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  "type": "article",
  "title": "कर्नाटक में नंदिनी दूध के दाम 10 रुपये तक बढ़ाने की तैयारी, यूनियनों ने सरकार के सामने रखी मांग",
  "summary": "कर्नाटक के दुग्ध उत्पादक संघों ने उत्पादन खर्च और सूखे की मार का हवाला देकर नंदिनी दूध के भाव में प्रति लीटर 8 से 10 रुपये की बढ़ोतरी करने की मांग की है। सरकार ने फैसला लेने से पहले अधिकारियों से पिछले 10 वर्षों के आंकड़े और पड़ोसी राज्यों की कीमतें मांगी हैं।",
  "content": "कर्नाटक के डेयरी किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को देखते हुए राज्य के सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों ने सरकार से नंदिनी ब्रांड के दूध की दरों में संशोधन करने की सिफारिश की है। संघों का कहना है कि पशुपालन और दूध तैयार करने की लागत में बेतहाशा इजाफा हुआ है, जिसे संतुलित करने के लिए खरीद और खुदरा बिक्री मूल्य में प्रति लीटर 8 से 10 रुपये तक की वृद्धि की जानी चाहिए। इस सिलसिले में दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार के दिन विधान सौध पहुंचकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की और अपनी समस्याओं का ब्योरा सौंपा।\n\nमुख्यमंत्री ने 10 साल के आंकड़े और उत्पादन खर्च का मांगा ब्योरा\nसहकारी प्रतिनिधियों की मांग सुनने के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत समीक्षा के आदेश जारी किए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पिछले एक दशक के दौरान पशु आहार की कीमतों में हुए बदलावों का पूरा डेटा संकलित करें। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में दूध के कुल उत्पादन, स्थानीय खपत, संघों द्वारा की जा रही खरीद और प्रति लीटर दूध तैयार करने में आने वाली वास्तविक लागत का सटीक विश्लेषण तैयार करने को कहा गया है।\n\nमुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी कदम उठाने से पहले व्यापक तुलनात्मक अध्ययन करना चाहती है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने कर्नाटक की सीमा से लगे पड़ोसी राज्यों में दूध के खरीद मूल्यों और वहां उपभोक्ताओं से ली जाने वाली खुदरा दरों की पूरी जानकारी भी तलब की है, ताकि दरों का निर्धारण तार्किक रूप से किया जा सके।\n\nचारा, दवा और रखरखाव के खर्च से डेयरी किसान बेहाल\nबेंगलुरु शहरी, ग्रामीण और रामनगर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक सोसायटी यूनियन लिमिटेड के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने बैठक के दौरान पशुपालकों की जमीनी दिक्कतों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मवेशियों के सूखे और हरे चारे, चिकित्सा सामग्री तथा नियमित देखभाल के खर्चों में भारी बढ़ोतरी होने के कारण अब डेयरी चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।\n\nसूखे की गंभीर मार के असर पर बात करते हुए डी.के. सुरेश ने बताया, \"सूखे की मौजूदा स्थिति के कारण फसल के नुकसान से किसानों की आय में भारी गिरावट आई है और चारे की कम उपलब्धता के कारण डेयरी किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।\" उन्होंने जोर दिया कि जब तक दरों में सुधार नहीं होगा, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालकों को इस संकट से उबारना नामुमकिन होगा।\n\nडेढ़ वर्ष से स्थिर हैं दरें, मुंबई में पहले ही बढ़ चुके हैं दाम\nसहकारी संघ के अध्यक्ष ने यह भी दलील दी कि देश के कई अन्य राज्यों में निजी डेयरियां और सहकारी संगठन लगातार दूध और उससे जुड़े उत्पादों के दाम बढ़ाते रहे हैं। इसके विपरीत, कर्नाटक के दुग्ध संघों ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ न डालने का फैसला लेते हुए पिछले डेढ़ साल से कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। संघों के मुताबिक अब स्थिति ऐसी हो चुकी है कि बिना मूल्य संशोधन के उत्पादन जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है।\n\nमहानगरों में दूध की महंगाई का रुख देखें तो बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने भी हाल ही में अपनी कीमतों में बड़ा बदलाव किया था। मुंबई के फार्मों और डेयरियों से मिलने वाले दूध की थोक दरों में 1 सितंबर, 2026 से प्रति लीटर 9 रुपये की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। इस संशोधन के बाद वहां कीमतें 93 रुपये से उछलकर सीधे 102 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गईं। मुंबई के दुग्ध उत्पादक संगठन ने भी अपने फैसले के पीछे पशु चारे की कमी और मवेशियों की देखरेख में आने वाले भारी खर्च को ही मुख्य कारण बताया था।\n\nइसका आप पर असर\nकर्नाटक सरकार यदि दुग्ध यूनियनों के प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो इसका सीधा असर राज्य के आम घरेलू बजट और डेयरी किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।\n\n• कर्नाटक में: राज्य के उपभोक्ताओं के लिए नंदिनी दूध 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। इससे परिवारों के मासिक खानपान के बजट में बढ़ोतरी होगी और दूध से बनने वाले उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।\n• डेयरी किसानों के लिए: खरीद मूल्य बढ़ने से सूखा पीड़ित पशुपालकों को प्रति लीटर दूध पर बेहतर भुगतान मिलेगा। इससे उन्हें चारे और दवाओं की बढ़ती लागत को पाटने में सीधी वित्तीय राहत मिलेगी।\n• पड़ोसी राज्यों के लिए: कर्नाटक में दरों की संभावित समीक्षा का असर सीमावर्ती इलाकों की आपूर्ति और बाजार प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है। अन्य राज्यों के उत्पादक भी अपने यहां मूल्य वृद्धि के लिए दबाव बना सकते हैं।\n• घरेलू उपभोक्ताओं के लिए: आम जनता को पिछले डेढ़ साल से मिल रही सस्ती दरों के मुकाबले अब अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। सरकारी फैसले के बाद ही नई दरें लागू होने की समयसीमा साफ हो पाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदुग्ध संघों द्वारा कीमतों में 8 से 10 रुपये की बढ़ोतरी मांगने के पीछे गंभीर सूखा और उत्पादन लागत में आया तेज उछाल मुख्य वजह है।\n\n• लागत में भारी वृद्धि: पशुओं के आहार, हरे चारे और दवाओं के दामों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते प्रति लीटर दूध तैयार करने में होने वाला खर्च काफी बढ़ चुका है।\n• गंभीर सूखे का प्रभाव: राज्य में सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे किसानों की कृषि आय घटी है। साथ ही चारे की भारी किल्लत पैदा होने से मवेशियों का रखरखाव अत्यधिक खर्चीला हो गया है।\n• लंबे समय से स्थिर दरें: कर्नाटक में पिछले डेढ़ साल से उपभोक्ताओं के हित को ध्यान में रखकर कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं। इस दौरान पड़ोसी राज्यों और निजी कंपनियों ने अपने दाम बढ़ा लिए, जिससे राज्य के संघों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कर्नाटक के दुग्ध उत्पादक संघों ने कितनी मूल्य वृद्धि की मांग की है?\nसंघों ने सरकार से नंदिनी दूध की खरीद और खुदरा बिक्री दरों में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का आग्रह किया है।\n\n2. दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में किससे मुलाकात की?\nसंघ के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को विधान सौध में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मिलकर अपनी मांगें रखीं।\n\n3. मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए हैं?\nउन्होंने अधिकारियों को पिछले 10 वर्षों के दौरान चारे की कीमतों, प्रति लीटर दूध के उत्पादन खर्च और पड़ोसी राज्यों की दरों का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया है।\n\n4. कर्नाटक में कितने समय से दूध की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं?\nउपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य के दुग्ध संघों ने पिछले डेढ़ साल से दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।\n\n5. मुंबई में दूध की कीमतों में हाल ही में क्या बदलाव हुआ था?\nबॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने 1 सितंबर, 2026 से थोक दूध के दाम 9 रुपये बढ़ाकर 93 रुपये से 102 रुपये प्रति लीटर कर दिए थे।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-23",
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