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  "title": "जोधपुरी मोजरी को मिला प्रतिष्ठित जीआई टैग, राजस्थान की पारंपरिक कला को मिली वैश्विक पहचान",
  "summary": "राजस्थान के जोधपुर में बनी करीब 200 साल पुरानी पारंपरिक मोजरी को अब आधिकारिक जीआई टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के बाद स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ ही कारोबार में बड़ी वृद्धि की उम्मीद है।",
  "content": "राजस्थान के जोधपुर शहर की सदियों पुरानी धरोहर अब आधिकारिक तौर पर सुरक्षित हो गई है। करीब 200 साल से अपनी विशिष्ट कारीगरी और शाही अंदाज के लिए जानी जाने वाली जोधपुरी मोजरी को केंद्र सरकार की ओर से भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न केवल इस हस्तशिल्प को एक कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भी इसकी धाक जमाने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो वर्षों के भीतर ही इस पारंपरिक उद्योग का कुल कारोबार मौजूदा स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है।\n\nजीआई टैग से बढ़ेगा व्यापार और रोजगार\nजोधपुरी मोजरी को यह महत्वपूर्ण मान्यता दिलाने की प्रक्रिया साल 2021 में शुरू हुई थी। जोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान ने संयुक्त रूप से केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय और विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहयोग से इसके लिए आवेदन किया था। वर्षों की लंबी मेहनत और कानूनी प्रक्रिया के बाद मिली यह जीत स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक मील का पत्थर है। वर्तमान में जोधपुरी मोजरी का घरेलू बाजार लगभग 100 करोड़ रुपये का है, जबकि निर्यात से करीब 10 करोड़ रुपये की आय होती है। जीआई टैग के मिलने से विदेशी खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और निर्यात में तेजी आने की पूरी संभावना है, जिससे जोधपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों परिवारों को बेहतर रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे।\n\nनकली उत्पादों पर लगेगी लगाम\nजीआई टैग केवल एक टैग नहीं, बल्कि उत्पाद की मौलिकता की गारंटी है। अब जोधपुरी मोजरी के नाम से बाजार में बिकने वाले नकली और घटिया उत्पादों पर कानूनी शिकंजा कसना आसान होगा। इससे न केवल पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण मिलेगा, बल्कि असली कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य भी मिल सकेगा। यह प्रमाणन यह सुनिश्चित करता है कि खरीदार को मिलने वाला उत्पाद वही है, जो जोधपुर की मिट्टी और परंपरा से जुड़ा हुआ है।\n\nभविष्य की संभावनाएं और अन्य उत्पाद\nजोधपुर की अन्य खूबियों को भी लगातार पहचान मिल रही है। इससे पहले जोधपुरी बंधेज को जीआई टैग मिलने के बाद उसके व्यापार में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई थी। वर्तमान में जोधपुरी साफा, मारवाड़ का जीरा, मथानिया की लाल मिर्च, वुडन एंड आयरन क्राफ्ट, लहरिया और जोधपुरी पत्थर की छतरियों जैसे कई उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया चल रही है। हस्तशिल्प एसोसिएशन के अनुसार, मोजरी उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए अब आधुनिक डिजाइन, कौशल विकास, गुणवत्ता में सुधार और ब्रांडिंग के साथ ई-कॉमर्स व अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों के जरिए व्यापक विपणन अभियान चलाए जाएंगे।\n\nहाथों की कारीगरी है मोजरी की ताकत\nस्थानीय कारीगर मोहनलाल के अनुसार, यह उपलब्धि वर्षों के कठिन परिश्रम का परिणाम है। जोधपुरी मोजरी की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से हाथ से बनाया जाता है। असली चमड़े के ऊपर की जाने वाली विशेष पारंपरिक कढ़ाई और इसकी अनूठी बनावट इसे देश के अन्य राज्यों में बनने वाली जूतियों से बिल्कुल अलग और श्रेष्ठ बनाती है। यह हस्तशिल्प न केवल पैरों के लिए आरामदायक है, बल्कि यह मारवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है, जिसे अब दुनिया भर के लोग गर्व के साथ अपना सकेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: जीआई टैग मिलने से देश भर में हस्तशिल्प उत्पादों की प्रामाणिकता बढ़ती है, जिससे ग्राहकों को असली उत्पाद पहचानने में आसानी होती है।\n\nजोधपुर में: स्थानीय कारीगरों को अपनी कला का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित मूल्य मिलने और रोजगार बढ़ने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जोधपुरी मोजरी को जीआई टैग मिलने का क्या फायदा है?\nजीआई टैग से मोजरी की मौलिकता प्रमाणित होती है, जिससे बाजार में नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ने से कारोबार बढ़ेगा।\n\n2. जोधपुरी मोजरी की मुख्य विशेषता क्या है?\nयह पूरी तरह हाथ से असली चमड़े पर पारंपरिक कढ़ाई के साथ बनाई जाती है, जो इसे अन्य क्षेत्रों की जूतियों से अलग बनाती है।\n\n3. इस टैग के लिए आवेदन कब किया गया था?\nजोधपुर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान ने इसके लिए वर्ष 2021 में आवेदन किया था।\n\n4. जीआई टैग मिलने से कारोबार पर क्या असर पड़ेगा?\nविशेषज्ञों का अनुमान है कि जीआई टैग से अगले दो वर्षों में जोधपुरी मोजरी का कारोबार दोगुना हो सकता है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• धैर्य और निरंतरता: कारीगरों और संस्थानों ने 2021 से लगातार प्रयास किया, जो लंबे समय में बड़ी सफलता दिलाता है।\n• मौलिकता की पहचान: अपनी पारंपरिक तकनीक और हस्तशिल्प पर अडिग रहकर ही आप बाजार में विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।\n• सामूहिक प्रयास: विभिन्न संस्थाओं और सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करने से बड़े नीतिगत लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-11",
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