# झारखंड का 'रुगड़ा': जंगल में उगने वाला यह सुपरफूड जल्द होगा GI टैग के साथ अंतरराष्ट्रीय पहचान का हिस्सा

> झारखंड के जंगलों में मिलने वाले खास मशरूम 'रुगड़ा' को जल्द ही भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलने की उम्मीद है, जिसकी कीमत 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/jharkhand-ka-rugda-ka-superfood-gi-tag-ke-saath-antar-rashtriya-pehchan-7276 · **Language:** Hindi
**Tags:** रुगड़ा, झारखंड, सुपरफूड, GI टैग, वन उपज, आदिवासी संस्कृति

झारखंड के घने जंगलों में मानसून के आगमन के साथ ही एक बेहद खास और दुर्लभ वन उपज की तलाश शुरू हो जाती है, जिसे स्थानीय लोग 'रुगड़ा' के नाम से जानते हैं। इसे अक्सर शाकाहारी भोजन करने वालों के लिए 'शाकाहारियों का मटन' कहा जाता है, क्योंकि इसका स्वाद और बनावट मांसाहारी व्यंजनों से काफी मिलती-जुलती है। राज्य के विभिन्न आदिवासी अंचलों में इसे 'पुटू' के नाम से भी पुकारा जाता है। वर्तमान में इसे GI टैग दिलाने की कवायद जोरों पर है, ताकि इस अनोखे सुपरफूड को वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान मिल सके।

यह सब्जी पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसे किसी भी आधुनिक तकनीक या खेत में उगाना नामुमकिन है। यह रुगड़ा मानसून के शुरुआती महीनों यानी केवल जून और जुलाई में ही बाजारों में देखने को मिलता है। इस सब्जी की उपलब्धता का समय बहुत कम होता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बहुत ज्यादा बनी रहती है। अपनी दुर्लभता के कारण, इसकी कीमत 1000 रुपये से लेकर 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जो इसे झारखंड की सबसे महंगी और लोकप्रिय वन उपजों में से एक बनाती है।

रुगड़ा को खोजने की प्रक्रिया किसी रोमांच से कम नहीं है क्योंकि यह जमीन के ऊपर दिखाई नहीं देता। यह मिट्टी के अंदर करीब 2 से 3 इंच की गहराई में छोटे कंचे या आलू के आकार में विकसित होता है। जैसे-जैसे यह मशरूम बड़ा होता है, मिट्टी पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे सतह पर बारीक दरारें बन जाती हैं। स्थानीय आदिवासी, जो जंगलों की गहरी समझ रखते हैं, इन्हीं दरारों को देखकर रुगड़ा की सटीक स्थिति का पता लगाते हैं और लकड़ी के औजारों की मदद से मिट्टी खोदकर इन्हें सावधानी से बाहर निकालते हैं।

## औषधीय गुणों का भंडार
रुगड़ा न केवल अपनी अनूठी स्वाद वाली पहचान के लिए जाना जाता है, बल्कि यह अपने समृद्ध पोषक तत्वों के कारण एक बेहतरीन सुपरफूड भी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें अस्थमा और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। कई पारंपरिक औषधियों में इसका उपयोग एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में किया जाता है, क्योंकि इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले प्राकृतिक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं।

इसके पोषण प्रोफाइल पर नजर डालें तो इसमें उच्च कोटि का प्रोटीन पाया जाता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन बी, राइबोफ्लेविन, थाइमिन और विटामिन बी 12 की प्रचुरता होती है। इसके अलावा, शरीर के लिए जरूरी फोलिक एसिड, कैल्शियम, फास्फोरस, तांबा, पोटैशियम और विटामिन डी जैसे महत्वपूर्ण खनिज भी इसमें पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं।

## GI टैग की दौड़ में शामिल अन्य उत्पाद
झारखंड सरकार राज्य की पारंपरिक कलाओं और उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने के लिए सक्रिय है। रुगड़ा के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए भी GI रजिस्ट्री में आवेदन दाखिल किए गए हैं। इन नामों में देवघर का प्रसिद्ध पेड़ा, मांदर वाद्य यंत्र, पैतकर पेंटिंग, लाह की चूड़ियां, रागी, धुस्का और साल के बीज शामिल हैं। इन उत्पादों को जल्द ही GI टैग मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और आदिवासी समुदायों की आय को बड़ा संबल मिलेगा।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** GI टैग मिलने से स्थानीय उत्पादों की बाजार कीमत बढ़ेगी और किसानों व वन संग्राहकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

**झारखंड में:** राज्य के स्थानीय बाजारों में रुगड़ा की मांग बढ़ने के साथ ही इसके संरक्षण और पारंपरिक तरीकों से इसे खोजने वाले लोगों की आजीविका में सुधार होने की संभावना है।

## सवाल-जवाब

### 1. रुगड़ा क्या है?
रुगड़ा झारखंड के जंगलों में मानसून के दौरान उगने वाला एक प्राकृतिक मशरूम है जिसे शाकाहारियों का मटन कहा जाता है।

### 2. रुगड़ा की कीमत क्या है?
बाजार में इसकी कीमत आमतौर पर 1000 से 1200 रुपये प्रति किलो के बीच होती है।

### 3. रुगड़ा को खेतों में क्यों नहीं उगाया जा सकता?
यह एक पूरी तरह से जंगली उपज है जो केवल विशिष्ट प्राकृतिक परिस्थितियों में मिट्टी के अंदर विकसित होती है, जिसे मानव निर्मित खेतों में दोहराना संभव नहीं है।

### 4. रुगड़ा का सेवन स्वास्थ्य के लिए क्यों अच्छा है?
इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और खनिज पाए जाते हैं, जो अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने व इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।

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