प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नियमों के तहत चीन के सिर्फ 1 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मिली मंजूरी, जबकि हांगकांग को मिला बड़ा मौका डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के नए आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि भारत ने बीते वित्त वर्ष में चीन के एफडीआई प्रस्तावों पर सख्त रुख बरकरार रखा है। जहां चीन के केवल 1 करोड़ रुपये के एक प्रस्ताव को पास किया गया, वहीं हांगकांग के 610.42 करोड़ रुपये के 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। भारतीय बाजार में अपनी आर्थिक मौजूदगी बढ़ाने की चीनी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। सरकार की ओर से जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष के दौरान चीनी कंपनियों से जुड़े सिर्फ एक एफडीआई प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई, जिसकी कुल वैल्यू महज 1 करोड़ रुपये रही। दूसरी तरफ, हांगकांग से आए 13 बड़े निवेश प्रस्तावों को सरकार ने पास किया, जिनके जरिए देश में 610.42 करोड़ रुपये की पूंजी आ रही है। यह आंकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा से समझौता किए बिना बेहद सतर्क तरीके से चुनिंदा माध्यमों से ही विदेशी पूंजी को प्रवेश की अनुमति दे रहा है। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के आंकड़े डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड की ओर से प्रस्तुत आंकड़े बताते हैं कि पड़ोसी देश से आने वाले विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की सख्त स्क्रीनिंग की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, जहां बीजिंग से आने वाले फंड के लिए दरवाजे लगभग बंद रखे गए, वहीं हांगकांग के माध्यम से आने वाली व्यापारिक प्राथमिकताओं को उचित प्रक्रिया के बाद स्वीकार किया गया। इस नीति के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय कंपनियों में किसी भी तरह के अवांछित विदेशी नियंत्रण या टेकओवर को रोकना है। अप्रैल 2020 का नियम और प्रेस नोट-3 का पृष्ठभूमि संदर्भ इस पूरी व्यवस्था का आधार अप्रैल 2020 में लागू किया गया नियम है, जिसे 'प्रेस नोट-3' के रूप में जाना जाता है। वैश्विक कोरोना वायरस महामारी के चरम दौर में जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं संकट से गुजर रही थीं, तब भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक नियम को अधिसूचित किया था। इसके तहत यह अनिवार्य कर दिया गया था कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले किसी भी देश का निवेशक केवल सरकारी मंजूरी के रास्ते से ही भारतीय कंपनियों में पैसा लगा सकता है। प्रेस नोट-3 के दायरे में भारत की भौगोलिक सीमाओं से सटे सात पड़ोसी देश आते हैं। इनमें चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। इस नियम का प्राथमिक उद्देश्य संकट के समय में भारतीय संपत्तियों या आर्थिक रूप से कमजोर पड़ चुकी घरेलू कंपनियों को विदेशी ताकतों द्वारा सस्ते दामों पर खरीदे जाने से सुरक्षित बचाना था। तब से लेकर अब तक इन देशों से आने वाली हर एक पाई की गहन जांच-परख की जाती है। सिंगापुर, ब्रिटेन और थाईलैंड से भारत में आया बंपर निवेश बीजिंग पर सख्ती बरतने के बावजूद वैश्विक स्तर पर भारत निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार ने कुल 63 एफडीआई प्रस्तावों को अपनी स्वीकृति दी। इन स्वीकृत प्रस्तावों के जरिए कुल मिलाकर 10,292.67 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश भारत में आया है। निवेशकों की इस सूची में सिंगापुर सबसे आगे रहा, जिसके 5 प्रमुख निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई और देश को 3,259.88 करोड़ रुपये की पूंजी मिली। दूसरे पायदान पर ब्रिटेन रहा, जिसके 5 प्रस्तावों के माध्यम से 2,477.67 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत हुआ। वहीं, 1,600 करोड़ रुपये के 2 प्रस्तावों के साथ थाईलैंड तीसरे स्थान पर रहा। ये आंकड़े साबित करते हैं कि वैश्विक निवेशक भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर पूरा भरोसा जता रहे हैं। 26 सालों का ऐतिहासिक तुलनात्मक अध्ययन: चीन बनाम हांगकांग दीर्घकालिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत के कुल एफडीआई में चीन का योगदान कभी भी बहुत ज्यादा नहीं रहा है। अप्रैल 2000 से लेकर मार्च 2026 तक के 26 वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरी अवधि के दौरान चीन से भारत में कुल मिलाकर करीब 16,162.25 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया। यह आंकड़ा भारत को मिले कुल एफडीआई का महज 0.32 प्रतिशत है, जिसके कारण चीन भारतीय एफडीआई निवेशकों की तालिका में 23वें स्थान पर खड़ा है। इसके विपरीत, हांगकांग का प्रदर्शन बहुत बेहतर रहा है। इसी 26 साल की समान अवधि में हांगकांग से भारत में करीब 31,220.30 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दर्ज किया गया। यह भारत में आए कुल एफडीआई का 0.62 प्रतिशत हिस्सा है और इस मजबूत प्रदर्शन के दम पर हांगकांग विदेशी निवेशकों की सूची में 15वें पायदान पर काबिज है। मार्च 2026 की नीतिगत छूट और उसमें जोड़ी गई सख्त शर्त व्यवसाय को आसान बनाने के उद्देश्य से मार्च 2026 में सरकार ने प्रेस नोट-3 के कड़े प्रावधानों में कुछ ढील देने की घोषणा की थी। नए नियमों के अनुसार, भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों के ऐसे निवेशकों को ऑटोमैटिक रूट से निवेश करने की अनुमति दी गई, जिनकी किसी भारतीय कंपनी में सिर्फ 10 प्रतिशत तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हो और उनके पास कोई प्रबंधकीय अधिकार न हों। हालांकि, इस छूट में सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण शर्त शामिल की है। नियम में साफ किया गया है कि यह रियायत ऐसी किसी भी कंपनी या संस्था पर लागू नहीं होगी जो चीन, हांगकांग या भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में रजिस्टर्ड हो। इस विशेष शर्त के कारण चीनी संस्थाएं इस ऑटोमैटिक रूट का लाभ उठाकर भारतीय बाजार में बिना सरकारी पूर्व स्वीकृति के प्रवेश नहीं कर सकती हैं। इसका आप पर असर भारत में: विदेशी निवेश की सख्त निगरानी से भारतीय टेक, स्टार्ट-अप और विनिर्माण कंपनियों को विदेशी अधिग्रहण से सुरक्षा मिलती है। व्यापारियों के लिए: सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देशों से लगातार आ रहा भारी निवेश देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। सवाल-जवाब 1. बीते वित्त वर्ष में चीन से भारत में कितना एफडीआई मंजूर हुआ? बीते वित्त वर्ष के दौरान चीन से केवल 1 करोड़ रुपये के 1 एफडीआई प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दी। 2. हांगकांग से भारत में कितना निवेश आया? हांगकांग से आए 13 एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनसे भारत में 610.42 करोड़ रुपये का निवेश आया। 3. प्रेस नोट-3 नियम क्या है और इसे कब लागू किया गया था? प्रेस नोट-3 नियम अप्रैल 2020 में लागू हुआ था, जिसके तहत भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले हर एफडीआई के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। 4. प्रेस नोट-3 के दायरे में कौन-कौन से देश आते हैं? इस नियम के दायरे में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान आते हैं। 5. अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच भारत में सबसे ज्यादा निवेश किस देश से आया? सिंगापुर से सबसे ज्यादा 3,259.88 करोड़ रुपये का निवेश आया, जिसके लिए 5 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। 6. मार्च 2026 में एफडीआई नियमों में क्या नया बदलाव किया गया? सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों को 10 प्रतिशत तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी के लिए ऑटोमैटिक रूट दिया गया, लेकिन चीन या हांगकांग में रजिस्टर्ड कंपनियों को इससे बाहर रखा गया। https://trendkia.com/business/india-ne-china-ke-1-karora-rupaye-ke-fdi-prastava-ko-di-mnjuri-hong-kong-se-ae-610-42-karora-rupaye-ke-13-prastava-13058 TrendKia — Har trend, sabse pehle.