जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ पर विश्लेषक उत्साहित, लिस्टिंग पर मजबूत बढ़त के संकेत जियो प्लेटफॉर्म्स का प्राइस बैंड तय होने के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है। ग्रे मार्केट प्रीमियम में भी भारी तेजी दर्ज की गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के लिए तय किए गए प्राइस बैंड के सामने आते ही वित्तीय बाजारों में सकारात्मक हलचल देखने को मिल रही है। बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि शेयर बाजार में पहले ही दिन यह निर्गम निवेशकों को 15 से 20 प्रतिशत तक का शुरुआती लिस्टिंग मुनाफा दे सकता है। शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि लिस्टिंग के दिन का वास्तविक प्रदर्शन उस समय बाजार के रुख और बोली लगाने वाले निवेशकों की दिलचस्पी पर तय होगा। वहीं दूसरी ओर गैर-आधिकारिक ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयरों की जबरदस्त मांग देखी जा रही है, जहां इसका प्रीमियम 84 प्रतिशत तक उछल चुका है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में कंपनी के शेयरों से निवेशकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रोकरेज फर्मों ने दी निर्गम को सब्सक्राइब करने की सलाह बाजार की अग्रणी ब्रोकरेज फर्म एमके रिसर्च ने 16 अक्टूबर को अपनी जारी की गई विशेष नोट में इस निर्गम को सब्सक्राइब करने की स्पष्ट सिफारिश की है। संस्था का मानना है कि कंपनी जिस तरह से दूरसंचार बाजार में शीर्ष पर बनी हुई है, उसके पास सेवाओं की दरें तय करने की मजबूत क्षमता है, उसका परिचालन तंत्र कुशल है और भविष्य में विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं, उसे देखते हुए तय प्राइस बैंड पूरी तरह उचित नजर आता है। इसी तरह वित्तीय फर्म स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने भी निवेशकों को इस निर्गम में बोली लगाने की सलाह दी है। उनके वित्तीय विश्लेषण के अनुसार वित्त वर्ष FY26 की संभावित आय के ऊपरी प्राइस बैंड पर कंपनी का मूल्य-आय अनुपात यानी P/E लगभग 33.3 गुना बैठता है। इसकी तुलना में प्रतिद्वंद्वी कंपनी भारती एयरटेल का P/E अनुपात 40.7 गुना है। इस तुलनात्मक मूल्यांकन के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन एयरटेल के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत सस्ता दिखाई दे रहा है। मूल्यांकन और पूंजीगत व्यय में गिरावट का वित्तीय विश्लेषण एक अन्य मूल्यांकन पद्धति के जरिए कुछ स्वतंत्र बाजार विश्लेषकों ने इस निर्गम की कीमत को उसकी अनुमानित आय का लगभग 33.5 गुना आंका है, जबकि भारती एयरटेल का संबंधित पैमाना 38.9 गुना निर्धारित किया गया है। इस गणना के तहत भी कंपनी का शेयर अपने प्रतिद्वंद्वी से करीब 14 प्रतिशत किफायती साबित होता है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि आगामी समय में होने वाली तेज व्यावसायिक वृद्धि का एक हिस्सा मौजूदा तय कीमत में पहले ही शामिल हो चुका है। वित्तीय स्थिति के लिहाज से कंपनी के लिए सबसे बड़ी राहत यह मानी जा रही है कि देश भर में 5G नेटवर्क खड़ा करने के लिए किए जाने वाले भारी पूंजीगत खर्च का चरण अब काफी हद तक संपन्न हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक FY24 से लेकर FY26 के दौरान कंपनी का पूंजीगत निवेश उसके कुल राजस्व के 48.8 प्रतिशत से घटकर केवल 23.3 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है। इसके चलते FY26 में कंपनी का मुक्त नकदी प्रवाह यानी फ्री कैश फ्लो लगभग 32,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिससे भविष्य में बड़े निवेश की जरूरत घटने पर कंपनी के पास नकदी की बचत बढ़ेगी। दीर्घकालिक विकास के इंजन और मूल कंपनी पर सकारात्मक असर लंबी अवधि के नजरिए से विशेषज्ञ केवल पारंपरिक मोबाइल कनेक्टिविटी पर ही निर्भर नहीं देख रहे हैं। घरेलू ब्रॉडबैंड सेवाओं, एंटरप्राइज समाधान, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI और अपनी घरेलू तकनीकों को विदेशी बाजारों में बेचने की योजना को कंपनी के अगले बड़े विकास चालक के तौर पर चिन्हित किया गया है। एमके रिसर्च ने विशेष रूप से होम ब्रॉडबैंड को विस्तार का मुख्य आधार बताया है और इन-हाउस तकनीकी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमाई का बड़ा अवसर माना है। इस निर्गम की स्वतंत्र प्रक्रिया का सीधा लाभ मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार प्रदर्शन में भी साफ दिखा है। 15 अक्टूबर को जब प्राइस बैंड सार्वजनिक हुआ था, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में लगभग 3.4 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई थी। बाजार के प्रतिभागी मान रहे हैं कि जियो के अलग होने से मूल कंपनी के शेयरधारकों के लिए छिपे हुए मूल्य को उजागर करने का रास्ता साफ होगा। ग्रे मार्केट में मांग और समूह का बढ़ता कुल मूल्यांकन मुख्यधारा के विश्लेषकों और वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ अनौपचारिक बाजार के प्रतिभागी भी इस शेयर के लिए भारी उत्साह दिखा रहे हैं। पिछले दो हफ्तों की अवधि में इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगभग 84 प्रतिशत की तेज उछाल दर्ज हुई है। 2 अक्टूबर को जहां इसका जीएमपी केवल 125 रुपये दर्ज किया गया था, वहीं 16 अक्टूबर तक चढ़कर यह 230 रुपये के स्तर को छू चुका है। पूरे संस्थान के स्तर पर जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल बाजार मूल्यांकन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। इस आंकड़े के साथ अब पूरे रिलायंस समूह की कुल हैसियत 28.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसके चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान व्यावसायिक कंपनी का स्थान हासिल कर चुकी है। इसका आप पर असर जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ और इसके आकर्षक वैल्यूएशन से खुदरा निवेशकों और घरेलू शेयर बाजार पर सीधा असर पड़ेगा। • खुदरा निवेशकों के लिए: आरंभिक सार्वजनिक निर्गम में बोली लगाने वाले निवेशकों को लिस्टिंग के दिन 15 से 20 प्रतिशत तक का त्वरित लाभ मिलने का अनुमान है। यदि ग्रे मार्केट का 84 प्रतिशत उछाल कायम रहता है तो आवंटन पाने वाले आवेदकों को मजबूत पूंजीगत रिटर्न मिल सकता है। • रिलायंस शेयरधारकों के लिए: मूल कंपनी के मौजूदा निवेशकों के लिए यह निर्गम वैल्यू अनलॉकिंग का बड़ा जरिया बनेगा। 15 अक्टूबर को शेयर में आई 3.4 प्रतिशत की उछाल दर्शाती है कि लंबी अवधि के शेयरधारकों का पोर्टफोलियो और मजबूत हो सकता है। • दूरसंचार ग्राहकों के लिए: पूंजीगत खर्च घटने और 32,500 करोड़ रुपये के फ्री कैश फ्लो से सेवाओं में सुधार की उम्मीद है। 5G नेटवर्क पूरा होने के बाद कंपनी अब होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज सेवाओं के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेगी। • बाजार पूंजीकरण के स्तर पर: पूरे रिलायंस समूह का मूल्यांकन बढ़कर 28.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों में संस्थागत निवेश और स्थिरता बढ़ने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ जियो प्लेटफॉर्म्स के सार्वजनिक निर्गम के प्रति मजबूत रुझान और बढ़ते मूल्यांकन के पीछे कई वित्तीय और रणनीतिक कारक जिम्मेदार हैं। • प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले सस्ता मूल्यांकन: कंपनी का P/E अनुपात वित्त वर्ष FY26 की कमाई के आधार पर 33.3 से 33.5 गुना तय किया गया है। यह स्तर भारती एयरटेल के 38.9 से 40.7 गुना P/E के मुकाबले 14 से 18 प्रतिशत तक सस्ता बैठता है। • पूंजीगत खर्च में भारी कमी: वित्त वर्ष FY24 से FY26 के बीच पूंजीगत व्यय राजस्व के 48.8 प्रतिशत से घटकर 23.3 प्रतिशत पर आ गया है। इस गिरावट ने कंपनी के पास पर्याप्त नकदी छोड़ी है जिससे FY26 में फ्री कैश फ्लो 32,500 करोड़ रुपये दर्ज हुआ। • भविष्य के नए विकास क्षेत्र: बुनियादी मोबाइल नेटवर्क के अलावा कंपनी होम ब्रॉडबैंड, क्लाउड, AI और एंटरप्राइज समाधानों में तेजी से कदम बढ़ा रही है। अपनी इन-हाउस तकनीकों को विदेशी बाजारों में ले जाने की योजना ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। सवाल-जवाब 1. जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ पर विश्लेषकों का क्या अनुमान है? बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि यह शेयर पहले दिन 15 से 20 प्रतिशत तक का लिस्टिंग गेन दे सकता है। 2. एमके रिसर्च ने इस निर्गम पर क्या रेटिंग दी है? एमके रिसर्च ने कंपनी के मार्केट नेतृत्व और ग्रोथ संभावनाओं को देखते हुए इसे सब्सक्राइब रेटिंग दी है। 3. भारती एयरटेल की तुलना में जियो का मूल्यांकन कैसा है? वित्त वर्ष FY26 की कमाई के आधार पर जियो का P/E करीब 33.3 गुना है, जो एयरटेल के मुकाबले लगभग 18 प्रतिशत सस्ता है। 4. कंपनी के पूंजीगत व्यय में क्या बदलाव आया है? पूंजीगत खर्च FY24 से FY26 के बीच राजस्व के 48.8 प्रतिशत से गिरकर 23.3 प्रतिशत रह गया है। 5. ग्रे मार्केट प्रीमियम में कितनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है? ग्रे मार्केट प्रीमियम दो हफ्तों में 84 प्रतिशत उछलकर 2 अक्टूबर के 125 रुपये से 16 अक्टूबर को 230 रुपये पहुंच गया है। 6. रिलायंस समूह का कुल मूल्यांकन कितना हो चुका है? जियो के 10 लाख करोड़ से ज्यादा के मूल्यांकन के बाद रिलायंस समूह की कुल हैसियत 28.3 लाख करोड़ रुपये हो गई है। https://trendkia.com/business/jio-platforms-ipo-para-vishleshaka-utsahita-listinga-para-majabuta-barhata-ke-snketa-48218 TrendKia — Har trend, sabse pehle.