# भारत में जैविक कचरे से बायोगैस और खाद प्लांट लगाने पर केंद्र व राज्य सरकारें दे रही हैं भारी आर्थिक सब्सिडी

> गीले कचरे से सीबीजी या कंपोस्ट बनाने का प्लांट शुरू करने पर केंद्र और राज्य सरकारें कई प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। जानिए एमएनआरई की सीएफए योजना, सतत पहल और महाराष्ट्र-यूपी जैसे राज्यों द्वारा मिलने वाली छूटों का पूरा गणित।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/india-men-jaivika-kachare-se-bayogaisa-aura-khada-planta-lagane-para-kendra-va-rajya-sarakaren-de-rahi-hain-bhari-arthika-sabsidi-14728 · **Language:** Hindi
**Tags:** जैविक कचरा, बायोगैस सब्सिडी, गोवर्धन योजना, सतत पहल, सीएफए सब्सिडी, कचरा प्रबंधन

रसोई और बाजारों से रोज निकलने वाला गीला जैविक कचरा अब केवल फैंकने की वस्तु नहीं रह गया है, बल्कि यह उद्यमियों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन रहा है। कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गीले कचरे को संपीड़ित बायोगैस (CBG) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (कंपोस्ट) में बदला जा रहा है। इस तरह के प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने से न केवल पर्यावरण स्वच्छ रहता है और कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण होता है, बल्कि व्यवसाय शुरू करने वालों को शानदार वित्तीय रिटर्न भी मिलता है। इस हरित कारोबार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें शुरुआती पूंजी लगाने से लेकर उत्पादन और बिक्री तक के हर चरण पर विभिन्न योजनाओं के तहत आर्थिक मदद प्रदान कर रही हैं।

## 16 सरकारी संस्थाएं और बहुस्तरीय नीतिगत ढांचा
भारत में जैविक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है। कौन्सिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह के अनुसार, देश में जैविक कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न सरकारी निकाय सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। संस्थागत अध्ययन के आंकड़े दर्शाते हैं कि फिलहाल भारत में 16 केंद्रीय मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां मिलकर इस व्यवस्था को संचालित कर रही हैं। यह पूरा तंत्र 9 राष्ट्रीय कार्यक्रमों, 3 प्रमुख नीतिगत दिशा-निर्देशों और 7 विशेष योजनाओं के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (SBM-U), राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम और गोवर्धन (GOBARdhan) जैसी प्रमुख पहलों ने कचरे के प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां कचरे को केवल एक निस्तारण योग्य समस्या माना जाता था, वहीं अब इन योजनाओं के जरिए इसे मूल्यवान संसाधन और स्थायी आय का जरिया माना जा रहा है। इस सोच के कारण निजी निवेशकों और नए उद्यमियों का रुझान बायो-एनर्जी सेक्टर की ओर तेजी से बढ़ा है।

## केंद्रीय सब्सिडी और मुख्य वित्तीय सहायता योजनाएं
बायोगैस और कंपोस्ट प्लांट स्थापित करने की योजना बना रहे उद्यमियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से सीधा आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा बायोगैस संयंत्रों के निर्माण के लिए सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस (CFA) के तहत एकमुश्त अनुदान राशि प्रदान की जाती है। यह सहायता प्लांट की क्षमता और तकनीक के आधार पर तय की जाती है, जिससे निवेशक की अपनी जेब से लगने वाली शुरुआती पूंजी काफी कम हो जाती है।

इसके अलावा, जो उद्यमी गीले कचरे से जैविक खाद या कंपोस्ट बनाने का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए सतत (SATAT), गोवर्धन और मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) जैसी आर्थिक योजनाएं चलाई जा रही हैं। यद्यपि इनमें से कुछ योजनाएं सीधे बैंक खाते में नकद अनुदान नहीं देतीं, लेकिन वे उत्पादित कंपोस्ट के लिए बाजार में मांग सुनिश्चित करती हैं। ये नीतियां सरकारी उर्वरक कंपनियों के जरिए खाद की बिक्री और मूल्य स्थिरता की गारंटी प्रदान करती हैं, जिससे नया प्लांट लगाने वाले व्यक्ति को शुरुआती दौर में विपणन या बिक्री संबंधी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ता।

## विशेष वित्तीय छूट, ऋण और बुनियादी ढांचा राहत
कचरा प्रबंधन क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश को सुगम बनाने के लिए सरकार ने कई पूरक वित्तीय उपाय लागू किए हैं। इस उद्योग को मजबूती देने के लिए बायोगैस और अपशिष्ट प्रसंस्करण परियोजनाओं को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिससे बैंकों से कम ब्याज दर पर आसानी से ऋण मिल जाता है। इसके साथ ही, कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के माध्यम से भी बायोगैस इकाइयों को पूंजीगत ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।

उत्पादन और वितरण चरण में भी उद्यमियों को बड़ी राहत दी गई है। compressed bio-gas (CBG) को जब compressed natural gas (CNG) में मिलाया जाता है, तो उस पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में छूट दी जाती है। इसके अतिरिक्त, संयंत्रों से उत्पादित गैस को सीधे शहर के गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए डायरेक्ट पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर योजना लागू की गई है। सीबीजी संयंत्रों के लिए विदेशों से आयात की जाने वाली आधुनिक मशीनों पर रियायती सीमा शुल्क (Customs Duty) प्रमाण पत्र भी जारी किए जाते हैं, जिससे तकनीकी लागत में भारी कमी आती है।

## राज्यस्तरीय प्रोत्साहन और परियोजनाओं की व्यावहारिकता
केंद्रीय योजनाओं के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर बायोगैस और अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों के लिए आकर्षक नीतियां चला रही हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी समर्पित सीबीजी नीतियां बनाई हैं। ये राज्य सरकारें केंद्रीय सब्सिडी (MNRE CFA और SATAT) के ऊपर अतिरिक्त राज्य पूंजीगत अनुदान, भूमि परिवर्तन शुल्क में छूट, स्टाम्प ड्यूटी माफी और स्थानीय करों में राहत प्रदान करती हैं।

राज्य और केंद्र की इन प्रोत्साहन योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से संयंत्र लगाने की कुल प्रारंभिक लागत (CapEx) काफी घट जाती है। इससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यावहारिकता में सुधार होता है और निवेशकों को लगाई गई पूंजी पर कम समय में बेहतर मुनाफा मिलने लगता है। सरकारी मदद के इस एकीकृत ढांचे के बल पर जैविक कचरा प्रबंधन आज भारत में एक टिकाऊ और लाभदायक व्यवसाय के रूप में उभर रहा है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** जैविक कचरे से बायोगैस और कंपोस्ट प्लांट लगाने वाले उद्यमियों को केंद्र की सीएफए सब्सिडी, कर छूट और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) से शुरुआती पूंजीगत लागत कम करने में सीधी मदद मिलती है।
- **महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में:** इन राज्यों की विशेष सीबीजी नीतियों के तहत अतिरिक्त राज्य स्तरीय पूंजीगत सब्सिडी, भूमि कर छूट और शुल्क राहत का लाभ उठाकर प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता बढ़ाई जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत में जैविक कचरा प्रबंधन में कुल कितने सरकारी मंत्रालय और एजेंसियां शामिल हैं?
सीईईडब्ल्यू (CEEW) के अध्ययन के अनुसार, भारत में जैविक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए 16 मंत्रालय और सरकारी संस्थाएं 9 कार्यक्रमों, 3 नीतिगत दिशा-निर्देशों और 7 योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही हैं।

### 2. बायोगैस प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार से कौन सी सब्सिडी मिलती है?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा बायोगैस और सीबीजी प्लांट स्थापित करने के लिए 'सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस' (CFA) के तहत वित्तीय अनुदान प्रदान किया जाता है।

### 3. सतत और गोवर्धन योजनाएं कंपोस्ट और बायोगैस कारोबार में कैसे मदद करती हैं?
सतत (SATAT), गोवर्धन और मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) योजनाएं उत्पादित गैस और जैविक खाद के लिए बाजार में मांग, खरीद और सुगम वितरण व्यवस्था तैयार करती हैं जिससे बिक्री में बाधा नहीं आती।

### 4. सीबीजी प्लांट्स को करों और ऋण में क्या छूट मिलती है?
सीबीजी प्लांट को प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) के तहत आसान ऋण, एग्री-इंफ्रा फंड (AIF) सहायता, सीएनजी में मिलाए जाने वाले सीबीजी पर उत्पाद शुल्क छूट और आयातित मशीनरी पर रियायती सीमा शुल्क का लाभ मिलता है।

### 5. कौन से राज्य बायोगैस प्लांट लगाने पर अतिरिक्त सब्सिडी देते हैं?
महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अपनी विशेष सीबीजी नीतियों के तहत केंद्रीय सब्सिडी के अलावा अतिरिक्त पूंजीगत अनुदान, भूमि कर छूट और शुल्क में छूट प्रदान करते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._