कम बारिश और अल नीनो की मार के बावजूद मध्य प्रदेश में सोयाबीन की पैदावार मजबूत, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साझा किए आंकड़े इंदौर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अल नीनो के असर के बावजूद राज्य में सोयाबीन उत्पादन के शुरुआती आंकड़े काफी सकारात्मक हैं। मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज किए जाने के बाद भी दलहन और तिलहन क्षेत्र से राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विपरीत मौसमी परिस्थितियों के बावजूद मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादन के शुरुआती आंकड़े बेहद उत्साहजनक बने हुए हैं। इंदौर शहर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने किसानों की मेहनत और राज्य की कृषि नीतियों के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया। अल नीनो के प्रभाव और पैदावार पर मुख्यमंत्री का बयान सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस साल मानसून चक्र पर पड़े मौसम संबंधी बदलावों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों की तरह मध्य प्रदेश में भी अल नीनो के चलते वर्षा पर प्रतिकूल प्रभाव देखा गया, लेकिन इसके बावजूद खेतों से मिल रहे परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "इस वर्ष अल नीनो का प्रभाव किसी के नियंत्रण में नहीं था, लेकिन ईश्वर की कृपा से कभी-कभी मध्य प्रदेश में आपदाएं भी अवसर लेकर आती हैं।" उन्होंने आगे जोड़ा कि मौजूदा आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि किसानों ने विषम परिस्थितियों में भी बेहतर प्रबंधन का परिचय दिया है और राज्य सरकार लगातार कृषि तथा उससे जुड़े सहायक क्षेत्रों को मजबूत करने में जुटी हुई है। देश के कुल सोयाबीन रकबे में 45 प्रतिशत की हिस्सेदारी मध्य प्रदेश को देश के कृषि परिदृश्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और इसे भारत का अन्न का कटोरा भी माना जाता है। सम्मेलन में राज्य की कृषि क्षमता का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पूरे देश में सोयाबीन की जितनी खेती होती है, उसका लगभग 45 प्रतिशत रकबा अकेले मध्य प्रदेश में है। इतनी बड़ी हिस्सेदारी के कारण राज्य में होने वाला उत्पादन राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेल और सोया उत्पादों की आपूर्ति को सीधे प्रभावित करता है। सरकार का ध्यान अब केवल कच्चे कृषि उत्पादन तक सीमित न रहकर इसके प्रसंस्करण पर भी केंद्रित है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रशासन कृषि आधारित उद्योगों, फूड प्रोसेसिंग इकाइयों और मूल्य संवर्धन से जुड़े उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन दे रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य सीधे मिल सके। वर्ष 2026 बनेगा कृषक कल्याण वर्ष, नए औद्योगिक कॉरिडोर को मंजूरी कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए विशेष रणनीतियां तैयार की हैं। मोहन यादव ने घोषणा की कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाएगी। इस पूरी अवधि के दौरान प्रशासनिक मशीनरी का विशेष जोर खेती, सिंचाई, बीज प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका से जुड़े क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को सुधारने पर रहेगा। इसके साथ ही राज्य के औद्योगिक और परिवहन ढांचे को रफ्तार देने के लिए कैबिनेट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण परियोजना को हरी झंडी दिखाई है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जबलपुर, भोपाल और इंदौर को आपस में जोड़ने वाला एक नया औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के तैयार होने से मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों के बीच कृषि उत्पादों और औद्योगिक कच्चे माल की आवाजाही पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो सकेगी। इंदौर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हुआ। इस वैश्विक मंच पर भारत सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों से आए वैज्ञानिक, उद्योगपति, कृषि विशेषज्ञ और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सोयाबीन के वैश्विक उत्पादन के रुझानों, नई तकनीकों, फसल की गुणवत्ता और प्रसंस्करण उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। इसका आप पर असर मध्य प्रदेश में सोयाबीन की स्थिर पैदावार से खाद्य तेल की कीमतों और स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। • भारत में प्रभाव: देश के 45 प्रतिशत सोयाबीन रकबे में उत्पादन स्थिर रहने से घरेलू खाद्य तेल और सोया मील की आपूर्ति संतुलित रहेगी। इससे त्योहारी और आगामी सीजन में उपभोक्ताओं पर खाद्य तेलों के दाम बढ़ने का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है। • मध्य प्रदेश में प्रभाव: राज्य के लाखों सोयाबीन किसानों को मौसम की मार के बावजूद अपनी फसल का बेहतर बाजार मूल्य मिलने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने और नए औद्योगिक कॉरिडोर से स्थानीय मंडियों और उद्योगों में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। • कृषि प्रसंस्करण उद्योग पर असर: प्रसंस्करण इकाइयों को कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता मिलने से तेल मिलों का संचालन सुचारू रहेगा। इससे तेल मिलों और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्लांट्स को उत्पादन में कटौती नहीं करनी पड़ेगी। • परिवहन और लॉजिस्टिक्स में बदलाव: जबलपुर, भोपाल और इंदौर के बीच नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के बनने से फसलों की ढुलाई का समय घटेगा। इससे थोक व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि मानसून की कम बारिश के बाद सोयाबीन की पैदावार को लेकर गहरी चिंताएं जताई जा रही थीं, जिन पर अब आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की गई है। • अल नीनो का सीधा असर: इस मानसूनी सत्र में प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो मौसमी चक्र के कारण देश के कई कृषि क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई। इस वर्षा की कमी ने खरीफ फसलों, विशेषकर सोयाबीन के अंकुरण और विकास को लेकर आशंकाएं पैदा कर दी थीं। • किसानों का फसल प्रबंधन: शुरुआती सूखे जैसे हालात के बावजूद मध्य प्रदेश के किसानों ने उपलब्ध जल संसाधनों और बेहतर कृषि पद्धतियों का उपयोग किया। इसके चलते प्रतिकूल मौसम के बाद भी फसल का नुकसान उस स्तर पर नहीं हुआ जिसका अंदेशा जताया जा रहा था। • अंतरराष्ट्रीय मंच पर समीक्षा: इंदौर में आयोजित वैश्विक सम्मेलन ने कई देशों के वैज्ञानिकों और कारोबारियों को एक मंच पर लाया। इसी अवसर पर राज्य सरकार ने वास्तविक मैदानी आंकड़ों की समीक्षा कर पैदावार की सकारात्मक स्थिति को सार्वजनिक किया। सवाल-जवाब 1. मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादन के शुरुआती आंकड़े कैसे रहे हैं? मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के बावजूद राज्य में सोयाबीन उत्पादन के आंकड़े काफी सकारात्मक और उत्साहजनक हैं। 2. भारत के कुल सोयाबीन रकबे में मध्य प्रदेश की कितनी हिस्सेदारी है? मध्य प्रदेश पूरे देश के कुल सोयाबीन खेती वाले क्षेत्रफल (रकबे) का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा रखता है। 3. राज्य सरकार वर्ष 2026 को किस रूप में मनाने जा रही है? मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है। 4. कैबिनेट ने किस नए औद्योगिक कॉरिडोर को मंजूरी दी है? कैबिनेट ने हाल ही में जबलपुर, भोपाल और इंदौर को आपस में जोड़ने वाले एक नए औद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है। 5. अंतरराष्ट्रीय सोयाबीन सम्मेलन का आयोजन कहां किया गया? यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में आयोजित किया गया। https://trendkia.com/business/kama-barisha-aura-ala-nino-ki-mara-ke-bavajuda-madhya-pradesh-men-soyabina-ki-paidavara-majabuta-mukhyamntri-mohan-yadav-ne-sajha--48355 TrendKia — Har trend, sabse pehle.