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  "type": "article",
  "title": "आईडीबीआई बैंक कर्मचारियों की 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल, विदेशी हिस्सेदारी बिक्री का विरोध",
  "summary": "आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की साठ प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स को बेचने के विरोध में बैंक कर्मियों ने 2 और 3 नवंबर 2026 को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।",
  "content": "आईडीबीआई बैंक के कामकाज पर अगले महीने की शुरुआत में बड़ा असर पड़ सकता है। बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने 2 और 3 नवंबर 2026 को पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन को बैंक कर्मचारियों के प्रमुख संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का भी पूरा समर्थन हासिल हो गया है। इसके चलते दोनों दिनों में शाखाओं में नियमित बैंकिंग कामकाज प्रभावित होने की पूरी संभावना बन गई है। किसी शाखा में सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वहां के कर्मचारी किस स्तर पर इस आंदोलन में हिस्सा लेते हैं।\n\nहड़ताल का कार्यक्रम और यूनियनों का रुख\nआईडीबीआई बैंक के कर्मियों के संयुक्त मंच ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध कार्यक्रमों की एक पूरी रूपरेखा तैयार की है। यह आंदोलन चरणबद्ध प्रदर्शनों के बाद 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल के रूप में संपन्न होगा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 22 अक्टूबर 2026 को औपचारिक पत्र लिखकर इस हड़ताल को अपना खुला समर्थन दिया। संगठन ने अपने सभी घटक सदस्यों से भी अपील की है कि वे आईडीबीआई बैंक कर्मचारियों के इस आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल हों। इसके साथ ही फोरम ने अपनी तरफ से भी समर्थन कार्यक्रमों की एक सूची घोषित की है। इन हालातों को देखते हुए आम ग्राहकों को परामर्श दिया गया है कि वे अपने जरूरी वित्तीय और बैंकिंग काम समय से पहले निपटा लें, ताकि हड़ताल के दिनों में किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।\n\nविदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेचने पर तकरार\nकर्मचारियों और अधिकारियों के इस व्यापक विरोध की मुख्य वजह बैंक के विनिवेश का फैसला है। केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम मिलकर आईडीबीआई बैंक में अपनी कुल 60 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा के निवेशक फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की तैयारी कर रहे हैं। बैंक यूनियनें इस योजना का पुरजोर विरोध कर रही हैं। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आईडीबीआई बैंक वर्तमान में एक पूरी तरह मुनाफे में चलने वाला वित्तीय संस्थान है और इसके पास लाखों आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई की जमा पूंजी सुरक्षित है। यूनियनों का कहना है कि इतने मजबूत बैंक का मालिकाना हक किसी विदेशी निजी निवेशक को सौंपना सार्वजनिक क्षेत्र की अवधारणा पर चोट करता है और यह कदम आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय संकल्प के भी एकदम उलट है।\n\nसंसद में दिए गए पुराने वादे की याद\nयूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने अपने पत्र में केंद्र सरकार के दो दशक पुराने औपचारिक आश्वासन की याद भी ताजा कराई है। संगठन का उल्लेख है कि दिसंबर 2003 में जब संसद में आईडीबीआई से जुड़े विशेष कानून को निरस्त कर उसे एक सामान्य बैंकिंग कंपनी में बदलने पर बहस चल रही थी, तब तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने संसद के पटल पर भरोसा दिया था। उस समय सरकार ने यह आश्वासन दर्ज कराया था कि आईडीबीआई में सरकारी हिस्सेदारी कभी भी 51 फीसदी से कम नहीं होने दी जाएगी। बाद में इस बात की पुष्टि संसद की एक समिति के समक्ष भी की गई थी। कर्मचारी संघों का कहना है कि संसद में दिए गए उस ऐतिहासिक वादे को दरकिनार कर बैंक को निजी हाथों में सौंपना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।\n\nइसका आप पर असर\nइस हड़ताल से आईडीबीआई बैंक के खाताधारकों और सामान्य बैंकिंग सेवाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• शाखा सेवाओं में बाधा: 2 और 3 नवंबर 2026 को आईडीबीआई बैंक की शाखाओं में चेक क्लीयरेंस और नकदी जमा या निकासी जैसे काम अटक सकते हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे आवश्यक लेनदेन अक्टूबर के अंतिम दिनों में ही पूरा कर लें।\n• डिजिटल माध्यमों का विकल्प: हड़ताल के दौरान नेट बैंकिंग, यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। शाखा जाने से बचने के लिए उपभोक्ता ऑनलाइन लेनदेन और मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं।\n• एटीएम नकदी की उपलब्धता: हड़ताल के दो दिनों में शाखाओं से जुड़े एटीएम मशीनों में नकदी की कमी देखने को मिल सकती है। जरूरी नकदी की व्यवस्था पहले से करके रखना समझदारी होगी।\n• अन्य बैंकों के काम पर प्रभाव: चूंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने भी समर्थन दिया है, इसलिए कुछ स्थानों पर अंतर-बैंक चेक क्लीयरिंग में देरी हो सकती है। किसी भी बड़े भुगतान के लिए अतिरिक्त समय सीमा मानकर चलना बेहतर रहेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह देशव्यापी हड़ताल आईडीबीआई बैंक में सरकारी नियंत्रण घटाने और विदेशी निवेशक को बड़ी हिस्सेदारी सौंपने की योजना के सीधे विरोध में बुलाई गई है।\n\n• हिस्सेदारी बेचने का सरकारी फैसला: केंद्र सरकार और जीवन बीमा निगम ने बैंक की कुल साठ प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई निवेशक फेयरफैक्स को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। कर्मचारी यूनियनों का मानना है कि इससे बैंक का सार्वजनिक स्वरूप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।\n• लाभकारी संस्था के निजीकरण पर असंतोष: यूनियनों का कहना है कि आईडीबीआई बैंक मजबूत वित्तीय स्थिति और बड़े ग्राहक जमा आधार के साथ लगातार मुनाफा दर्ज कर रहा है। ऐसे स्वस्थ संस्थान की मिल्कियत विदेशी कंपनी को देना राष्ट्रीय आर्थिक हितों के विरुद्ध माना जा रहा है।\n• संसदीय वादे का उल्लंघन: वर्ष 2003 में संसद के भीतर तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि बैंक में कम से कम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी हमेशा बनी रहेगी। कर्मचारी इस वादे को तोड़े जाने को अनुचित ठहरा रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों ने किस दिन हड़ताल का ऐलान किया है?\nकर्मचारियों और अधिकारियों ने 2 और 3 नवंबर 2026 को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।\n\n2. इस हड़ताल को किस प्रमुख यूनियन संगठन का समर्थन मिला है?\nइस हड़ताल को बैंक यूनियनों के शीर्ष मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) का औपचारिक समर्थन प्राप्त हुआ है।\n\n3. आईडीबीआई बैंक कर्मचारी किस बात का विरोध कर रहे हैं?\nवे सरकार और एलआईसी द्वारा बैंक में अपनी 60 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की योजना का विरोध कर रहे हैं।\n\n4. हड़ताल के पीछे संसद के किस आश्वासन का हवाला दिया गया है?\nदिसंबर 2003 में संसद में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने भरोसा दिया था कि आईडीबीआई में सरकार कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखेगी।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-24",
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