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  "title": "जून में 72 घरेलू मार्गों पर औसत किराए में 20.5% का उछाल, यात्रियों की जेब पर सीधी मार",
  "summary": "जून 2026 में देश के 72 चुनिंदा घरेलू रूट्स पर औसत हवाई किराया करीब 20.5 प्रतिशत तक चढ़ गया, जिसकी जानकारी सरकार ने राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए दी।",
  "content": "गर्मी की छुट्टियों में विमान से सफर का इरादा रखने वालों के लिए इस बार टिकट खरीदना पहले से कहीं भारी साबित हुआ। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में बताया कि जून 2026 के दौरान देश के 72 चुनिंदा घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराया पिछले महीनों के मुकाबले करीब 20.5 प्रतिशत तक ऊपर चला गया। ये आंकड़े विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जुटाए गए हैं। हालांकि किन 72 रूट्स पर यह उछाल दर्ज हुआ, उनके नाम सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किए गए।\n\n \n\nकिराया आखिर चढ़ता क्यों है\n मंत्री ने संसद में समझाया कि किसी भी एयरलाइन का परिचालन खर्च लगातार बदलता रहता है, इसलिए टिकट की कीमत भी स्थिर नहीं रहती। इसे कई बड़े कारक एक साथ प्रभावित करते हैं। सबसे अहम है विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमत। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके दाम जैसे ही बढ़ते हैं, कंपनियों की लागत तुरंत ऊपर चढ़ जाती है। खास बात यह है कि अकेले ईंधन का यह खर्च किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 35 से 40 प्रतिशत तक हिस्सा घेर लेता है।\n\n इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, एक्साइज ड्यूटी, वैट और विमानों के लीज रेंट का भी सीधा असर पड़ता है। रुपया कमजोर होने या टैक्स ज्यादा होने पर उड़ान चलाने की कुल लागत बढ़ जाती है और इसका बोझ आखिरकार यात्री तक पहुंचता है।\n\n \n\nटिकट का दाम कौन तय करता है\n एक और लिखित जवाब में मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हवाई किराए पर सीधे नियंत्रण नहीं रखती। एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135 के मुताबिक हर एयरलाइन को अपना किराया खुद तय करने की छूट है। कंपनियां अपनी परिचालन लागत, सेवा की गुणवत्ता और वाजिब मुनाफे को आधार बनाकर खुद ही अपनी उड़ानों का टैरिफ तय करती हैं।\n\n \n\nयात्रियों की जेब पर असर\n गर्मी के मौसम और त्योहारी दिनों में हवाई टिकट की मांग तेजी से चढ़ती है। ऐसे में डायनेमिक प्राइसिंग की व्यवस्था के चलते जैसे ही सीटें कम होने लगती हैं, कंपनियां किराया ऊपर कर देती हैं। यही वजह है कि 20 प्रतिशत से ज्यादा की यह बढ़ोतरी उन लोगों को सबसे ज्यादा चुभती है जो ऐन मौके पर या भीड़भाड़ वाले समय में यात्रा की योजना बनाते हैं। आगे की तस्वीर भी बहुत राहत भरी नहीं दिखती। अगर ईंधन के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे और बाकी परिचालन खर्चों में कमी नहीं आई, तो आने वाले महीनों में भी टिकट महंगे बने रहने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: गर्मी और त्योहारी सीजन में घरेलू उड़ान का टिकट औसतन 20.5 प्रतिशत तक महंगा पड़ सकता है, इसलिए यात्रा की बुकिंग पहले से करना जेब पर हल्का रहेगा।\n• अंतिम समय के यात्रियों के लिए: पीक टाइम में सीटें कम होते ही किराया तेजी से चढ़ता है, लिहाजा ऐन मौके पर बुकिंग करने वालों को सबसे ज्यादा बोझ उठाना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जून 2026 में हवाई किराया कितना बढ़ा?\nदेश के 72 चुनिंदा घरेलू रूट्स पर औसत हवाई किराया पिछले महीनों की तुलना में करीब 20.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।\n\n2. यह जानकारी किसने और कहां दी?\nनागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।\n\n3. क्या उन 72 रूट्स के नाम बताए गए?\nनहीं, सरकार की ओर से उन 72 मार्गों के नामों का खुलासा नहीं किया गया।\n\n4. हवाई किराया महंगा होने की मुख्य वजह क्या है?\nविमान ईंधन (ATF) की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की दर, एक्साइज ड्यूटी, वैट और विमानों का लीज रेंट किराए को प्रभावित करते हैं। अकेले ईंधन कुल परिचालन खर्च का 35 से 40 प्रतिशत होता है।\n\n5. क्या सरकार हवाई किराया तय करती है?\nनहीं, एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135 के तहत हर एयरलाइन अपना किराया खुद तय करती है, सरकार इस पर सीधा नियंत्रण नहीं रखती।\n\n6. क्या आगे भी किराया महंगा रह सकता है?\nअगर ATF की कीमतें ऊंची बनी रहीं और अन्य परिचालन खर्च नहीं घटे, तो आने वाले महीनों में भी टिकट महंगे बने रहने की आशंका है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-27",
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