# इन 6 पेड़ों से खेतों को मिलेगी सुरक्षा और किसानों को होगी अतिरिक्त कमाई

> मानसून में खेत की सीमा पर करंज, करौंदा, बांस, नीम, बबूल और खेजड़ी जैसे पौधे लगाकर किसान फसल को आवारा पशुओं से बचा सकते हैं और आगे चलकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/ina-6-peron-se-kheton-ko-milegi-suraksha-aura-kisanon-ko-hogi-atirikta-kamai-9263 · **Language:** Hindi
**Tags:** खेती के टिप्स, मेड़ पर पौधे, करंज का पेड़, बांस की खेती, नीम के फायदे, बबूल और खेजड़ी, किसानों की कमाई

बरसात का मौसम पेड़-पौधे लगाने के लिहाज से सबसे मुफीद समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान लगाई गई पौध जल्दी जड़ पकड़ लेती है और उसके सूखने का खतरा भी कम रहता है। कृषि जानकारों का कहना है कि अगर किसान अपने खेतों की सीमा पर कुछ चुनिंदा पेड़-पौधे उगाएं, तो इससे एक तरफ फसल आवारा पशुओं से महफूज रहती है, तो दूसरी तरफ आने वाले सालों में कमाई का एक नया जरिया भी बन जाता है।

## कम खर्च में लंबे समय तक फायदा
इन पेड़ों को लगाने में किसानों को ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता, जबकि इनसे मिलने वाला लाभ बरसों तक बना रहता है। सूची में सबसे पहला नाम करंज के पेड़ का आता है, जो तेजी से बड़ा होता है। इसकी घनी टहनियां खेत के चारों ओर एक प्राकृतिक घेरे जैसा काम करती हैं। इसके बीज से निकलने वाला तेल औद्योगिक इस्तेमाल के साथ-साथ जैविक कीटनाशक बनाने में भी काम आता है, वहीं इसकी पत्तियों से जैविक खाद तैयार होती है।

## करौंदे की कांटेदार बाड़ और बांस से मिलती मजबूती
करौंदे का पौधा खेत की सीमा पर लगाने से घना कांटेदार झुरमुट बन जाता है, जिसकी वजह से नीलगाय समेत दूसरे आवारा जानवर आसानी से अंदर नहीं घुस पाते। बाजार में करौंदे के फल की मांग रहती है, जिससे किसान की जेब में अतिरिक्त पैसा आता है। इसी तरह बांस को अक्सर हरित सोना कहकर पुकारा जाता है। इसकी मजबूत जड़ें मिट्टी को बहने से रोकती हैं और सीमा को ठोस बनाए रखती हैं। चंद सालों बाद बांस बेचकर भी अच्छी रकम मिल सकती है, साथ ही इसका इस्तेमाल घर बनाने और रोजमर्रा के कामों में भी होता है।

## नीम बना प्राकृतिक कीटनाशक
नीम का पेड़ पर्यावरण के हिसाब से बेहद कारगर माना गया है। इसके पत्ते और बीज घर में बने कीटनाशक जैसा असर दिखाते हैं, जिससे खेत के नजदीक कई नुकसानदेह कीड़ों का असर घट जाता है। आगे चलकर नीम की लकड़ी और बीज बेचकर भी कमाई की जा सकती है।

## सूखे इलाकों के लिए बबूल और खेजड़ी बेहतर विकल्प
जिन इलाकों में पानी की कमी रहती है, वहां बबूल और खेजड़ी दोनों बेहतरीन विकल्प साबित होते हैं। इनके कांटेदार तने खेत की हिफाजत बढ़ाते हैं और जानवरों को अंदर आने से रोकते हैं। खेजड़ी के पत्ते मवेशियों को अच्छा और पौष्टिक चारा देते हैं, वहीं इसकी लकड़ी और फलियां बेचकर भी किसानों को पैसा मिल जाता है।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी सीधे तौर पर किसानों के काम की है, खासकर उन इलाकों में जहां आवारा पशुओं से फसल को खतरा बना रहता है।

- **किसानों के लिए:** खेत की सीमा पर ये पौधे लगाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है और आगे चलकर लकड़ी, फल या बीज बेचकर अतिरिक्त कमाई भी की जा सकती है।
- **कम लागत में फायदा:** इन पौधों को लगाने में ज्यादा पैसा नहीं लगता, इसलिए छोटी जोत वाले किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
मानसून का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस दौरान लगाए गए पौधे जल्दी जड़ पकड़ लेते हैं और उनके सूखने का खतरा कम रहता है।

### 2. खेत की सीमा पर कौन-कौन से पौधे लगाने की सलाह दी गई है?
करंज, करौंदा, बांस, नीम, बबूल और खेजड़ी, इन 6 पौधों को लगाने की सलाह दी गई है।

### 3. ये पौधे आवारा पशुओं से फसल को कैसे बचाते हैं?
करौंदा, बबूल और खेजड़ी जैसे पौधों की कांटेदार झाड़ियां और तने एक प्राकृतिक सुरक्षा घेरे का काम करते हैं, जिससे नीलगाय और अन्य आवारा पशु खेत में आसानी से नहीं घुस पाते।

### 4. इन पौधों से किसानों को अतिरिक्त कमाई कैसे होगी?
करौंदे के फल बाजार में बिकते हैं, बांस कुछ सालों बाद बेचा जा सकता है, और नीम, बबूल, खेजड़ी की लकड़ी, बीज व फलियां भी आर्थिक रूप से उपयोगी होती हैं।

### 5. क्या ये पौधे लगाने में ज्यादा खर्च आता है?
नहीं, इन पौधों को लगाने में ज्यादा पैसा नहीं लगता, फिर भी ये लंबे समय तक किसानों को फायदा पहुंचाते हैं।

### 6. सूखे इलाकों के किसानों के लिए कौन से पौधे बेहतर हैं?
शुष्क क्षेत्रों के लिए बबूल और खेजड़ी दोनों अच्छे विकल्प माने गए हैं, क्योंकि ये कम पानी में भी पनपते हैं और खेत की सुरक्षा बढ़ाते हैं।

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