जलवायु परिवर्तन की मार से किसानों को बचा रही नेट हाउस तकनीक, अंबाला में 14 लाख रुपये तक की सरकारी सब्सिडी का उठायें लाभ अंबाला में किसान बेमौसम बारिश और भीषण गर्मी से अपनी फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस खेती अपना रहे हैं, जिस पर हरियाणा सरकार 50 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है। बदलते मौसम के मिजाज ने पारंपरिक खेती को एक बड़े जोखिम वाले व्यवसाय में तब्दील कर दिया है। कभी आसमान से बरसती आग जैसी तेज धूप, कभी बेमौसम की भारी बारिश, तो कभी अचानक पड़ने वाली कड़ाके की ठंड, इन सभी प्राकृतिक आपदाओं ने सबसे ज्यादा नुकसान उन किसानों को पहुंचाया है जो सब्जियों और बागवानी फसलों की खेती पर निर्भर हैं। खुले खेतों में उगाई जाने वाली सब्जियों में थोड़ी सी भी मौसम की गड़बड़ी पूरी मेहनत और लागत को बर्बाद कर सकती है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए हरियाणा सरकार की संरक्षित खेती योजना एक संजीवनी बनकर सामने आई है। राज्य के अंबाला जिले में अब भारी संख्या में किसान पुरानी और पारंपरिक पद्धतियों को छोड़कर आधुनिक तकनीकों, जैसे कि नेट हाउस और पॉली हाउस, की ओर रुख कर रहे हैं। यह तकनीक न केवल उनकी फसलों को सुरक्षित कर रही है, बल्कि आमदनी के नए और स्थायी रास्ते भी खोल रही है। नेट हाउस से मिलता है नियंत्रित वातावरण अंबाला के जिला बागवानी अधिकारी सत्यनारायण के अनुसार, नेट हाउस तकनीक किसानों को एक ऐसा नियंत्रित वातावरण प्रदान करती है, जहां बाहरी मौसम का प्रतिकूल प्रभाव नगण्य हो जाता है। इस विशेष संरचना के भीतर तापमान, नमी और प्रकाश को फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित रखा जाता है। जब बाहर चिलचिलाती गर्मी, मूसलाधार बारिश या ओलावृष्टि हो रही होती है, तब भी नेट हाउस के अंदर पौधे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं। सर्दियों के मौसम में पाले की मार से भी फसलों का बचाव होता है। इस सुरक्षित और अनुकूल माहौल के कारण उगाई गई सब्जियों और फलों की गुणवत्ता बेहद शानदार होती है। रंग, आकार और स्वाद में उत्तम होने के कारण इन कृषि उत्पादों को खुले बाजार में सामान्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक और आकर्षक दाम मिलते हैं, जिससे किसानों का सीधा मुनाफा बढ़ता है। सरकारी मदद से आधी हुई लागत आधुनिक खेती में सबसे बड़ी बाधा शुरुआत में लगने वाली भारी पूंजी होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार नेट हाउस स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दे रही है। योजना के नियमों के तहत, एक परिवार अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र में नेट हाउस लगाने के लिए इस सब्सिडी का लाभ उठा सकता है। वित्तीय गणित को समझाते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एक एकड़ जमीन पर एक मानक नेट हाउस तैयार करने में लगभग 28 लाख रुपये का कुल खर्च आता है। इसमें से करीब 14 लाख रुपये की बड़ी सहायता राशि सरकार द्वारा सीधे सब्सिडी के रूप में दी जाती है। इस अहम सरकारी मदद से किसानों के कंधों पर पड़ने वाला शुरुआती निवेश का भारी वित्तीय बोझ आधा रह जाता है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के किसान भी इस उन्नत तकनीक को अपनाने का साहस जुटा पा रहे हैं। रोपाई का सही समय और उपयुक्त फसलें बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि नेट हाउस की स्थापना के लिए जुलाई और अगस्त का महीना सबसे सर्वोत्तम समय होता है। इन महीनों में ढांचे का निर्माण पूरा कर लेने से किसान आगामी सर्दियों की फसलों की रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। इस संरक्षित ढांचे के अंदर आमतौर पर उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को प्राथमिकता दी जाती है। इनमें मुख्य रूप से टमाटर, हाइब्रिड खीरा, विभिन्न रंगों वाली शिमला मिर्च, तरह-तरह की बेल वाली सब्जियां और सजावटी फूलों की खेती शामिल है। चूंकि अंदर का तापमान और आर्द्रता पूरी तरह नियंत्रित होती है, इसलिए इन फसलों की वृद्धि तेजी से होती है और इनकी पैदावार सामान्य खुले खेतों की तुलना में कई गुना अधिक दर्ज की जाती है। ड्रिप इरिगेशन से जल संरक्षण और लागत में कमी नेट हाउस खेती का एक और सबसे महत्वपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल पहलू जल संरक्षण है। इस प्रणाली के भीतर सिंचाई के लिए पूरी तरह से ड्रिप इरिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस विधि में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी शून्य हो जाती है और केवल जरूरत के मुताबिक ही सिंचाई होती है। इसके अतिरिक्त, नेट हाउस की जालीदार दीवारों के कारण बाहरी हानिकारक कीट और बीमारियां आसानी से अंदर प्रवेश नहीं कर पाते हैं। नतीजतन, फसलों पर रसायनों, कीटनाशकों और महंगी दवाइयों के छिड़काव की जरूरत बेहद कम हो जाती है। यह न केवल उत्पादन लागत को काफी हद तक घटाता है, बल्कि उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त और सेहतमंद उत्पाद भी उपलब्ध कराता है। आवेदन की पूरी और आसान प्रक्रिया जो भी किसान इस लाभकारी योजना का हिस्सा बनना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया तय की है। सबसे पहले, आवेदक किसान को हरियाणा सरकार के मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपनी जमीन और उस पर उगाई जाने वाली फसल का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण पूरा होने के बाद, पोर्टल पर उपलब्ध प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन या फिर नेट हाउस सब्सिडी स्कीम विकल्प का चयन करके अपना मुख्य आवेदन प्रस्तुत करना होता है। इस आवेदन पत्र के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज भी अपलोड करने होते हैं, जिनमें किसान का आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक की प्रति, एक पासपोर्ट साइज फोटो, संबंधित जमीन की नवीनतम जमाबंदी, तथा अधिकृत प्रयोगशाला से प्राप्त मिट्टी और पानी की जांच रिपोर्ट शामिल हैं। आवेदन जमा होने के बाद बागवानी विभाग के अधिकारी मौके का भौतिक निरीक्षण करते हैं। सब कुछ सही पाए जाने और विभागीय मंजूरी मिलने के बाद ही किसान अपने खेत में नेट हाउस का निर्माण कार्य शुरू कर सकते हैं। आज के समय में, जब कृषि योग्य भूमि लगातार सिकुड़ रही है और जलवायु परिवर्तन के खतरे रोज नए रूप में सामने आ रहे हैं, नेट हाउस केवल एक नई तकनीक मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खेती के अस्तित्व को बचाने का एक मजबूत हथियार बन गया है। सरकार का यह कदम न सिर्फ कृषि क्षेत्र को आधुनिक बना रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का एक सुनहरा अवसर भी दे रहा है। इसका आप पर असर • भारत में: यह तकनीक पूरे देश के किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने और कम जमीन में उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार लेने का एक प्रभावी मॉडल पेश करती है। • हरियाणा में: राज्य के किसान मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करके 14 लाख रुपये तक की सरकारी मदद पा सकते हैं, जिससे खेती की लागत आधी हो जाएगी। सवाल-जवाब 1. एक एकड़ में नेट हाउस लगाने का कुल खर्च कितना आता है? एक एकड़ में नेट हाउस स्थापित करने की कुल लागत लगभग 28 लाख रुपये आती है। 2. इस योजना के तहत हरियाणा सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? सरकार नेट हाउस लगाने पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान देती है, जो प्रति परिवार अधिकतम 14 लाख रुपये तक होता है। 3. नेट हाउस में कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं? इस नियंत्रित वातावरण में टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च, बेल वाली सब्जियां और फूलों जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें उगाई जाती हैं। 4. किसान इस सब्सिडी के लिए कहां आवेदन कर सकते हैं? किसानों को मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर अपनी जमीन का पंजीकरण कराकर संरक्षित खेती योजना के तहत आवेदन करना होता है। 5. आवेदन के लिए किन प्रमुख दस्तावेजों की आवश्यकता होती है? आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन की जमाबंदी और मिट्टी-पानी की जांच रिपोर्ट जरूरी है। https://trendkia.com/business/jalavayu-parivartana-ki-mara-se-kisanon-ko-bacha-rahi-neta-hausa-takanika-ambala-men-14-lakha-rupaye-taka-ki-sarakari-sabsidi-ka-u-10063 TrendKia — Har trend, sabse pehle.