भारत और सिंगापुर के बीच जुड़ेगा 3000 किमी लंबा बिजली कॉरिडोर, पांच देशों से गुजरेगी नई ट्रांसमिशन लाइन इम्फाल से सिंगापुर तक 3,000 किलोमीटर लंबी क्रॉस बॉर्डर बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की तैयारी है, जिसके जरिए 2,000 मेगावाट बिजली का ट्रांसमिशन होगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा साझेदारी को नया आयाम देते हुए भारत और सिंगापुर के बीच एक विशाल क्रॉस बॉर्डर बिजली ट्रांसमिशन कॉरिडोर तैयार करने की योजना पर सहमति बनी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूर्वोत्तर भारत के इम्फाल से शुरू होकर म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया से होते हुए सिंगापुर तक पहुंचेगी। कुल 3,000 किलोमीटर लंबाई वाले इस ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए लगभग 2,000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति सीधे दोनों देशों के बीच संभव हो सकेगी। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 10वें पूर्वी एशिया ऊर्जा सम्मेलन में दोनों देशों के ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान इस विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई। क्षेत्रीय बिजली ग्रिड विस्तार और ऊर्जा कूटनीति यह परियोजना भारत के अपने सीमाई पड़ोसियों से आगे बढ़कर व्यापक क्षेत्रीय ग्रिड तैयार करने के प्रयासों का हिस्सा है। भारत पहले से ही नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार के साथ क्रॉस बॉर्डर बिजली कनेक्शन संचालित कर रहा है और इन देशों को बिजली का निर्यात भी करता है। इसके अलावा श्रीलंका के साथ समुद्री इंटरकनेक्शन स्थापित करने को लेकर बातचीत चल रही है, जबकि भारतीय बिजली ग्रिड को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पश्चिमी ग्रिडों से जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस की महत्वाकांक्षी पहल 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड' के तहत अंतर-क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करने में जुटा हुआ है। सिंगापुर का लक्ष्य और जमीन से आपूर्ति की रणनीति केंद्रीय बिजली मंत्री श्रीपद नाइक के अनुसार, सिंगापुर एनर्जी मार्केट अथॉरिटी ने वर्ष 2035 तक 6 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा आयात करने का लक्ष्य तय किया है। प्रस्तावित योजना के तहत इस क्लीन एनर्जी को जमीनी रास्ते से ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए सिंगापुर तक पहुंचाया जाएगा। इस पूरे कॉरिडोर के निर्माण से भारत न केवल अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकेगा, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया में एक प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा निर्यातक के रूप में भी उभरेगा। भारतीय ऊर्जा संस्थानों की भागीदारी आसियान देशों के साथ इस बड़े ऊर्जा गठजोड़ को धरातल पर उतारने के लिए कई प्रमुख भारतीय तकनीकी और ऊर्जा संस्थान काम कर रहे हैं। इस अभियान में एनटीपीसी, पॉवर ग्रिड कॉरपोरेशन, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी जैसी अग्रणी संस्थाएं तकनीकी अध्ययन और ग्रिड तालमेल बिठाने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इन संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से ट्रांसमिशन क्षमता और तकनीकी मानकों को पांचों देशों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल तैयार किया जा रहा है। इसका आप पर असर इस बहुराष्ट्रीय बिजली कॉरिडोर से भारत के ऊर्जा निर्यात को सीधा बढ़ावा मिलेगा और पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। • भारत में प्रभाव: देश के बिजली उत्पादकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए राजस्व और निर्यात के अवसर खुलेंगे। इससे देश में बड़े सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना को नई गति मिलेगी। • इम्फाल और पूर्वोत्तर में: पूर्वोत्तर क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा ट्रांसमिशन के एक अहम केंद्र के रूप में विकसित होगा। स्थानीय स्तर पर उन्नत ग्रिड निर्माण और तकनीकी नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। • ऊर्जा व्यापार के नियम: पांच देशों के बीच नए ट्रांसमिशन और टैरिफ समझौते तैयार किए जाएंगे। सीमा पार बिजली की नियमित खरीद-फरोख्त के लिए स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू होगा। • स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों पर असर: सिंगापुर को बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी निर्यात करने का रास्ता साफ होगा। इससे पूरे क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ सिंगापुर अपनी स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर बिजली आयात करना चाहता है, जबकि भारत अपनी सीमा पार ऊर्जा निर्यात क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। मनीला में आयोजित पूर्वी एशिया ऊर्जा बैठक के दौरान दोनों देशों ने साझा हितों को देखते हुए इस समझौते को आगे बढ़ाया। • सिंगापुर का आयात लक्ष्य: सिंगापुर की ऊर्जा बाजार प्राधिकरण ने वर्ष 2035 तक 6 गीगावाट स्वच्छ बिजली आयात करने की रूपरेखा तैयार की है। सीमित भूमि क्षेत्रफल के कारण सिंगापुर को बड़े पैमाने पर बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदनी होगी। • भारत की ग्रिड कूटनीति: भारत अपनी सीमाओं के पार बिजली नेटवर्क जोड़कर पड़ोसी देशों के साथ मजबूत ऊर्जा साझेदारी स्थापित कर रहा है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में सफल आपूर्ति के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया तक नेटवर्क का विस्तार अगला स्वाभाविक कदम है। • क्षेत्रीय सहमति: मनीला में ऊर्जा मंत्रियों के बीच हुई वार्ता के बाद पांच देशों से गुजरने वाले इस मार्ग पर व्यावहारिक सहमति बनी। पांचों देशों के माध्यम से जमीन पर केबल बिछाने को सबसे व्यवहार्य तकनीकी विकल्प माना गया है। सवाल-जवाब 1. प्रस्तावित भारत-सिंगापुर बिजली कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है? इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 3,000 किलोमीटर होगी, जो पांच देशों से होकर गुजरेगी। 2. यह ट्रांसमिशन लाइन किन-किन देशों से होकर निकलेगी? यह लाइन भारत के इम्फाल से शुरू होकर म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया के रास्ते सिंगापुर पहुंचेगी। 3. इस पावर प्रोजेक्ट की ट्रांसमिशन क्षमता कितनी होगी? प्रारंभिक योजना के तहत यह परियोजना लगभग 2,000 मेगावाट बिजली ट्रांसमिशन क्षमता की होगी। 4. सिंगापुर का वर्ष 2035 तक क्या बिजली आयात लक्ष्य है? सिंगापुर एनर्जी मार्केट अथॉरिटी ने वर्ष 2035 तक 6 गीगावाट स्वच्छ बिजली खरीदने का लक्ष्य तय किया है। 5. इस परियोजना को लेकर सहमति किस मंच पर बनी? फिलीपींस के मनीला में आयोजित 10वें पूर्वी एशिया ऊर्जा सम्मेलन में दोनों पक्षों के बीच इस पर सहमति बनी। 6. भारत किन अन्य देशों के साथ बिजली ग्रिड जोड़ने पर काम कर रहा है? भारत श्रीलंका के साथ इंटरकनेक्शन और सऊदी अरब तथा यूएई के ग्रिडों से जुड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। https://trendkia.com/business/india-aura-singapore-ke-bicha-jurega-3000-kimi-lnba-bijali-koridora-pancha-deshon-se-gujaregi-nai-transamishana-laina-46130 TrendKia — Har trend, sabse pehle.