भारत बना सेमीकंडक्टर हब, पांच प्लांट में शुरू हुआ चिप और एआई सर्वर का उत्पादन भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में अब बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। देश के पाँच मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है और सरकार ने इसके अगले चरण के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की रूपरेखा तैयार कर ली है। भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अब शुरुआती बुनियाद को मजबूत करने के बाद बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। SEMICON India 2026 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि देश का सेमीकंडक्टर तंत्र अब अपने विकास के अगले चरण में कदम रख चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के कुल 5 सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत भी हो चुकी है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के छह प्रमुख आधार आईटी मंत्री के अनुसार इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को कुल 6 मुख्य क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इनमें चिप डिजाइन, उन्नत सामग्रियां और मशीनें, अधिक फैब यूनिट्स, अधिक एटीएमपी इकाइयां, अनुसंधान एवं विकास तथा कुशल प्रतिभा का विकास शामिल हैं। अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि देश के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र और वैश्विक क्षमता केंद्रों से तैयार होने वाली डिजाइन क्षमता अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी बहुत उपयोगी साबित हो रही है। इस नए मिशन के अंतर्गत देश के भीतर लगभग 200 चिप डिजाइन कंपनियों को स्थापित करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। चिप डिजाइन स्टार्टअप्स और वेंचर कैपिटल की मदद पहले चरण यानी आईएसएम 1.0 के दौरान चिप डिजाइन से जुड़े स्टार्टअप्स को महँगे इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया था। अब तक 105 से अधिक चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को इन इंडस्ट्री-ग्रेड टूल्स तक सीधी पहुँच मिल चुकी है, जबकि इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग का लाभ भी प्राप्त हुआ है। डिजाइन कौशल को बढ़ावा देने के विषय पर बात करते हुए मंत्री ने बताया कि बीते चार वर्षों में करीब 70 हजार डिजाइन इंजीनियरों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शुरुआत में 85 हजार इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। देशभर के चार सौ कॉलेजों में निखारी जा रही प्रतिभा केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि छोटे शहरों के संस्थानों समेत देश के लगभग 400 इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को इंडस्ट्री-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स का उपयोग करने की सुविधा मिल रही है। इसके साथ ही छात्रों को अपने तैयार डिजाइनों को टेप-आउट तक ले जाने और उन्हें वास्तविक उत्पादों में बदलने का बेहतरीन अवसर भी प्रदान किया जा रहा है। आईएसएम 2.0 के तहत अब स्किलिंग के दायरे को केवल चिप डिजाइन तक सीमित न रखकर सिस्टम डिजाइन पर भी विस्तार से केंद्रित किया जाएगा। सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों में बढ़ रही मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार से देश के भीतर विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र के बीच लक्षित विनिर्माण क्षमता विकसित हुई है। इसका भरपूर उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, एयरोस्पेस, एविएशन, रक्षा और सेमीकंडक्टर जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा रहा है। अब विनिर्माण संयंत्रों में व्यावहारिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता और उत्पादन प्रक्रिया को और अधिक उन्नत बनाया जा सके। इसके अलावा सटीक विनिर्माण के लिए विभिन्न स्तरों पर कौशल प्रशिक्षण मॉडल भी योजनाबद्ध तरीके से तैयार किए जा रहे हैं। क्लीनरूम टेक्नीशियन और एआई सर्वर की बढ़ती माँग वैष्णव ने रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर उद्योग के भीतर क्लीनरूम टेक्नीशियन और रखरखाव कर्मचारियों की आवश्यकता बहुत तेजी से बढ़ रही है। नए मिशन के अंतर्गत कुल एक लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य तय किया गया है, हालाँकि उद्योग जगत की बदलती माँग को देखते हुए इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने की जरूरत भी पड़ सकती है। मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। भारत के भीतर एआई सर्वर विनिर्माण का पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित हो रहा है और कई बड़े सर्वर निर्माता देश में ही अपना उत्पादन शुरू करने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुनियादी घटकों से लेकर तैयार उत्पादों, लैपटॉप, सर्वर और सहायक उपकरणों तक का पूरा तंत्र धीरे-धीरे आकार ले रहा है, जिसके मजबूत होने से उद्योग की वृद्धि अधिक स्थिर हो जाएगी। मेड-इन-इंडिया चिप्स का वैश्विक बाजारों में निर्यात अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत लगातार एक उत्पाद राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। देश के भीतर विकसित कुछ चिप्स का उपयोग पहले से ही रणनीतिक क्षेत्रों में किया जा रहा है और कुछ चिप्स का विदेशों में निर्यात भी शुरू हो चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि एटीएमपी इकाइयों के माध्यम से जापान को निर्यात किया जा रहा है, जबकि भारत में तैयार चिप्स का इस्तेमाल स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों को भेजे जाने वाले उत्पादों में भी हो रहा है। मंत्री ने विश्वास जताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ ही देश में मेड-इन-इंडिया और डिजाइन-इन-इंडिया चिप्स की संख्या में और अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी। इसका आप पर असर सेमीकंडक्टर विनिर्माण और घरेलू डिजाइन क्षमताओं के विस्तार का सीधा असर देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा। • भारत में: देश के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों और तकनीकी पेशेवरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर उत्पादों के स्थानीय स्तर पर बनने से आयात पर निर्भरता कम होगी और कीमतें स्थिर रहेंगी। • औद्योगिक क्षेत्र में: छोटे और मध्यम उद्योगों तथा सर्वर निर्माताओं को देश के भीतर ही आवश्यक कलपुर्जे और उन्नत तकनीक मिलने से उत्पादन लागत में कमी आएगी। ऐसा क्यों हुआ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करने और देश को उन्नत तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। • रणनीतिक जरूरत: कोविड महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर चिप्स की भारी कमी ने देश को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की अनिवार्यता समझाई। • सरकारी नीतियां: सरकार ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से भारी वित्तीय प्रोत्साहन और बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराकर वैश्विक कंपनियों को आकर्षित किया है। • बढ़ती तकनीकी माँग: देश में एआई सर्वर, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती घरेलू खपत ने स्थानीय विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को तेज कर दिया है। सवाल-जवाब 1. भारत में कितने सेमीकंडक्टर प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है? देश के 5 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। 2. इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत कितने चिप डिजाइन स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य है? आईएसएम 2.0 के तहत देश में करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियां विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 3. अब तक कितने डिजाइन इंजीनियरों को पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा चुका है? पिछले चार वर्षों में करीब 70 हजार डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। 4. किन देशों को भारत में विकसित चिप्स से जुड़े उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है? भारत में विकसित चिप्स से जुड़े उत्पादों का निर्यात जापान, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों को किया जा रहा है। 5. आईएसएम 2.0 के तहत कितने क्लीनरूम टेक्नीशियनों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है? इस मिशन के तहत एक लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। https://trendkia.com/business/india-semikndaktara-hub-5-planta-men-shuru-hua-chip-aura-ai-server-ka-utpadana-33307 TrendKia — Har trend, sabse pehle.