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  "type": "article",
  "title": "आईडीबीआई बैंक में दो दिन का कामकाज ठप, निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का देशव्यापी प्रदर्शन",
  "summary": "आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में कर्मचारी संगठनों ने 2 और 3 नवंबर को 48 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे शाखाओं में सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।",
  "content": "आईडीबीआई बैंक के खाताधारकों को आने वाले दो दिनों में बैंकिंग कार्यों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर बैंक के 10,000 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी 2 नवंबर और 3 नवंबर को 48 घंटे की देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार और प्रबंधन द्वारा बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ आयोजित किया गया है। दो दिवसीय कार्य बहिष्कार की वजह से देशभर में बैंक की शाखाओं का सामान्य परिचालन, काउंटर सेवाएं, नकदी लेन-देन और चेक क्लियरेंस प्रक्रिया बड़े पैमाने पर प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।\n\nनिजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग\nकर्मचारी यूनियनों ने सरकार और बैंक प्रबंधन से निजीकरण की पूरी योजना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई है। कर्मचारी संगठनों का स्पष्ट तर्क है कि आईडीबीआई बैंक की वर्तमान सुदृढ़ स्थिति किसी निजी पूंजी या निवेश का परिणाम नहीं है। बैंक संकट के दौर से निकलकर आज जिस मजबूत मुकाम पर पहुंचा है, वह भारत सरकार, भारतीय जीवन बीमा निगम और बैंक कर्मियों के अनवरत परिश्रम तथा सामूहिक प्रयासों की बदौलत संभव हुआ है। जब संस्थान गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा था, उस नाजुक दौर में कर्मचारियों ने ग्राहकों का अटूट विश्वास कायम रखा और बैंकिंग सेवाओं को सुचारू बनाए रखकर इसे दोबारा मजबूती से खड़ा किया। इसके साथ ही सरकार और जीवन बीमा निगम ने पुनर्गठन के लिए जरूरी वित्तीय मदद भी उपलब्ध कराई थी।\n\nसंकट के दौर से मजबूत वित्तीय स्थिति तक का सफर\nबैंक का वित्तीय इतिहास बताता है कि वर्ष 2016 से लेकर 2020 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई एसेट क्वालिटी रिव्यू प्रक्रिया के बाद भारी मात्रा में फंसे हुए कर्जों यानी एनपीए की पहचान हुई थी। इसके चलते बैंक को उस वक्त बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा था। उस संकटपूर्ण स्थिति से बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम ने मिलकर 46,000 करोड़ रुपए से अधिक की पूंजीगत सहायता बैंक को प्रदान की थी।\n\nरिकॉर्ड मुनाफा और सुधरे वित्तीय अनुपात\nयूनियन के अनुसार इस बड़े वित्तीय सहयोग और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के दम पर बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त सुधार दर्ज किया है। पिछले छह वर्षों के भीतर बैंक ने 30,100 करोड़ रुपए से अधिक का संचयी शुद्ध मुनाफा हासिल किया है। इसके अलावा, संपत्ति गुणवत्ता में भी भारी सुधार दर्ज हुआ है। वर्ष 2018 में जहां बैंक का सकल एनपीए अनुपात 31.78 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गया था, वह अब घटकर मात्र 2.30 प्रतिशत रह गया है।\n\nसंगठन द्वारा साझा किए गए वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक बैंक का नेट एनपीए घटकर सिर्फ 0.16 प्रतिशत पर आ चुका है। इसके साथ ही पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.38 प्रतिशत और प्रोविजन कवरेज अनुपात 99.31 प्रतिशत के ऐतिहासिक स्तर को छू चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि यह सभी आंकड़े इस बात का ठोस प्रमाण हैं कि बैंक अब पूरी तरह से आत्मनिर्भर, सुरक्षित और मुनाफे में चल रहा है, इसलिए इसे निजी हाथों में सौंपने का कोई औचित्य नहीं बनता।\n\nइसका आप पर असर\nआईडीबीआई बैंक की दो दिवसीय हड़ताल के कारण शाखाओं में प्रत्यक्ष काउंटर सेवाएं और चेक क्लियरेंस पूरी तरह बाधित रह सकते हैं।\n\n• शाखा सेवाओं पर असर: बैंक शाखाओं में 2 और 3 नवंबर को नकदी जमा, निकासी और पासबुक अपडेट जैसी काउंटर सेवाएं प्रभावित रहेंगी। आवश्यक बैंकिंग कार्यों के लिए डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल ऐप और एटीएम का उपयोग करना बेहतर रहेगा।\n• चेक क्लियरेंस में देरी: हड़ताल के दौरान क्लियरेंस हाउस और शाखाओं में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण चेक प्रोसेस होने में 48 घंटे या उससे अधिक का अतिरिक्त समय लग सकता है। किसी भी जरूरी भुगतान या ईएमआई बाउंस से बचने के लिए खाते में पर्याप्त शेष राशि पहले से सुनिश्चित करें।\n• ग्राहकों के लिए विकल्प: नेट बैंकिंग और यूपीआई के जरिए होने वाले ऑनलाइन फंड ट्रांसफर सामान्य रूप से चालू रहने की उम्मीद है। यदि कोई तत्काल लेन-देन करना हो तो शाखा जाने के बजाय ऑनलाइन माध्यमों का सहारा लें।\n• कर्मचारी परिप्रेक्ष्य: हड़ताल के जरिए कर्मचारी भविष्य में नौकरी की सुरक्षा और संस्थान के स्वामित्व ढांचे को लेकर अपनी चिंताएं रख रहे हैं। सरकार के आगामी रुख पर बैंक के परिचालन और प्रशासनिक ढांचे का भविष्य निर्भर करेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह देशव्यापी हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के विरोध में बुलाई गई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि वित्तीय रूप से मजबूत हो चुके बैंक को निजी हाथों में सौंपना अनुचित है।\n\n• निजीकरण का विरोध: केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन द्वारा शुरू की गई विनिवेश एवं निजीकरण की योजना के खिलाफ कर्मचारी यूनियनें आंदोलन कर रही हैं। उनका मुख्य तर्क यह है कि करदाताओं और सार्वजनिक संस्थानों के सहयोग से उबारे गए बैंक का निजीकरण नहीं होना चाहिए।\n• सार्वजनिक पूंजी से वित्तीय सुधार: वर्ष 2016 से 2020 के बीच भारी एनपीए संकट के समय सरकार और एलआईसी ने 46,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की वित्तीय सहायता देकर बैंक को संकट से निकाला था। कर्मचारियों का कहना है कि इस सार्वजनिक पूंजी और कर्मचारियों के प्रयासों से बैंक दोबारा मुनाफे में लौटा है।\n• मजबूत बैलेंस शीट का हवाला: बैंक ने पिछले छह वर्षों में 30,100 करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया है और अपना नेट एनपीए घटाकर 0.16 प्रतिशत तक सीमित कर लिया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब संस्थान पहले से वित्तीय रूप से बेहद मजबूत और आत्मनिर्भर हो चुका है, तब निजीकरण का कोई तार्किक कारण नहीं बनता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आईडीबीआई बैंक में हड़ताल किस तारीख को रखी गई है?\nआईडीबीआई बैंक के कर्मचारी 2 नवंबर और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे।\n\n2. इस हड़ताल का आह्वान किस संगठन ने किया है?\nयह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज द्वारा बुलाई गई है।\n\n3. कर्मचारी हड़ताल क्यों कर रहे हैं?\nकर्मचारी केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन द्वारा आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के फैसले का विरोध कर रहे हैं।\n\n4. हड़ताल के दौरान बैंक की किन सेवाओं पर असर पड़ेगा?\nशाखाओं में सामान्य कामकाज, काउंटर सेवाएं, नकदी लेन-देन और चेक क्लियरेंस पर प्रभाव पड़ने की आशंका है।\n\n5. संकट के समय बैंक को कितनी वित्तीय मदद मिली थी?\nवर्ष 2016 से 2020 के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम ने बैंक को उबारने के लिए 46,000 करोड़ रुपए से अधिक की सहायता दी थी।\n\n6. पिछले छह वर्षों में बैंक ने कितना शुद्ध लाभ कमाया है?\nबैंक ने पिछले छह वर्षों में 30,100 करोड़ रुपए से अधिक का संचयी शुद्ध मुनाफा हासिल किया है।\n\n7. वर्तमान में बैंक का सकल और नेट एनपीए अनुपात कितना है?\nबैंक का सकल एनपीए अनुपात घटकर 2.30 प्रतिशत और नेट एनपीए अनुपात मात्र 0.16 प्रतिशत पर आ गया है।",
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  "publishedAt": "2026-11-01",
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