# अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर जताया भरोसा, दोनों वर्षों के लिए विकास दर 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद

> अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की विकास दर के अनुमान में इजाफा करते हुए 2026 और 2027 में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की सक्रियता इस तेजी के मुख्य आधार हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/imf-ne-bharatiya-arthavyavastha-para-jataya-bharosa-donon-varshon-ke-lie-vikasa-dara-7-pratishata-rahane-ki-ummida-47516 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय अर्थव्यवस्था, आईएमएफ, जीडीपी विकास दर, वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक, कच्चा तेल, आर्थिक वृद्धि

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती साबित की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपने ताजा आकलन में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ा दिया है। वित्तीय संस्थान के अनुसार देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 2026 और 2027 दोनों वर्षों में 7 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ सकती है। मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार को इस सकारात्मक बदलाव की मुख्य वजह बताया गया है।

## विकास दर के अनुमानों में हुआ ठोस सुधार
अक्टूबर 2026 के लिए जारी अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान जुलाई में जारी 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 7 प्रतिशत तय किया है। यह पूर्व अनुमान के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक की सीधी बढ़ोतरी दर्शाता है। यदि इसकी तुलना अप्रैल में जारी अनुमान से की जाए, तो यह 0.5 प्रतिशत अंक अधिक दर्ज किया गया है।

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इसी प्रकार 2027 के परिदृश्य में भी सकारात्मक संशोधन देखने को मिला है। संस्थान ने 2027 के लिए भी भारतीय विकास दर का अनुमान 7 प्रतिशत तय किया है। यह आंकड़ा जुलाई के अनुमान से 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल में तय किए गए अनुमान से 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा है। आईएमएफ ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल के ऊंचे दामों के बावजूद देश का मजबूत आंतरिक बाजार इस रफ्तार को बरकरार रखने में सक्षम है।

## अर्थव्यवस्था की इस मजबूती के मुख्य आधार
आईएमएफ के विश्लेषण में रेखांकित किया गया है कि भारत की आर्थिक गतिविधियों को कई आंतरिक कारकों से निरंतर सहारा मिल रहा है

- **सशक्त घरेलू बाजार:** देश के भीतर निरंतर हो रही निजी खपत और खरीद आर्थिक गतिविधियों को नई ऊंचाई दे रही है।
- **सेवा क्षेत्र का विस्तार:** आईटी, बैंकिंग, पर्यटन और पेशेवर सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में तेज गतिविधियां समग्र विकास को गति प्रदान कर रही हैं।
- **जनसांख्यिकी का लाभ:** भारत की विशाल और युवा कार्यशील आबादी दीर्घकालिक उत्पादन और उपभोग क्षमता को बढ़ावा दे रही है।
- **नीतिगत व संरचनात्मक सुधार:** शासन स्तर पर किए जा रहे ढांचागत बदलाव देश की दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ बना रहे हैं।

इन मजबूत पैमानों के चलते भारत उन चुनिंदा उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना हुआ है, जिनकी विकास संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड किया गया है।

## वैश्विक आर्थिक रफ्तार के मुकाबले आगे रहेगा भारत
भारत की तुलना में समग्र वैश्विक परिदृश्य काफी धीमा नजर आ रहा है। आईएमएफ ने वैश्विक आर्थिक विकास दर 2026 में 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। वहीं पड़ोसी देश चीन की जीडीपी वृद्धि दर 2026 में घटकर 4.5 प्रतिशत और 2027 में मात्र 4 प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान लगाया गया है।

उभरते और विकासशील एशियाई क्षेत्र की बात करें, तो इस पूरे भूभाग की औसत विकास दर 2025 में दर्ज 5.6 प्रतिशत से फिसलकर 2026 में 5.1 प्रतिशत और 2027 में 4.9 प्रतिशत पर आने की आशंका है। ऐसे माहौल में भारत का 7 प्रतिशत की गति बनाए रखना दुनिया भर के नीति निर्माताओं और निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

## महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव की चुनौतियां
उत्साहजनक अनुमानों के बावजूद कुछ गंभीर आर्थिक जोखिम बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए सबसे बड़ा वित्तीय जोखिम बनी हुई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से देश का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर व्यापार घाटे और घरेलू खुदरा महंगाई पर पड़ सकता है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली रुकावटें बाहरी मांग पर दबाव बना सकती हैं।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा भारत की विकास दर 7 प्रतिशत रहने के अनुमान से देश के रोजगार बाजार और व्यापारिक माहौल को नया संबल मिलेगा।

- **भारत में:** देश में मजबूत विकास दर से नई नौकरियों और वेतन वृद्धि की संभावनाएं बेहतर होंगी। मजबूत घरेलू मांग के चलते उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र नए निवेश की योजना बना सकते हैं।
- **कारोबार और निवेशकों के लिए:** वैश्विक सुस्ती के बीच भारत का स्थिर रहना विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा। घरेलू कंपनियों के मुनाफे और बाजार में स्थिरता की संभावनाएं मजबूत होंगी।
- **घरेलू उपभोक्ताओं के लिए:** आर्थिक गतिविधियों में तेजी से घरेलू उपभोग और मांग में स्थिरता बनी रहेगी। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों के चलते ईंधन और माल ढुलाई के खर्च पर नजर रखनी होगी।
- **महंगाई और बजट पर:** महंगे कच्चे तेल का आयात जारी रहने से खुदरा महंगाई दर पर दबाव बना रह सकता है। आम परिवारों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बढ़ते खर्चों के प्रति सचेत रहना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचे और उपभोक्ता खर्च के बल पर भारत के विकास दर अनुमानों को अपग्रेड किया है।

- **मजबूत आंतरिक मांग और खपत:** देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुस्ती का प्रभाव सीमित रहा।
- **सेवा क्षेत्र का उत्कृष्ट प्रदर्शन:** बैंकिंग, वित्त, आईटी और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निरंतर विस्तार ने विकास को गति देने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
- **ढांचागत सुधारों का प्रभाव:** निरंतर नीतिगत सुधारों और कार्यशील युवा आबादी के योगदान से उत्पादन क्षमता को नई मजबूती मिली है।
- **ऊर्जा कीमतों से उत्पन्न जोखिम:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण आयात लागत पर दबाव बना हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2026 और 2027 के लिए भारत की विकास दर का क्या अनुमान लगाया है?
आईएमएफ ने दोनों वर्षों, यानी 2026 और 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

### 2. 2026 के विकास अनुमान में जुलाई के मुकाबले कितनी बढ़ोतरी हुई है?
जुलाई 2026 के 6.4 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले इस बार 0.6 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करके इसे 7 प्रतिशत किया गया है।

### 3. भारत की इस आर्थिक मजबूती के मुख्य कारण क्या हैं?
मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र में तेज गतिविधियां, अनुकूल जनसांख्यिकी और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधार इसके प्रमुख कारण हैं।

### 4. 2026 और 2027 में वैश्विक विकास दर का क्या अनुमान है?
वैश्विक आर्थिक विकास दर 2026 में 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

### 5. चीन की विकास दर को लेकर आईएमएफ का क्या आकलन है?
चीन की जीडीपी वृद्धि दर 2026 में 4.5 प्रतिशत और 2027 में घटकर 4 प्रतिशत रहने की संभावना है।

### 6. भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष कौन सी मुख्य चुनौतियां बनी हुई हैं?
महंगा कच्चा तेल मुख्य जोखिम है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है और खुदरा महंगाई पर दबाव आ सकता है।

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