कानपुर के इस मुफ्त कोर्स में झूला बनाने की लागत महज ₹80, बाजार में बिकता है 350 रुपए तक कानपुर के केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में छह दिन के मुफ्त कोर्स में राखी और लड्डू गोपाल की ड्रेस, झूला जैसी चीजें बनाना सिखाया जा रहा है, जिसमें लागत से तीन गुना तक मुनाफा कमाया जा सकता है। सावन का महीना शुरू होते ही बाजार में त्योहारों की रौनक लौटने लगती है और घर-घर में परंपरागत सामान खरीदने की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे मौके पर अगर कोई युवा या महिला त्योहारों से जुड़ा सामान खुद बनाकर बेचना सीख ले, तो थोड़े ही समय में अच्छी कमाई का रास्ता खुल सकता है। कानपुर में केनरा बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ने इसी मौके को देखते हुए एक खास मुफ्त कोर्स शुरू किया है, जिसमें सिर्फ छह दिन में राखी बनाना और भगवान लड्डू गोपाल के लिए ड्रेस जैसी चीजें तैयार करना सिखाया जा रहा है। राखी से लेकर लड्डू गोपाल की ड्रेस तक की ट्रेनिंग संस्थान की माधुरी शर्मा ने बताया कि आने वाले त्योहारों को ध्यान में रखते हुए संस्थान कई तरह के छह दिवसीय कोर्स करवा रहा है। रक्षाबंधन नजदीक होने की वजह से राखी बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जबकि जन्माष्टमी के पावन पर्व के लिए भगवान श्री लड्डू गोपाल से जुड़ी ड्रेस, झूला, बेड, सोफा, माला, मुरली और मुकुट जैसी चीजें बनाना भी सिखाया जा रहा है। इन सभी चीजों की बाजार में हमेशा परंपरागत मांग बनी रहती है, इसलिए यह हुनर सीखने वालों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। माधुरी शर्मा के मुताबिक, यह छोटी अवधि का कोर्स खासतौर पर उन युवाओं के लिए बनाया गया है जो जल्दी शुरुआत करके अच्छी कमाई करना चाहते हैं। इन कोर्स में सबसे ज्यादा दिलचस्पी महिलाएं दिखाती हैं, क्योंकि इस हुनर की मदद से वे घर बैठे ही आमदनी का एक मजबूत जरिया खड़ा कर सकती हैं। संस्थान की तरफ से यह पूरी ट्रेनिंग बिल्कुल निःशुल्क दी जाती है, ताकि पैसों की कमी किसी के हुनर सीखने में आड़े न आए। लागत से तीन गुना तक मिलता है मुनाफा माधुरी शर्मा ने बताया कि जो युवा प्रोडक्ट को खूबसूरती से सजाकर तैयार करते हैं, उन्हें बाजार में लागत से तीन गुना तक दाम मिल जाता है। उदाहरण के तौर पर एक झूला बनाने में करीब ₹80 का खर्च आता है, लेकिन तैयार होने के बाद उसे आसानी से 300 से 350 रुपए तक में बेचा जा सकता है। इसी तरह कान्हा जी के लिए बेड, ड्रेस और बाकी साज-सज्जा का सामान जितने अच्छे तरीके से तैयार किया जाएगा, बाजार में उतनी ही बेहतर कीमत मिलने की संभावना रहेगी। उन्होंने बताया कि अब हर त्योहार पर लोग लड्डू गोपाल जी के लिए झूले और अन्य सजावटी सामान खरीदते हुए दिखते हैं, इसलिए इसकी मांग साल भर बनी रहती है। माधुरी शर्मा के अनुसार पहले ऐसी चीजें ज्यादातर वृंदावन से ही खरीदी जाती थीं, लेकिन अब मेरठ में भी इनका एक बड़ा बाजार तैयार हो चुका है, जिससे स्थानीय स्तर पर बनाने वालों को भी ग्राहक आसानी से मिल जाते हैं। कैसे मिलेगी ट्रेनिंग, कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी जो भी युवा यह शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग हासिल करना चाहते हैं, वे सीधे संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। छह दिन के इस कोर्स में सिर्फ हुनर ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि खाने और नाश्ते की सुविधा भी संस्थान की तरफ से मुफ्त दी जाती है। इतना ही नहीं, ट्रेनिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाला सारा मटेरियल भी संस्थान खुद उपलब्ध कराता है, यानी सीखने वालों को अपनी जेब से कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता। युवाओं को बस सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संस्थान में आकर ट्रेनिंग लेनी होती है। माधुरी शर्मा ने बताया कि कई महिला समूह पहले से ही यहां से प्रशिक्षण लेकर इस तरह के प्रोडक्ट लगातार तैयार कर रहे हैं और उन्हें बाजार में बेच भी रहे हैं। यही वजह है कि यह कोर्स हर उस युवा और महिला के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है, जो कम लागत में घर बैठे अपना खुद का रोजगार शुरू करना चाहते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: त्योहारों के सीजन में इस तरह का हुनर सीखकर देश के किसी भी हिस्से में युवा और महिलाएं कम लागत में घर बैठे अतिरिक्त कमाई शुरू कर सकते हैं। • कानपुर में: यहां केनरा बैंक के संस्थान में मुफ्त ट्रेनिंग, खाना और मटेरियल तक मिल रहा है, यानी इच्छुक लोगों को अपनी जेब से कुछ भी खर्च किए बिना नया हुनर सीखने का मौका मिल रहा है। सवाल-जवाब 1. यह मुफ्त ट्रेनिंग कहां दी जा रही है? कानपुर में केनरा बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में यह ट्रेनिंग दी जा रही है। 2. कोर्स कितने दिन का है और इसकी फीस कितनी है? यह कोर्स छह दिन का है और संस्थान इसे पूरी तरह निःशुल्क कराता है। 3. इस कोर्स में क्या-क्या बनाना सिखाया जाता है? इसमें राखी बनाना और भगवान लड्डू गोपाल के लिए ड्रेस, झूला, बेड, सोफा, माला, मुरली व मुकुट बनाना सिखाया जाता है। 4. एक झूला बनाने में कितनी लागत आती है और वह कितने में बिकता है? एक झूला बनाने में करीब ₹80 खर्च आता है, जिसे 300 से 350 रुपए तक में बेचा जा सकता है। 5. ट्रेनिंग का समय क्या रहता है? युवाओं को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संस्थान में आकर ट्रेनिंग लेनी होती है। 6. क्या खाने-पीने और मटेरियल का भी इंतजाम रहता है? हां, संस्थान की तरफ से खाने-नाश्ते की सुविधा और ट्रेनिंग में लगने वाला मटेरियल दोनों मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। 7. इन प्रोडक्ट्स के लिए बाजार कहां-कहां मौजूद है? पहले ऐसी चीजें ज्यादातर वृंदावन से खरीदी जाती थीं, लेकिन अब मेरठ में भी इनका बड़ा बाजार तैयार हो चुका है। https://trendkia.com/business/kanpur-ke-isa-muphta-korsa-men-jhula-banane-ki-lagata-mahaja-80-bajara-men-bikata-hai-350-rupae-taka-8700 TrendKia — Har trend, sabse pehle.