# जून में गन्ने की पत्तियां काली, खेत की नमी गायब — किसानों के लिए यह महीना क्यों है इतना नाज़ुक?

> जून का महीना गन्ने की फसल के लिए सबसे संवेदनशील समय है, जब कीट, खरपतवार और गर्मी मिलकर उत्पादन गिरा सकते हैं। सही सिंचाई, गुड़ाई, उर्वरक और कीट प्रबंधन से किसान फसल को बचा सकते हैं।

**Category:** व्यापार · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/juna-men-ganne-ki-pattiyan-kali-kheta-ki-nami-gayaba-kisanon-ke-lie-yaha-mahina--194

उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला गन्ने की खेती का बड़ा केंद्र है, जहां किसान बड़े रकबे पर गन्ना उगाते हैं। यही वजह है कि इस जिले को चीनी का कटोरा कहकर पुकारा जाता है। गन्ने की फसल के लिए जून का महीना बेहद अहम होता है और इस दौरान की गई थोड़ी सी लापरवाही भी पैदावार पर भारी पड़ सकती है। इसी मौसम में कीटों का हमला तेज़ी से बढ़ता है, इसलिए सिंचाई, गुड़ाई, खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन पर खास ध्यान देना ज़रूरी हो जाता है।

## खरपतवार और गुड़ाई
जून के दौरान खेतों में खरपतवार बहुत तेज़ी से पनपते हैं और गन्ने की फसल से पोषक तत्व व नमी छीनकर उसे कमज़ोर कर देते हैं। ऐसे में किसानों को समय-समय पर गुड़ाई करते रहना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर बैलों या कल्टीवेटर की मदद से गन्ने की कतारों के बीच मिट्टी चढ़ानी चाहिए। इससे एक ओर खरपतवार पर काबू पाया जा सकता है तो दूसरी ओर पौधों की बढ़वार भी बेहतर होती है।

## कीटों की निगरानी
जून के महीने में गन्ने की फसल पर प्रारंभिक तना छेदक (Early Shoot Borer), पाइरिला, दीमक और टॉप बोरर जैसे कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है। इसलिए किसानों को नियमित रूप से अपने खेत की निगरानी करते रहना चाहिए। अगर गन्ने के पौधों की पत्तियां सूखती दिखें या बीच का हिस्सा सूखकर बाहर निकल आए, तो बिना देर किए कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए।

## गर्मी और सिंचाई
जून में भीषण गर्मी का सितम भी झेलना पड़ता है, जिससे खेत में नमी की कमी हो जाती है और गन्ने का पौधा सूखने लगता है। इसी के साथ रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे निपटने के लिए फसल में नियमित सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि नमी बनी रहे। हालांकि यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि खेत में जलभराव न होने पाए, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।

## उर्वरक का संतुलित प्रयोग
गन्ने की अच्छी बढ़वार के लिए जून में नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए। उर्वरक तभी डालें जब खेत में पर्याप्त नमी मौजूद हो, ताकि पौधों को इसका पूरा लाभ मिल सके। अक्सर देखा जाता है कि किसान खेत में नमी न होने पर भी रासायनिक उर्वरक डाल देते हैं, जिससे गन्ने की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। एक एकड़ गन्ने में करीब 30 किलो यूरिया का छिड़काव करना चाहिए।

## दीमक से बचाव
जून के महीने में गन्ने की फसल पर दीमक का हमला बढ़ सकता है। दीमक पौधों की जड़ों और तनों को नुकसान पहुंचाकर फसल की बढ़वार को प्रभावित करती है। इससे बचाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और लगातार निगरानी करते रहें। दीमक दिखाई देने पर फिप्रोनिल 5% एससी की लगभग 1 लीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का छिड़काव करें। ध्यान रहे कि दवा का छिड़काव सुबह के समय ही करना चाहिए और छिड़काव के दौरान खेत में उचित नमी होना ज़रूरी है।

## पाइरिला का प्रकोप
जून में गन्ने की फसल पर पाइरिला (Pyrilla perpusilla) कीट के बढ़ने की आशंका रहती है। यह कीट गन्ने की पत्तियों का रस चूसकर फसल को कमज़ोर कर देता है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन घट सकता है। पाइरिला के हमले से पत्तियों पर चिपचिपा पदार्थ जम जाता है, जिस पर आगे चलकर काली फफूंदी पनपने लगती है। इसके उपाय के तौर पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल की 100–125 मिली मात्रा प्रति एकड़ या थायमेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी की अनुशंसित मात्रा का छिड़काव किया जा सकता है। दवा का छिड़काव सुबह या शाम के समय करना चाहिए।

## अभिशाप भी, वरदान भी
जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के अनुसार, जून का महीना गन्ने की फसल के लिए अभिशाप भी है और वरदान भी। अगर किसान इस महीने में सही ढंग से देखभाल कर लें तो उत्पादन बढ़ जाता है, लेकिन ज़रा सी चूक पूरी फसल को चौपट भी कर सकती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle._