्त का महीना शुरू होते ही धान की खेती करने वाले अन्नदाताओं के सामने नई-नई चुनौतियां सामने आने लगती हैं। विशेष तौर पर उन किसानों की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाती हैं, जिन्होंने धान की रोपाई या बुवाई सामान्य समय के मुकाबले थोड़ी देरी से की है। ऐसे खेतों में घास और अवांछित पौधे बहुत तेजी से फैलने लगते हैं। खेत में जरूरत से ज्यादा खरपतवार उग जाने के कारण मुख्य फसल को मिट्टी से पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व, पानी और सूर्य की धूप नहीं मिल पाती है, जिसका सीधा असर पौधों की सेहत और अंत में मिलने वाले कुल उत्पादन पर पड़ता है।

## खरपतवार और पोषक तत्वों की जंग
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के प्रोफेसर आर.आर. सिंह का कहना है कि जिन खेतों में धान की बुवाई देरी से हुई है, वहां शुरुआती दिनों में ही घास-फूस पर काबू पाना बहुत आवश्यक होता है। यदि समय रहते इनका सही प्रबंधन नहीं किया गया, तो ये अवांछित पौधे धान के पौधों के साथ जमीन में मौजूद जरूरी पोषक तत्वों को हासिल करने के लिए मुकाबला करने लगते हैं, जिससे फसल कमजोर होने लगती है।

## बुवाई के पहले महीने में ही करें खरपतवार का खात्मा
प्रोफेसर आर.आर. सिंह के अनुसार धान की बुवाई के लगभग एक महीने के भीतर खेत में खरपतवार की वास्तविक स्थिति का आकलन कर नॉमिनी गोल्ड का उपयोग किया जा सकता है। इसका छिड़काव यदि सही समय पर और तय की गई मात्रा के अनुसार किया जाए, तो खेत में उगने वाली कई प्रकार की घासों और खरपतवारों को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है। हालांकि, किसी भी तरह के खरपतवारनाशक रसायन का छिड़काव करने से पहले किसानों को यह सलाह दी जाती है कि वे उत्पाद के पैकेट पर छपे लेबल को अच्छी तरह पढ़ लें और धान की फसल के लिए तय की गई मात्रा तथा इस्तेमाल करने की सही विधि की पूरी जानकारी अवश्य हासिल कर लें।

## खैरा रोग बन सकता है बड़ी मुसीबत
अगस्त के महीने में धान की हरी-भरी फसल के सामने एक और बड़ी बीमारी आने का जोखिम रहता है जिसे खैरा रोग कहा जाता है। यह बीमारी मुख्य रूप से खेतों में जिंक यानी जस्ते की कमी के कारण पैदा होती है। जब धान की फसल इस रोग की चपेट में आती है, तो पौधों की हरी पत्तियां धीरे-धीरे कत्थई या भूरे रंग की होने लगती हैं और उनका विकास रुक जाता है।

## जिंक सल्फेट और यूरिया का घोल है कारगर उपाय
प्रोफेसर आर.आर. सिंह बताते हैं कि यदि किसानों को अपने खेतों में इस तरह के लक्षण नजर आएं, तो उन्हें तुरंत जिंक सल्फेट का प्रयोग करना चाहिए। इस समस्या से निपटने के लिए पांच किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से लेकर उसे दो प्रतिशत यूरिया के घोल के साथ अच्छी तरह मिला लेना चाहिए और फिर इस तैयार मिश्रण का छिड़काव फसल के ऊपर करना चाहिए।

## सतर्कता और समय पर देखभाल से होगी बंपर पैदावार
धान की खेती में शुरुआती अवस्था सबसे ज्यादा संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसानों को चाहिए कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का मुआयना करते रहें। यदि पौधों में खरपतवार की समस्या दिखे या पत्तियों के रंग में कोई असामान्य बदलाव नजर आए, तो बिना देर किए किसी कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। खरपतवारों का समय रहते नियंत्रण करना और जिंक की कमी को तुरंत पूरा करना फसल की वृद्धि को सही दिशा में रखता है, जिससे किसानों को अंत में अच्छी पैदावार मिलने की पूरी संभावना रहती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** धान की खेती से जुड़े किसानों को अगस्त महीने में खरपतवार और जिंक की कमी से होने वाले खैरा रोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि समय पर उपाय न करने से पैदावार घट सकती है।

**गोरखपुर में:** स्थानीय किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेतों की नियमित निगरानी करें और लक्षण दिखते ही अनुशंसित मात्रा में जिंक सल्फेट या खरपतवारनाशक का उपयोग करें।

## सवाल-जवाब

### 1. धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण कब करना चाहिए?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की बुवाई के एक महीने के अंदर खरपतवार की स्थिति देखकर नियंत्रण करना बेहद जरूरी है।

### 2. धान के खेत में खरपतवार हटाने के लिए किस उत्पाद का सुझाव दिया गया है?
बुवाई के करीब एक महीने के अंदर खेत की स्थिति देखकर नॉमिनी गोल्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

### 3. धान में खैरा रोग मुख्य रूप से किस तत्व की कमी से होता है?
खैरा रोग मुख्य रूप से जिंक यानी जस्ते की कमी से जुड़ा होता है।

### 4. खैरा रोग होने पर पत्तियां किस रंग की हो जाती हैं?
खैरा रोग की चपेट में आने पर धान की पत्तियां कत्थई या भूरे रंग की दिखाई देने लगती हैं।

### 5. खैरा रोग के उपचार के लिए क्या छिड़काव करना चाहिए?
पांच किलो जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर को दो प्रतिशत यूरिया के घोल के साथ मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।

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