# जहानाबाद के किसान राकेश कुमार ने शुरू की जैविक फूलगोभी की खेती, महज पांच महीनों में कमा रहे बंपर मुनाफा

> बिहार के जहानाबाद जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ सब्जियों की खेती अपनाई है, जहां वे जैविक खाद के इस्तेमाल से फूलगोभी की फसल उगाकर महज 20 हजार रुपये के निवेश में 80 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/jehanabad-ke-kisana-rakesh-kumar-ne-shuru-ki-jaivika-phulagobhi-ki-kheti-mahaja-pancha-mahinon-men-kama-rahe-bnpara-munapha-32266 · **Language:** Hindi
**Tags:** सब्जी की खेती, जैविक खेती, फूलगोभी की खेती, जहानाबाद किसान, कृषि मुनाफा, राकेश कुमार धरमपुर

बिहार में कृषि के तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के किसान अब उन पारंपरिक फसलों के बजाय सब्जियों और फलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं जो कम समय में बेहतर मुनाफा देती हैं। कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और सलाह के कारण जहानाबाद जिले के ग्रामीण इलाकों में यह बदलाव साफ नजर आ रहा है। जिले के कई गांवों में बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसी कड़ी में काको प्रखंड के धरमपुर गांव के रहने वाले किसान राकेश कुमार ने भी सब्जी उत्पादन को अपनी मुख्य आय का जरिया बनाया है और वे इस क्षेत्र में सराहनीय काम कर रहे हैं।

## सीजन के अनुसार फसलों का चयन और खेती का रकबा
राकेश कुमार के पास कुल पांच बीघा कृषि योग्य भूमि है। वे इस पूरी जमीन पर पारंपरिक खेती करने के बजाय तीन बीघा क्षेत्र में सालभर अलग-अलग तरह की सब्जियां उगाते हैं। वे मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर ही अपनी फसलों का चयन करते हैं। जैसे ही सर्दी का मौसम दस्तक देने लगता है, वे फूलगोभी की खेती की तैयारियों में जुट जाते हैं। इस साल भी उन्होंने अपनी एक बीघा जमीन पर केवल फूलगोभी उगाने का फैसला किया। जमीन के एक हिस्से पर उन्होंने पहले ही पौधों की रोपाई पूरी कर ली है, जबकि बाकी बचे हिस्से में मिट्टी की जुताई का काम तेजी से चल रहा है। राकेश कुमार का मानना है कि सर्दियों के दौरान फूलगोभी की खेती किसानों के लिए सबसे अधिक फायदेमंद साबित होती है क्योंकि इसमें लागत कम आती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। समय प्रबंधन को वे कृषि क्षेत्र में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मानते हैं।

## लागत और मुनाफे का पूरा गणित
अपनी इस कृषि तकनीक और वित्तीय प्रबंधन के बारे में राकेश कुमार ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस साल सितंबर महीने में उन्होंने एक बीघा खेत में फूलगोभी के पौधों की रोपाई की थी। इस फसल की कटाई और फल तोड़ने का काम जनवरी के शुरुआती हफ्ते से शुरू हो जाएगा। सामान्य तौर पर रोपाई के लगभग तीन महीने बाद पौधे से फूलगोभी प्राप्त होने लगती है। आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो एक बीघा खेत में फूलगोभी उगाने के लिए लगभग 20,000 रुपये का खर्च आता है। इस कुल खर्च में अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की कीमत, जैविक खाद तैयार करने की लागत, सिंचाई के लिए पानी का प्रबंध और खेत की जुताई जैसे बुनियादी खर्चे शामिल हैं। यदि किसान स्वयं खेतों में शारीरिक श्रम करता है और मजदूरों पर निर्भरता कम रखता है, तो लागत को और भी कम किया जा सकता है।

## मकर संक्रांति के समय बंपर कमाई का मौका
कमाई के आंकड़ों को साझा करते हुए राकेश कुमार बताते हैं कि खेत के एक कट्ठा क्षेत्र से लगभग 5,000 रुपये की सब्जियां बेची जा सकती हैं। इस हिसाब से देखें तो एक बीघा से कुल उत्पादन मूल्य लगभग 1,00,000 रुपये तक पहुंच जाता है। यदि इसमें से कुल 20,000 रुपये की शुरुआती लागत को घटा दिया जाए, तो किसानों को मात्र पांच महीनों के भीतर लगभग 80,000 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त होता है। जनवरी के दौरान जब फसल पूरी तरह तैयार होती है, तब देश भर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। त्योहारों के इस सीजन में बाजार में सब्जियों की मांग अपने चरम पर होती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बहुत अच्छा और आकर्षक मूल्य मिल जाता है।

## जैविक खाद से तैयार हो रही है सेहतमंद गोभी
राकेश कुमार की सफलता की कहानी केवल आर्थिक मुनाफे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर भी काफी सजग हैं। वे अपनी सब्जियों की खेती में किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशकों या रासायनिक खादों का उपयोग नहीं करते हैं। उन्होंने रासायनिक खाद को अपने खेतों से पूरी तरह से दूर कर दिया है। इसके बजाय वे अपने खेत में तैयार की गई जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। उनका अनुभव है कि रासायनिक खाद बंद करने के बाद भी फसल के कुल उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। जैविक खाद के प्रयोग से भी उतनी ही मात्रा में और उसी आकार के फल मिल रहे हैं जितने रासायनिक खादों से मिलते थे। जैविक तरीके से उगाई गई उनकी एक फूलगोभी का वजन ढाई किलोग्राम तक हो जाता है। वे इस जैविक खाद को खुद ही पारंपरिक तरीकों से तैयार करते हैं, जिससे उनकी बाहरी निर्भरता और खेती की लागत दोनों ही कम हो जाती है।

## इसका आप पर असर
यह खेती मॉडल यह दर्शाता है कि छोटे पैमाने के किसान जैविक सब्जियों की खेती अपनाकर अपनी मौसमी आय में भारी बढ़ोतरी कैसे कर सकते हैं।

- **बंपर मुनाफा:** किसान एक बीघा जमीन से 80,000 रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को महज पांच महीने में मजबूत वित्तीय स्थिरता मिलती है।
- **लागत में कमी:** घर पर ही जैविक खाद तैयार करने से खेती की लागत घटकर केवल 20,000 रुपये प्रति बीघा रह जाती है। यह महंगे रासायनिक खादों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करता है।
- **बेहतर स्वास्थ्य:** स्थानीय बाजारों में उपभोक्ताओं को ढाई किलो तक वजन वाली रसायन मुक्त जैविक फूलगोभी मिलती है। यह समुदाय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है।
- **त्योहारी सीजन का लाभ:** मकर संक्रांति जैसे त्योहारी सीजन के आसपास फसल की कटाई करने से बाजार में मांग अधिक होती है। इससे किसानों को अपनी ताजी उपज का सबसे अच्छा दाम मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
जहानाबाद में जैविक फूलगोभी की खेती की ओर झुकाव कम समय में बेहतर वित्तीय लाभ और कृषि स्थिरता की आवश्यकता के कारण हुआ है। किसान अब पारंपरिक कम मुनाफे वाले अनाजों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के साथ अपनी भूमि के उपयोग को बेहतर बनाने के वैज्ञानिक सुझावों पर अमल कर रहे हैं।

- **वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन:** कृषि वैज्ञानिकों ने स्थानीय किसानों को लगातार कम समय वाली सब्जियों की खेती करने की सलाह दी है। इस मार्गदर्शन ने किसानों को पारंपरिक धीमी फसलों को छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।
- **घर पर तैयार जैविक इनपुट:** रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतों ने किसानों को खुद की जैविक खाद बनाने के लिए प्रेरित किया। इस अभ्यास ने न केवल लागत को कम किया बल्कि फसल के बेहतर आकार को भी बनाए रखा।
- **सोची-समझी बुवाई समय सारणी:** सितंबर में बुवाई करने से यह सुनिश्चित होता है कि फसल जनवरी में सर्दियों की चरम मांग के दौरान तैयार हो। यह जानबूझकर की गई योजना क्षेत्रीय त्योहारों के दौरान मुनाफे को अधिकतम करती है।

## सवाल-जवाब

### 1. जहानाबाद में जैविक फूलगोभी की खेती करने वाले किसान का नाम क्या है?
बिहार के जहानाबाद जिले के काको प्रखंड के धरमपुर गांव के रहने वाले राकेश कुमार जैविक फूलगोभी की खेती कर रहे हैं।

### 2. राकेश कुमार सब्जी की खेती के लिए कितनी जमीन का उपयोग करते हैं?
अपनी कुल पांच बीघा कृषि भूमि में से राकेश कुमार तीन बीघा जमीन पर सालभर विभिन्न मौसमी सब्जियां उगाते हैं।

### 3. एक बीघा जमीन पर फूलगोभी उगाने में कुल कितनी लागत आती है?
एक बीघा खेत में फूलगोभी उगाने पर लगभग 20,000 रुपये का खर्च आता है, जिसमें बीज, जैविक खाद, सिंचाई और जुताई शामिल हैं।

### 4. फूलगोभी की एक बीघा फसल से कितना शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है?
किसान महज पांच महीने के भीतर एक बीघा से लगभग 1,00,000 रुपये की कुल आय और 80,000 रुपये का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं।

### 5. फूलगोभी की बुवाई कब की गई थी और इसकी कटाई कब शुरू होगी?
फूलगोभी की रोपाई सितंबर महीने में की गई थी और इसकी कटाई जनवरी के पहले हफ्ते से शुरू होगी।

### 6. राकेश के खेत में जैविक रूप से उगाई गई एक फूलगोभी का अधिकतम वजन कितना होता है?
जैविक रूप से उगाई गई एक फूलगोभी का वजन ढाई (2.5) किलोग्राम तक हो जाता है।

## प्रेरणा और सबक
जैविक खेती की ओर राकेश कुमार का यह कदम आधुनिक कृषि प्रबंधन और वित्तीय नियोजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सबक प्रदान करता है।

- **फसल विविधीकरण अपनाएं:** केवल पारंपरिक अनाजों तक सीमित रहने के बजाय जमीन के कुछ हिस्सों पर उच्च उपज वाली मौसमी सब्जियां उगाने से कमाई कई गुना बढ़ सकती है।
- **आत्मनिर्भरता से लागत पर नियंत्रण:** अपने ही खेत पर जैविक खाद तैयार करने से बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम होती है और कुल निवेश में भारी कटौती होती है।
- **बाजार के अनुकूल योजना:** मकर संक्रांति जैसे बड़े त्योहारों के साथ अपनी फसल की कटाई का समय तय करने से बाजार में अधिक मांग और बेहतर मुनाफा मिलना सुनिश्चित होता है।

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