एमआरएफ का अनोखा सफर: 102 पारिवारिक मालिक और आठ दशकों में एक बार भी नहीं हुआ बंटवारा भारत के कॉरपोरेट इतिहास में एमआरएफ का पारिवारिक ढांचा एक अनूठी मिसाल पेश करता है, जहां 102 प्रमोटर सदस्य होने के बावजूद आठ दशकों में कभी कोई विवाद नहीं हुआ। देश के कारोबारी जगत में जब भी किसी खानदानी बिजनेस की चर्चा होती है, तो अक्सर आपसी मतभेद, कानूनी मुकदमों और संपत्ति के बंटवारे की कहानियां सामने आती हैं। हालांकि, देश की दिग्गज टायर निर्माता कंपनी MRF ने पिछले लगभग 80 वर्षों से एक ऐसा शानदार उदाहरण पेश किया है, जो बाकी घरानों के लिए एक सीख है। इस विशाल उद्योग के प्रमोटर ग्रुप में आज 102 लोग शामिल हैं, लेकिन इसके बावजूद परिवार के भीतर कभी कोई ऐसा मनमुटाव या विवाद नहीं उभरा जिसने कंपनी के कामकाज या संचालन पर कोई असर डाला हो। यही वजह है कि इसे देश के सबसे बेहतरीन और अनुशासित पारिवारिक बिजनेस मॉडलों में शुमार किया जाता है। प्रमोटर हिस्सेदारी और मजबूत ट्रस्ट संरचना जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी में प्रमोटर समूह की कुल ओनरशिप 27.77 प्रतिशत है। एक हालिया मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस हिस्सेदारी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा करीब 13 प्रमोटर संस्थाओं और ट्रस्टों के नियंत्रण में है, जबकि शेष लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा परिवार के 102 अलग अलग सदस्यों के बीच फैला हुआ है। इतनी बड़ी तादाद में व्यक्तिगत प्रमोटर होने के बावजूद कंपनी की बागडोर को लेकर कभी कोई सार्वजनिक खिंचतान देखने को नहीं मिली है। पारिवारिक शेयरों के अलावा, लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी दो प्रमुख चैरिटेबल ट्रस्टों के पास सुरक्षित है। इनमें सबसे बड़ा नाम MOWI फाउंडेशन का है, जिसके पास 11.98 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि Evertrue Charitable and Educational Foundation के पास 2.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इन ट्रस्टों की मौजूदगी से कंपनी की ओनरशिप और अधिक ठोस हो जाती है और किसी भी प्रकार के बाहरी टेकओवर का जोखिम लगभग न के बराबर रहता है। पब्लिसिटी से दूरी और संतुलित नियंत्रण इस परिवार की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसके सदस्य चकाचौंध और मीडिया की सुर्खियों से कोसों दूर रहना पसंद करते हैं। परिवार से जुड़े लोग सार्वजनिक मंचों या मीडिया के सामने बहुत कम आते हैं। इस खामोश और संयमित रवैये की वजह से परिवार के भीतर अलग अलग सत्ता केंद्र बनने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है। इसके अलावा, शेयरों का वितरण भी इस बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है कि किसी एक व्यक्ति या परिवार की किसी एक शाखा के पास जरूरत से ज्यादा अधिकार या नियंत्रण न पहुंच सके। हर साल होती है फैमिली काउंसिल की बैठक पारिवारिक तालमेल बनाए रखने के लिए विभिन्न शाखाओं के सदस्य हर साल एक निश्चित फैमिली काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेते हैं। इस मंच पर कारोबार और परिवार के भविष्य से जुड़े तमाम बड़े मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श किया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था को चलाने के लिए कोई भारी-भरकम या औपचारिक लिखित संविधान मौजूद नहीं है, बल्कि परिवार के सभी लोग बरसों से अपने तयशुदा नैतिक उसूलों और परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते आ रहे हैं। पीढ़ियों का साथ और नेतृत्व की कमान कारोबार की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के नुमाइंदे आज भी इस विशाल बिजनेस को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सक्रिय हैं। K. M. Mammen इसके चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि Rahul Mammen मैनेजॉइंग डायरेक्टर के तौर पर काम देख रहे हैं। इसके अलावा Arun Mammen वाइस चेयरमैन के पद पर हैं और Varun Mammen भी कंपनी के बोर्ड में अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। परिवार की महिला सदस्यों में Ambika Mammen और Sibi Mammen भी कंपनी के बोर्ड का हिस्सा रह चुकी हैं या अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय रही हैं। साल 1946 से शुरू हुआ था सफर इस प्रतिष्ठित कंपनी की नींव साल 1946 में K. M. Mammen Mappillai ने रखी थी। आगे चलकर साल 1961 में यह कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। शुरुआत से ही इसके प्रमोटरों ने अपनी शेयरहोल्डिंग को बहुत सोच-समझकर सीमित दायरे में रखा। यही मुख्य वजह है कि आज MRF का शेयर देश के सबसे महंगे शेयरों में गिना जाता है और इसकी कीमत बाजार में करीब 1.30 लाख रुपये प्रति शेयर के स्तर तक पहुंच चुकी है। सवाल-जवाब 1. MRF कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी कितनी है? जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक MRF में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी 27.77 प्रतिशत है। 2. MRF परिवार में कितने प्रमोटर सदस्य शामिल हैं? कंपनी के प्रमोटर ग्रुप में कुल 102 अलग-अलग सदस्य शामिल हैं। 3. MRF के पास कौन से प्रमुख चैरिटेबल ट्रस्ट हैं? एमओडब्ल्यूआई फाउंडेशन के पास 11.98 प्रतिशत और एवरट्रू चैरिटेबल एंड एजुकेशनल फाउंडेशन के पास 2.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 4. MRF की शुरुआत कब और किसने की थी? MRF की शुरुआत साल 1946 में के. एम. मैमन मैपिल्लई ने की थी। प्रेरणा और सबक MRF परिवार के सफर से सीखने योग्य मुख्य बातें: • विवादों से दूर रहना: मीडिया और चकाचौंध से दूरी बनाए रखने से पारिवारिक व्यवसाय में आंतरिक कलह और शक्ति संघर्ष की आशंका कम होती है। • उत्तराधिकार और निरंतरता: दूसरी और तीसरी पीढ़ी के सदस्यों को व्यवसाय में शामिल कर नेतृत्व को मजबूत और स्थिर रखना चाहिए। • पारदर्शी संवाद: हर साल नियमित रूप से फैमिली काउंसिल जैसी बैठकों का आयोजन कर बड़े फैसलों पर आपसी सहमति बनानी चाहिए। • संरचित हिस्सेदारी: शेयरों और नियंत्रण को संतुलित तरीके से वितरित करना चाहिए ताकि किसी एक व्यक्ति के हाथ में पूरा अधिकार न जाए। https://trendkia.com/business/inside-mrf-how-102-family-owners-have-kept-indias-most-valuable-tire-giant-united-for-80-years-11106 TrendKia — Har trend, sabse pehle.